: आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया..सीता राम विवाह प्रसंग में विदाई पर सजल हुए नेत्र
Thu, Oct 10, 2024
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रही श्रीमनःकामेश्वरनाथ राम लीला में सीता जी की विदाई के बाद हुई कोपभवन लीला
कन्यादान प्रसंग देख भावुक हुए भक्त,कैकई−मंथरा और कैकई−दशरथ संवाद सुन द्रवित हुआ हृदय
आगरा। विधि विधान संग संपन्न हुआ श्रीराम और सीता सहित चारों भाइयों का विवाह। मंगल गीतों और विवाह की उमंग से चहकती मिथिला नगरी विदाई की घड़ी आते ही सजल हो उठी।
वर−वधू की शाेभा जहां हृदय को उत्साहित कर रही थी तो वहीं विछोह की पीड़ा हृदय द्रवित कर रही थी। दिगनेरवासियों को निज पुत्री की विदाई से अधिक कष्टकारी पीड़ा हाे रही थी जनकनंदिनी की विदाई की बेला में।
बुधवार को गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर स्थित श्रीमनः कामेश्वरनाथ राम लीला के सातवें दिन सीता राम विवाह, कैकई− मंथरा और कैकई संवाद लीला का मंचन कलाकारों ने किया। लीला प्रसंग में प्रिय पुत्र श्रीराम का वधू सहित अन्य पुत्रों का माता कौशल्या, सुमित्रा और कैकई ने अयोध्या नगरी आगमन पर भव्य स्वागत किया। उन्हें हृदय से लगाया किंतु राजा दशरथ ने श्रीराम के राज्याभिषेक की घाेषणा की तो आनंद के क्षणाें को जब मंथरा के शब्दों ने भेद दिया। दूसरों की बातों में आना कितना भंयकर परिणाम दे सकता है ये सीख इस प्रसंग में मिली। मंथरा का मंतव्य न समझ कैकई ने कोप भवन लीला रची और अपने पति राजा दशरथ को वचनों के बंधन में बांध दिया। एक पिता और पति राजा दशरथ जब भाव युद्ध में फंसे तो हर आंख भर आई।
कैकई राजा दशरथ से राम को वनवास और भरत को राजगद्दी के वर मांगती है। राजा दशरथ विनती करते हैं कि राम को वनवास देने का वर मत मांगों। किंतु कैकई कहती है कि ठीक है राजन अपने वचन से मुकर जाओ। राजा दशरथ कहते हैं रघुकुल रीत सदा चली आईा, प्राण जाएं पर वचन न जाई…। इसी प्रसंग के साथ जब लीला का समापन होता है तो हर श्रद्धालु का हृदय व्याकुल हो उठता है।
लीला आरंभ से पूर्व श्रीमहंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने स्वरूपों और श्रीराम चरित मानस जी की आरती उतारी। लीला मंचन कर रहे श्रीकिशाेरी रास एवं राम लीला संस्थान के गोविंद मिश्र ने बताया कि गुरुवार को राम वनवास, केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत आगमन लीला होगी।
: हनुमान मंदिर की पुस्तक ‘‘अतुलित बलधामं’’ का हुआ विमोचन
Thu, Oct 10, 2024
आगरा। प्राचीन सिद्धपीठ, लंगड़े की चैकी हनुमान मंदिर की पुस्तक ‘अतुलित बलधामं’ का विमोचन सादा समारोह में मंदिर प्रांगण में किया गया। इस पुस्तक में आगरा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। वेदमंत्रोच्चारण के साथ मंदिर में हनुमान जी के विग्रह के समक्ष इस पुस्तक को मंदिर के मंहत डोरीदास उपाध्याय और पुस्तक के लेखक-संपादक आदर्श नंदन गुप्ता ने समर्पित किया। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा जयघोष किए गए।
महंत डोरीदास उपाध्याय जी ने बताया कि मंदिर करीब 500 सौ साल प्राचीन है। बहुत ही चमत्कारी विग्रह है। सभी की मनोकामना पूरी होती है। पुस्तक प्रकाशन से मंदिर का इतिहास जन-जन तक पहुंचेगा।
