: महायज्ञ और गऊदान के साथ सम्पन्न हुआ एकादशी उद्यापन
Mon, May 20, 2024
अग्रवाल महासभा बल्केश्वर द्वारा आयोजित किया गया सामूहिक एकादशी उद्यापन समारोह
40 जोड़ों ने किया उद्यापन, सामूहिक महायज्ञ व गऊदान के साथ हुआ समापन
आगरा। वैदिक मंत्रोच्चारण संग पवित्र अग्नि में सैकड़ों आहूति के साथ आज अग्रवाल महासभा बल्केश्वर द्वारा आयोजित सामूहिक एकादशी उद्यापन समारोह सम्पन्न हुआ। आगरा सहित विभिन्न स्थानों (उत्तराखंड, बरेली, मथुरा, फिरोजाबाद, टूंडला आदि) के 40 जोड़ों ने समारोह के अंत में सभी ब्राह्मणों को भोजन कराया। इस अवसर पर श्रीहरि के भक्तिमय संकीर्तन पर महासभा की सदस्याओं व श्रद्धालुओं ने नृत्य कर भक्ति के खूब रंग बिखेरे।
वाटर वर्क्स स्थित अग्रवन में आयोजित अग्रवाल महासभा बल्केश्वर के सामूहिक एकादशी उद्यापन समारोह में आज दूसरे दिन आयोजन महायज्ञ के साथ गऊदान भी किया गया। गौमाता को गुड़, हरा चारा अर्पित करते हुए उनके तिलक लगाकर व माला पहनाकर पूजन किया। गऊमाता को साड़ी उढ़ाकर उनकी आरती की गई। अंत में सभी 40 जोड़ों सहित लगभग 300 लोगों ने सामूहिक महायज्ञ में आहूति देकर उद्यापन को सम्पन्न किया। सभी ब्राह्मणों को भोजन के उपरान्त दक्षिणा व उपहार देकर विदा किया गया।
मुख्य संयोजक मुरारीप्रसाद अग्रवाल ने कहा कि अगले वर्ष एकादशी उद्यापन विस्तार देने का प्रयास किया जाएगा। जिससे अधिक से अधिक लोग इस सामूहिक उद्यापन का लाभ उठा सकें। इस अवसर पर मुख्य रूप से संस्थापक बंगाली मल, मुख्य संयोजक मुरारी प्रसाद अग्रवाल, विनय आगरी, महेश ग्वाला, उमेश अग्रवाल, जगदीश मित्तल, अजय गोयल, मनीष गर्ग, राजकुमार बॉबी, महेश जौहरी, अध्यक्ष नीलम अग्रवाल, पूनम गोयल, अनिता, दीपा, अंजू, शालिनी, गीता, प्रियंका, शगुन, रुचि, अंजली, मनीषा, प्रीति, माधवी, नीतू आदि उपस्थित थीं
: आर्ट एंड क्राफ्ट संग बच्चे सीख रहे वैदिक हवन का भी विधान
Mon, May 20, 2024
चाइल्ड केयर वेलफेयर सोसायटी के संस्कार शिविर में दिया जा रहा है वैदिक ज्ञान
15 दिवसीय शिविर लगा है नगला बूढ़ी स्थित महाकालेश्वर मंदिर में
आर्य समाज के विशेषज्ञों ने बच्चों को सिखाया वैदिक हवन करना
प्रतिदिन पंडित सुनील शास्त्री सिखा रहे हैं श्रीमद् भगवत गीता का पाठ
आगरा। यदि आदर्श देश और समाज की कल्पना करनी है तो वर्तमान की पीढ़ी को संस्कारों से पोषित करना ही होगा। संस्कारों के बीज को रोपित करने का ये कार्य कर रही है चाइल्ड केयर वेलफेयर सोसायटी।
नगला बूढ़ी, दयालबाग स्थित महाकलेश्वर मंदिर में चाइल्ड केयर वेलफेयर सोसायटी द्वारा संस्कार शिविर लगाया गया है। शिविर में नगला बूढ़ी, खलीचपुरा, ओम नगर जैसी बस्तियों में रहने वाले करीब 80 बच्चे सनातन संस्कारों सहित आधुनिक विधाओं का पाठ पढ़ रहे हैं। 15 दिवसीय शिविर में सोमवार को आर्य समाज की सुमन जग्गी द्वारा वैदिक हवन की विधि को बच्चों को सिखाया गया। मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन में आहुति करना बच्चों ने सीखा। साथ ही बच्चों को हवन का वैज्ञानिक महत्व भी बताया गया।
