: महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की कुंजी है स्वच्छता - लीना जौहरी
Thu, Oct 9, 2025
जिला कार्यक्रम अधिकारियों से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया गया ऑनलाइन प्रशिक्षण
आगरा। “सिर्फ सही समय पर हाथ धोने से 80 प्रतिशत बीमारियां रोकी जा सकती हैं… मुंह की स्वच्छता न रखने पर गर्भवती महिला और शिशु दोनों की सेहत प्रभावित हो सकती है… और कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है।”
ऐसे कई महत्वपूर्ण संदेश पोषण पाठशाला के दौरान एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस) विभाग के ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए गए।
पोषण माह के तहत आयोजित इस वर्चुअल ओरिएंटेशन कार्यशाला का विषय था-“महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में स्वच्छता का महत्व”। कार्यशाला को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने कहा कि “स्वच्छता न केवल बच्चे के विकास बल्कि धात्री महिला की सेहत की भी कुंजी है। स्वच्छ व्यवहार न अपनाने पर महिला या बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है। अगर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्वच्छता के महत्व को समझकर अपने क्षेत्र में व्यवहार परिवर्तन लाएंगी तो निश्चित रूप से प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार होगा।”
उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के उपनिदेशक डॉ. दिनेश सिंह ने कहा कि स्वच्छता केवल सफाई नहीं, बल्कि व्यवहारिक परिवर्तन है। उन्होंने बताया, “विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चा सबसे अधिक अपनी मां के संपर्क में रहता है। मां अपने बच्चे का नुकसान नहीं चाहती, लेकिन स्वच्छता का व्यवहार न होने से अनजाने में वह जोखिम बढ़ा देती है। एनएफएचएस-5 के मुताबिक, 88 प्रतिशत लोग बिना उबाले या फिल्टर किए पानी का सेवन करते हैं, जिससे संक्रमण और कुपोषण की स्थिति बनती है।” उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों की लगभग 68 प्रतिशत मौतें कुपोषण के कारण होती हैं और इसके पीछे स्वच्छता की कमी एक प्रमुख वजह है।
स्वास्थ्य व पोषण विशेषज्ञ सतीश श्रीवास्तव ने कहा कि स्वच्छता केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि एक समग्र जीवनशैली है जो शारीरिक, मानसिक और पोषण संबंधी स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में अस्वच्छता संक्रमण, समय पूर्व प्रसव, कम वजन वाले शिशु के जन्म और नवजात संक्रमण की संभावना को बढ़ाती है। प्रसव के बाद स्वच्छता की अनदेखी मातृ मृत्यु दर को भी बढ़ा सकती है। मासिक धर्म के दौरान अस्वच्छता से जननांग संक्रमण और प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं, जिन्हें साफ-सुथरे नैपकिन और व्यक्तिगत वस्तुओं के साझा न करने जैसे व्यवहारों से रोका जा सकता है।
कार्यशाला में आईसीडीएस निदेशक सरनीत कौर ब्रोका और उपनिदेशक डॉ. अनुपमा शांडिल्य ने भी विभागीय कर्मचारियों को संबोधित करते हुए स्वच्छता को महिला और बाल स्वास्थ्य सुधार का मूल आधार बताया। उन्होंने यूनिसेफ, यूपीटीएसयू, एनईसी और सीफार संस्था को सहयोग के लिए धन्यवाद भी ज्ञापित किया ।
: सीडीओ ने दस महिला टीबी मरीजों को लिया गोद
Wed, Oct 8, 2025
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सभी विभागों के प्रतिनिधियों से टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए दिए निर्देश
क्षय रोग उन्मूलन में निक्षय मित्र बनकर निभाएंगे अहम भूमिका युवा
टीबी मरीजों को गोद लेकर प्रेरित करेंगे युवा निक्षय मित्र
निक्षय मित्र टीबी मरीजों को देंगे भावनात्मक सहयोग
आगरा। मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को विकास भवन में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग सहित 11 विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। सीडीओ ने इस दौरान सभी विभागों के प्रतिनिधियों से टीबी मरीजों को गोद लेने के निर्देश दिए और उन्होंने गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) से टीबी मरीजों को गोद लेने की अपील की। इस दौरान सीडीओ ने दस महिला क्षय रोगियों को गोद लिया और उन्हें पोषण पोटली प्रदान की।