पुस्तक के लेखक आदर्श नंदन गुप्ता ने बताया कि यह पुस्तक प्रमुख उद्योगपति व वरिष्ठ समाजसेवी डाॅ.विजय किशोर बंसल की प्रेरणा और सहयोग से प्रकाशित हुई है। 88 पेज की इस पुस्तक में 24 पेज रंगीन हैं। आगरा का इतिहास व आगरा के कुछ मंदिरों के बारे में आलेख प्रकाशित हैं। कुछ श्रद्धालुओं के अनुभव भी इसमें शामिल हैं।
विमोचन के मौके पर महंत परिवार के गोविंद उपाध्याय, गोपाल उपाध्याय, गोपी उपाध्याय, राम, श्याम, भरत, लखन के अलावा शरद गुप्ता, गोपाल कुशवाह भी मौजूद रहे।
: युवा पीढ़ी में संस्कृति और संस्कार के संचार को इस्कॉन कराएगा गीता ओलम्पियाड
Wed, Oct 9, 2024
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लगभग 50 हजार बच्चों को पढ़ाया गीता सार, एक लाख का लक्ष्य,
• ऑनलाइन सहित विभिन सकूलों में कक्षा 6-12 के विद्यार्थियों को इस्कॉन दे रहा गीता की क्लास
आगरा। युवा पीढ़ी भारतीय परम्पराओं, संस्कृति और संस्कार से जुड़ी रहे, इसके लिए इस्कॉन द्वारा शहर के विभिन्न स्कूलों में गीता सार पढ़ा कर नैतिक, सामाजिक व पारिवारिक शिक्षा दी जा रही है। अब तक लगभग 100 से अधिक स्कूलों के 50 हजार विद्यार्थियों को गीता सार पढ़ाया जा चुका है, लक्ष्य एक लाख बच्चों को शिक्षित करने का है। सभी विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक उपहार प्रदान किए जाएंगे। दिसम्बर माह में सूरसदन में इंटरनेशनल गीता ओलम्पियाड का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा।
श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप प्रभु ने आज मंदिर परिसर में इंटरनेशनल गीता ओलम्पियाड के आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम में जानकारी देते हुए बताया कि अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर होते बच्चों को हमने अभी नहीं सम्भाला तो आगे बहुत विषम परिस्थियां पैदा हो जाएंगी। गीता ओलम्पियाड भविष्य की पीढ़ी को जागरूक करने के लिए छोटा सा प्रयास है। जिससे टूटते परिवार, घर-घर कलह, तलाक, अकेले या वृद्धाश्रम में गुजर कर रहे वृद्ध, जैसी सामाजिक समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके। इस अवसर पर मुख्य रूप से मनोज अग्रवाल, प्रभा गर्ग, शाश्वत नंदलाल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश अग्रवाल, काजल, हिमांशु, संजय कुकरैजा, गजेन्द्र, प्रभा गर्ग आदि उपस्थित थीं।
अब तक 100 स्कूलों के 50 हजार बच्चों को पढ़ाया गीता सार
इस्कॉन की अदिति गौरांगी ने बताया कि शहर के सभी छोटे बढ़े लगभग 100 स्कूलों में (मिशनरी स्कूलों को छोड़कर) कक्षा 6-12 तक के विद्यार्थियों के लिए गीता सार की क्लाससेज ली जा चुकी हैं। क्लास के एक हफ्ते बाद 50 नम्बर की परीक्षा होती है। इसके उपरान्त प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। अरविन्द स्वरूप प्रभु ने कहा कि मिशनरी स्कूलों में धर्मनिर्पेक्ष शिक्षा की बात कर वहां अनुमति मिलने में दिक्कत आती है। फिर भी जो बच्चे या अभिभावक गीता की शिक्षा अपने बच्चों को देना चाहते हैं, उनके लिए ऑनलाइन क्लासेस भी ली जाती हैं। बच्चे मात्र 40 रुपए में बार कोड या 9927091147 नम्बर पर सम्पर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।