: कुअंरु कुअंरि कल भावंरि देहीं, नयन लाभु सब सादर लेहीं
Tue, Oct 8, 2024
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रही है श्रीमनः कामेश्वरनाथ राम लीला
चतुर्थ दिन लीला में हुआ धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद लीला मंचन
मंगलवार को निकलेगी राम बरात, दुल्हन की तरह सजधज कर तैयार हुआ दिगनेर
आगरा। हर्षित हुए सब नर नारि, पुलकित हो उठी सृष्टि ही हर फुलवारी। श्रीहरि विष्णु नारायण के अवतार श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, होने लगी देवलोक से पुष्प वर्षा अतुलित। गढ़ी ईश्वरा, ग्राम दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रही श्रीमनःकामेश्वरनाथ रामलीला के चतुर्थ दिन सोमवार को धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद प्रसंग का मंचन हुआ। प्रसंग में जनकपुर में निवास कर रहे राम, लक्ष्मण व मुनि विश्वामित्र को राजा अपने मंत्री सतानंद को भेज स्वयंवर में आने का निमंत्रण भेजते हैं। मुनि विश्वामित्र के साथ पहुंचे, श्रीराम व लक्ष्मण की शोभा स्वयंवर में उपस्थित समस्त राजा आश्चर्य से देखते हैं। रंग भूमि में उपस्थित राक्षस राज रावण, बांणा सुर सहित अनेक राजा धनुष उठाने में असमर्थ होकर चले जाते हैं। वहीं कुछ अपना बल पौरुष दिखाकर लोगों के हंसी का पात्र भी बनते हैं।
राजा जनक परेशान होकर टिप्पणी कर देते हैं , जिसे सुन लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र के आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष उठाने चलते हैं। सखियां श्रीराम को हाथों धनुष टूटने की भगवान गणेश से प्रार्थना करती हैं। महारानी सुनयना एक बालक के हाथों धनुष तोड़े जाने में संदेह जताती हैं। शर्त रखने के लिए राजा जनक को कोसती हैं। सीता मन ही मन स्तुति करती हैं। इस बीच धनुष की प्रत्यंचा खिंचते ही वह तीन खंडों में विभक्त हो जाता है। लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुं न लखा देख सबु ठाढें। चौपाई गूंजती है और मंगल गीत के बीच सीता जयमाला लेकर रंगभूमि में आती हैं।
शिव के धनुष टूटने की सूचना से परशुराम क्रोधित होकर जनकपुर पहुंचते हैं। लक्ष्मण− परशुराम संवाद होता है। विश्वामित्र परशुराम का क्रोध शांत कराते हुए श्री राम जी को नारायण का अवतार कहते हैं। यह सुन परशुराम श्रीराम को अपना रमापति धनुष देकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने को कहते हैं। श्रीराम के प्रत्यंचा चढ़ाते ही परशुराम का संशय दूर हो जाता है वे श्रीराम की स्तुति कर लौट जाते हैं।
लीला मंचन से पूर्व श्रीमहंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने श्रीलक्ष्मी नारायण के स्वरूपों की आरती उतारी।
राम बरात के लिए सजी मिथिला नगरी दिगनेर
श्रीमहंत योगेश पुरी ने बताया कि अवधपुरी बना दिगनेर मंगलवार को जनकपुर की भांति शाेभित होगा। यहां मंगलवार को भव्य राम बरात निकाली जाएगी, जिसमें चारों भाइयों के स्वरूप होंगे। बरात की अगुवायी गुरु वशिष्ठ के स्वरूप में श्रीमहंत स्वयं करेंगे। राम बरात को लेकर उत्साहित स्थानीय लोगों ने हर सड़क, हर चौराहे को रंगोली और लाइटिंग से सजा दिया है। घरों की चौखटों पर महिलाओं ने तोरण लगा दिए हैं। त्रेता की सजीव झांकी की भांति इस वक्त दिगनेर का वातावरण बन चुका है। श्रीराम वरयात्रा में विभिन्न झांकियां भी निकाली जाएंगी। आगरा शहर से बड़ी संख्या में लोग आयोजन में भाग लेने के लिए पहुंचेंगे। आयोजन का लाइव प्रसारण श्रीमनःकामेश्वर मंदिर सहित शहर के विभिन्न चौराहाें और विदेशाें तक में किया जा रहा है।
30 वर्ष पूर्व बिजली को तरसता था दिगनेर
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि आज जहां श्रीराम लीला का मंचन हो रहा है, रंग बिरंगी रोशनी से पूरा क्षेत्र सजा हुआ है वहां करीब 30 वर्ष पूर्व 1993 में बिजली, महानगर बस सेवा, टेलिफोन, सड़क आदि संसाधन जुटाने के लिए स्थानीय लोगों ने आंदोलन की तैयारी की थी। सुविधा और विकास के लंबे अंतराल के बाद आज दिगनेर में श्रीराम की लीला का मंचन और शहरी क्षेत्र की भांति राम बरात का आयोजन होना संभव हो सका है।
: मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का हुआ शबरी, अंजनी पुत्र से मिलन, किया बालि वध
Mon, Oct 7, 2024
आगरा। रामलीला मैदान पर नीरज चतुर्वेदी की मण्डली द्वारा श्रीरामचन्द्र जी का शबरी को नवधा भक्ति उपदेश देने की लीला का मंचन किया गया। कक्ध राक्षस के वध के बाद प्रभू श्रीराम आगे बढ़ते हैं और शबरी के आश्रम में जाते हैं। श्री राम को देख माता शबरी की आखों में आंसू झलक जाते हैं। कहती है कि मैं वर्षों से आपका इन्तजार कर रही हूं प्रभू पर आज आपने सुध ली। प्रभू श्री राम को देखकर इतनी भाव विभोर हो जाती है और अपने पास रखे हुए बेरों को स्वयं चरखकर प्रभू श्री राम को खाने के लिए देती हैं। श्री राम भक्त का प्यार देख झूठे बेरों को खाते हैं।