अध्यक्ष नीना सिंघल ने बताया कि संस्था विगत 20 वर्षों से मलीन बस्तियों के बच्चों तक आदर्श शिक्षा पहुंचाने का कार्य कर रही है। बस्तियों में रहने वाली महिलाओं के स्वरोजगार केंद्र एवं प्रौढ़ शिक्षा केंद्र भी सोसायटी संचालित करती है।
सचिव पूनम लाहौटी ने बताया कि संस्कार शिविर का प्रतिदिन आरंभ डौली शर्मा प्राणायाम के साथ करवाती हैं। पंडित सुनील शास्त्री द्वारा गीता का पाठ सिखाया जाता है। कहानियों के माध्यम से बच्चों को रामायण और महाभारत के महान पात्रों से परिचित भी कराया जाता है।
पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि वर्तमान पीढ़ी को यदि हम भारतीय संस्कृति के महान पात्रों से जोड़ेंगे तो उनके आदर्श स्थापित हो सकेंगे।
सहसचिव तपस्या बसंल और कोषाध्यक्ष उमा अग्रवाल ने बताया कि आगामी दिनों में आर्ट आफ लिविंग की कार्यशाला भी होगी, ताकि बच्चे तनावमुक्त होकर परकल्याण की भावना को समझ सकें।
शिविर में बच्चों को आधुनिक शिक्षा हेतु आर्ट एंड क्राफ्ट, पेंटिंग, इंग्लिश स्पीकिंग भी सिखाई जा रही है। शिविर में बच्चों को प्रतिदिन विभिन्न प्रकार का स्वल्पाहार भी दिया जा रहा है। शिविर की व्यवस्थाएं मुक्ता गुप्ता, डौली शर्मा, अध्यापिका ससाधना, सविता, शिखा, रेनू, सोनू आदि संभाल रही हैं।
: संगीत सुनना और गुनगुनाने से बढ़ती जिंदगी में ‘हैप्पीनेस’
Sun, May 19, 2024
प्रोग्राम की शुरुआत विक्रम शुक्ला और एसिड अटैक सुर्वीवोर्स- जीवन के दिन छोटे सही, हम भी बड़े दिलवाले हैं।
श्वांस प्रक्रिया सहित मानव के इन्द्रीय तंत्र पर भी संगीत का अनुकूल प्रभाव - वाहिया
संगीत का मानव जीवन में सदैव महत्व और सकारात्मक योगदान रहा है। लोक संगीत और पुरातन वाध्ययंत्र इसके साक्ष्य हैं। संगीत के इसी पक्ष को स्वयं समझ कर अन्यों को भी समझाने को प्रयास रत हैं हरविजय सिंह वाहिया। स्थापित एक्सपोर्टर, प्रख्यात फोटोग्राफर और कार रैली ड्राइवर के रूप में राष्ट्रीय पहचान रखने वाले श्री वाहिया जो कि फतेहाबाद रोड टूरिस्ट कांप्लेक्स में एसिड अटैक पीड़िताओं के द्वारा संचालित शीरोज हैंगआउट कैफे में आयोजित ‘म्यूजिक और हैप्पीनेस प्रोग्राम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे, ने कहा कि संगीत सुखात्मक अनुभूति देने के साथ ही मानव स्वास्थ्य के भी अनुकूल है।
संगीत का स्वास्थ्य से सीधा संबंध