युवा भी करेंगे सहयोग
बैठक में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में युवाओं द्वारा सहयोग करने पर भी चर्चा हुई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अब युवा भी राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के युवा कल्याण एवं खेल मंत्रालय ने टीबी मुक्त भारत अभियान को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के अंतर्गत कार्य करने वाले युवाओं व संस्थाओं को ‘निक्षय मित्र’ बनाने का फैसला किया है। निक्षय मित्र के तौर पर वे, टीबी रोगियों को गोद लेने, उनकी मनो-सामाजिक सहायता करने, उपचार के तहत सही तरीके से दवाएं लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि युवा निक्षय मित्र इंफोग्राफ़िक्स, उत्तरजीवी कहानियाँ और मिथक-तोड़ने वाले संदेशों के माध्यम से टीबी मरीजों व लोगों को जागरुक करेंगे। इसके साथ ही, एनएसएस दिवस, अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस और अन्य प्रमुख आयोजनों के दौरान ‘निक्षय शपथ’ समारोह आयोजित भी किए जाएंगे। सभी युवा निक्षय मित्र टीबी सेल के साथ समन्वय कर योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कार्य करेंगे।
डीटीओ ने बताया कि युवा वर्ग को ओरिएंटेशन के माध्यम से बताया जाएगा उन्हें टीबी उन्मूलन में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस अभियान के तहत, युवा वर्ग को टीबी के बारे में जागरूक किया जाएगा और उन्हें टीबी उन्मूलन में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, मुंह से खून आना, सीने में दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ होना, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान होना, गर्दन में गिल्टी/गांठे, बांझपन और कोई अन्य लक्षण हों तो वह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या फिर निक्षय दिवस में आकर अपनी टीबी की जांच अवश्य कराएं। टीबी का उपचार संभव है, सरकार द्वारा इसकी जांच व उपचार मुफ्त होता है। इसके साथ ही टीबी मरीजों को स्वस्थ होने तक उनके बैंक खाते में निक्षय पोषण योजना के तहत एक हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।
आगरा शहर की 13 वर्षीय निवासी खुशी गौतम (बदला हुआ नाम) ने बताया कि सीडीओ मैडम ने उन्हें पोषण किट प्रदान की और उनके उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी ली। सीडीओ मैडम ने उन्हें समय पर दवा सेवन करने की सलाह दी और बताया कि एक भी दिन दवा छोड़ने से उपचार में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, उन्होंने उपचार के दौरान मास्क लगाने के महत्व पर जोर दिया ताकि किसी अन्य व्यक्ति को टीबी का संक्रमण न फैले। सीडीओ मैडम ने पौष्टिक आहार के सेवन की सलाह देते हुए कहा कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है और वह पूरी तरह से ठीक हो जाएंगी।
आयोजित कार्यक्रम में नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम की टीम का विशेष सहयोग रहा इस मौके पर डिप्टी डीटीओ डॉ॰ एसके राहुल, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, अधीक्षक सहित समस्त विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे l
: कमजोर गर्भाशय में भी मिल सकेगा मां बनने का सुख
Mon, Oct 6, 2025
विश्व में पहली बार कोचीन के डॉ. हाफिज रहमान ने कमजोर गर्भाशय में जाली (मेश) लगाकर मजबूत कर पांच महिलाओं की कराई सफल डिलीवरी
आगरा ऑब्सट्रेटिकल एंड गायनेकोलॉजी सोसायटी के नेशनल व यूपी चैप्टर व डॉ. कमलेश टंडन हॉस्पीटल एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेन्टर द्वारा आयोजित कार्यशाला सम्पन्न, 25 शोधपत्र हुए प्रस्तुत
आगरा। अब कमजोर गर्भाशय को मेश (जाली) लगाकर मजबूत बनाए जाने से ऐसी महिलाओं को भी मां बनने का सुख मिल सकेगा, जो गर्भ धारण नहीं कर पाती थीं। कोचीन के डॉ.हाफिज रहमान ने हर्निया में लगाई जाने वाली जाली (मेश) को गर्भशय पर लगाकर ऐसी पांच महिलाओं की डिलीवरी करवाई है, जो मां बनने की उम्मीद छोड़ चुकी थीं। विश्व में पहली बार ऐसी सफलता भारत में डॉ. हाफिज की इजाद तकनीक (मेश प्लास्टी ऑफ यूट्रस) से मिली है। आगरा के डॉ. अमित टंडन ने भी एक ऐसी महिला की डिलीवरी करवाई जो गर्भाशय कमजोर होने के कारण उनके पास गर्भपात के लिए आई थी। परन्तु मेश लगाकर उसके गर्भशय को मजबूत किया गया तो डिलीवरी सम्भल हो सकी।