श्री राम द्वारा माता शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश दिया जाता है। रामलीला मैदान आगरा में चल रही लीला में भावपूर्ण दृश्य से दर्शक भाव-विभोर हो रहे हैं। प्रभू श्री राम पम्पा सरोवर की ओर प्रस्थान करते हैं जहां पवन पुत्र से उनका मिलन होता है तथा वानरराज सुग्रीव से मित्रता होती है। वानर राज सुग्रीव द्वारा अपनी व्यथा राम को बताई जाती है। रामचन्द्र जी द्वारा सुग्रीव को राजा होने का आशीर्वाद दिया जाता है। तभी श्री रामजी द्वारा बालि को मारने की प्रतिज्ञा ली जाती है। बालि व सुग्रीव में घनघोर युद्ध होता है। सुग्रीव को प्रभू राम द्वारा अपनी माला दी जाती है।
माला के पहचानने से रामचन्द्र जी द्वारा बालि को बाण मारा जाता है तथा अपने श्रीधाम भेजा जाता है। प्रभू राम व बालि में संवाद होता है। बालि की पत्नी तारा द्वारा विलाप किया जाता है। रामचन्द्र जी द्वारा तारा को उपदेश दिया जाता है। प्रभू राम की आज्ञा से लक्ष्मण जी द्वारा महाराज सुग्रीव का राज्याभिषेक किया जाता है एवं अंगद को युवराज का पद दिया जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आरती नेशनल चैम्बर ऑफ इण्डस्ट्रीज एण्ड कॉमर्स यू०पी० आगरा, भारत विकास परिषद संकल्प, भारत विकात्त परिषद नवोदय, समर्पण समीति दिल्ली गेट, आगरा लॉयन्स क्लब आगरा महान, बाँके बिहारी सत्संग समिति, श्रीहरि सत्संग समिति आगरा, बल्केश्वर महादेव मन्दिर के महन्त द्वारा की गयी।
आरती में मुख्य रुप से नेशनल चैम्बर ऑफ इण्ट्रस्ट्रीज एण्ड कॉमर्स यू०पी० आगरा के अध्यक्ष अतुल गुप्ता व अम्बा प्रसाद गर्ग, उपाध्यक्ष मनोज गुप्ता और कोषाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, योगेश कंसल और अनिल गणपति उपस्थित थे। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोतम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, तारा चन्द, अजय गर्ग, अजूल बसंल, मुकेश जौहरी, प्रवीन स्वरुप, आनन्द मंगल, महेश चन्द, प्रकाश चन्द, राहुल गौतम, आयुष बंसल, रजत बंसल सहित अनेक पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
: गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर, चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर
Mon, Oct 7, 2024
दिगनेर के श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रहा है श्रीमनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव
रामलीला के चौथे दिन हुआ मारिच एवं अहिल्या उद्धार, गंगा दर्शन, जनकपुर प्रवेश एवं नगर दर्शन प्रसंग
आगरा। गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर के श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रही श्रीमनः कामेश्वरनाथ रामलीला महोत्सव के चतुर्थ दिन मारिच एवं अहिल्या उद्धार, गंगा दर्शन, जनकपुर प्रवेश और नगर दर्शन लीला मंचन हुआ। स्वरूपों की आरती के बाद लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रतिदिन लीला स्थल पर आगरा और दिगनेर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रविवार को श्रीमनःकामेश्वर नाथ रामलीला में विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचकर राम लक्ष्मण को मांगते हैं, परंतु वे प्रेमवश मना कर देते हैं। जिससे विश्वामित्र नाराज हो जाते हैं। इसके बाद गुरु वशिष्ठ के समझाने पर विश्वामित्र को राम लक्ष्मण सौंप देते हैं। विश्वामित्र दोनों भाइयों को लेकर वन की ओर जाते हैं और बताते हैं कि यहां पर ताड़का नाम की राक्षसी अपने पुत्र सुबाहु, मारीच के साथ रहती है और वह सुकेतु यज्ञ की पुत्री है। अगस्त ऋषि के श्राप के कारण इस वन में रहकर उत्पात मचाती है। इसलिए वह राम को कहते हैं कि इस राक्षसी का वध करना आवश्यक है। इसके बाद युद्ध होता है, जिसमें राम के हाथों ताड़का का वध होता है। इसके बाद आगे चलकर विश्वामित्र राम को अहिल्या के बारे में बताते हैं कि यह पत्थर की शिला श्राप के कारण पत्थर बन गयी थीं। इसके बाद राम अहिल्या का उद्धार करते हैं। इसके बाद जनकपुरी में वाटिका में माता गौरा के पूजन के दौरान माता सीता की श्री रामचंद्र से प्रथम भेंट होती है।
लीला प्रसंग मंचन देखने आए हुए अतिथियों ने प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रीकिशोरी लीला संस्थान के गोविंद मिश्र ने बताया कि सोमवार को लीला में राजा जनक को शिव धनुष मिलने का प्रसंग, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण परशुराम संवाद लीला का मंचन किया जाएगा। श्रीमनः कामेश्वर मठ तिलकायत श्रीमहंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि मंगलवार 8 अक्टूबर को भव्य राम बरात निकाली जाएगी। राम बरात के आयोजन के लिए पूरे क्षेत्र को स्थानीय लोगों ने दुल्हन की भांति सजाया जा रहा है। दर्जनभर से अधिक झांकियां निकाली जाएंगी।