आगरा ऑब्सट्रेटिकल एंड हायनेकोलॉजी सोसायटी के नेशनल व यूपी चैप्टर व डॉ. कमलेश टंडन हॉस्पीटल ड टेस्ट ट्यूब बेबी सेन्टर द्वारा ताज होटल एंट कनवेन्शन सेन्टर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में डॉ. हाफिज रहमान ने अपने व्याख्यान में बताया कि अक्सर गर्भाशय कमजोर होने पर महिलाओं को बार-बार गर्भपात होने से मां बनने का सुख से वंचित रह जाती थी। कार्यशाला में सूचरिंग (टांके लगाने की) हैंड ऑन वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया।
मैट्रो सिटि में 50 फीसदी तक हो रही सिजेरियन, मां बनने का सुख तो चाहिए परन्तु बिना पीड़ा के
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अमित टंडन ने बताया कि गर्भाशय के कमजोर होने का एक कारण सिजेरियन और बार-बार गर्भपात भी हो सकता है। परन्तु आज के दौर में महिलाएं मां बनने का सुख तो चाहती हैं परन्तु बिना दर्द के। सिजेरियन डिलीवरी के अधिक होने का एक मुख्य कारण यही है। छोटे शहरों में लगभग 20-30 प्रतिशत वहीं माट्रो सिटी में 50 फीसदी तक सिजेरियन डिलीवरी हो रही हैं। गर्भावस्था के दौरान शारीरिक व्यायाम न होने से भी कॉम्पलीकेशन बढ़ सकते हैं। नवें महीने पर खूब काम करना चाहिए जिससे महिला की मांसपेशियां व हड्डियों में लचीलापन बना रहे और डिलावरी सामान्य हो सके।
डॉ. नूतन जैन, मुजफ्फरनगर (चेयरपर्सन, यूपी चैप्टर आईएजीई), मीनोपॉज से पहले और बाद में ब्लीडिंग कहीं सैंकर तो नहीं
यूपी चैप्टर ईएजीआई की चेयरपर्सन डॉ. नूतन जैन (मुजफ्फरनगर) ने बताया कि मीनोपॉज से पहले और कई वर्षों बाद होने वाली अधिकता में ब्लीडिंग रसौली या कैसंर का कारण हो सकती है। अक्सर महिलाएं 40 की उम्र में अधिक ब्लीडिंग होने की समस्या को मीनोपॉज समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। वहीं 60-65 की उम्र में भी महिलाएं ब्लीडिंग की समस्या लेकर पहुंचती हैं। 10-12 वर्ष तक रसौली रहने पर वह कैंसर भी बन सकती है। इसलिए जब भी अधिकता में ब्लीडिंग हो डॉक्टर से अवश्य चेकअप करवाएं। हर वर्ष गर्भाशय में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वस्थ रहने के लिए नियमित दिनचर्या, वजन को कंट्रोल में रखना और प्रतिदिन व्यायम करें। हर रोज सेलीब्रेटिंग डे के दौर में महिलाएं महिलाएं खुद के स्वास्थ्य पर ध्या नहीं दे रही हैं।
हर गायनेकोलॉजिस्ट के लिए जरूरी हिस्ट्रोस्कोपी
डॉ. मिलिंद तेलंग (पूना) ने कहा हिस्ट्रोस्कोपी पर अपने व्याख्यान में कहा कि हर गायनेकोलॉजिस्ट के लिए हिस्ट्रोस्कोपी की ट्रेनिंग आवस्यक है। जिससे 10-20 मिनट में सोनोग्राफी की तरह बिना किसी मेडिकेशन के गर्भाशय की स्पष्ट स्थिति को जाना जा सके। यह मरीज के स्वास्थ के लिए भी बहुत आवश्यक है। भारत में मात्र अभी एक प्रतिशत गायनेकोलॉजिस्ट ही इससे प्रशिक्षत हैं। सबी गायनेकोलॉजिस्ट के प्रशिक्षित होने पर गर्भाशय से सम्बंधिक समस्या के इलाज में काफी लाभ सम्भव है। इसके लिए कार्यशाला में भी डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया। 4 दिन के कोर्स से इसका प्रशिक्षण लिया जा सकता है।
नई सम्भावनाओं की उम्मीद क साथ सम्पन्न हुआ समापन समारोह
चिकित्सा क्षेत्र में नई सम्भावनाओं की उम्मीद के साथ दो दिवसीय कार्यशाला का समापन समारोह योजित किया गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अमित टंडन ने सभी सदस्यों को कार्यशाला की सफलता के लिए स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यशाला में 25 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के सचिव डॉ. वैशाली टंडन, डॉ. संध्या अग्रवाल, डॉ. सरोज सिंह, डॉ. मधु राजपाल, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. सुधा बंसल, डॉ. आकृष्टि, डॉ. नमिता, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. निधि बंसल, डॉ. रचना अग्रवाल, डॉ. पूनम यादव, डॉ. मीनल जैन, डॉ. अभिलाषा प्रकाश, डॉ. अमिता मंगल आदि उपस्थित थीं।