श्री वाहिया ने कहा कि संगीत का श्रवण, स्वर और श्वांस से सीधा संबंध है, ये तीनों ही मानव शरीर से जुड़ी स्वाभाविक प्रक्रियायें हैं ।चाहे संगीत गायन के रूप में हो या फिर वाद्य यंत्र का श्वांस और श्रवण तंत्र को प्रभावित करता है। भजन, गीत, कविता या शास्त्रीय ग्रंथों के श्लोक हो अगर सस्वर गाये जाते हैं ये गाने वाले के साथ ही श्रोता के शरीर के इन्द्री तंत्र को प्रभावित करते है। जो एक स्वास्थ्य अनुकूल प्रक्रिया है।
श्री वाहिया ने कहा कि अपने कॉलेज के दिनों में साथियों के लिये संगीत कार्यक्रमों के आयोजनों में सहयोगी रहने की स्मृतियां अब भी हैं। किताब लिखने और फोटोग्राफी करने के उनके शौक से भरपूर उनकी जिंदगी में रहने वाली व्यस्ताओं के बीच जब भी मौका मिलता है संगीत सुनते हैं और स्वयं भी गाना गुनगुनाने से नहीं चूकते हैं।
संगीत से बढ़ती है ‘हैप्पीनेस’
एसिड फेंक कर ताजिंदगी कभी न भुलाने वाली काली करतूत की घटना से पीड़िताओं में से दो गाने का अभ्यास करने वाले ग्रुप में शामिल हो गयीं। इन दोनों ने ही महसूस किया कि संगीत कार्यक्रमों में सहभागी बनने से उनके जीवन में ‘हैप्पीनेस‘ की वृद्धि हुई है। इनमें से एक नगमा ने कहा है कि उसका शौक राहतकारी रहा है, उसने ताज महोत्सव में इस साल अपने ग्रुप के साथ गायिका के रूप में भाग लिया था। यह अवसर उसके लिये सुखान्वित करने वाला था। वह चाहेगी कि इस प्रकार के आयोजनों की संख्या में बढ़ोतरी हो जिससे उस म्यूजिक और सिंगिंग ग्रुपों को अधिक अवसर मिल सकें।
संगीत से जीवन जीने को मिलती है जरूरी ऊर्जा
अमृत विद्या एजुकेशन फार इम्मोरलिटी के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने कहा कि संगीत न केवल अनेक दुखों से उभारता है, अपितु आत्मिक तौर पर सुखद अनुभूति भी देता है। जो अपने आप में जीवन जीने की ऊर्जा है। उन्होंने ग्रुप सिंगिंग पर चर्चा करते हुए कहा कि जब भी कार्यक्रमों के आयोजन की योजना बनायी जायें तो उसमें संगीत प्रस्तुतियां भी शामिल हों। संगीत सभी के द्वारा पसंद किया जाता है, जहां वरिष्ठ अपने बीते दिनों की स्मृतियों को ताजा करते हैं, वहीं युवा वर्ग जिनमें एसिड अटैक की कूर घटना से पीडिताये भी हैं अपने तमाम तनावों और चुनौतियों को भूल कर मानसिक रूप से तनाव मुक्त होता है।
सामूहिक आयोजनों से बढ़ती है आपसी समझ
आशीष शुक्ला ने कहा कि समूह के रूप में जब कोई गतिविधि करते हैं तो परस्पर समझ के अवसर बढते हैं। यह छठवां कार्यक्रम है।उन्होंने कहा कि सोसायटी के किसी भी वर्ग का व्यक्ति हो मानव स्वभाव के अनुरूप उसके एक दो शौक या बृत्तियां जरूर होती हैं।जिनमें गाना और अपने से जुडा इतिहास के प्रति रुचियां भी हैं।
प्रशिक्षण की पेशकश
इस अवसर में श्री विक्रम शुक्ला ने कहा कि अगर एसिड अटैक प्रभावितों में से कोई सिंगिंग का शौक रखती हों तो वह उन्हें निशुल्क संगीत का प्रशिक्षण देना प्रस्तावित करते हैं। कार्यक्रम के दौरान कई संगीत प्रस्तुतियां भी हुई और आयोजकों के द्वारा कहा गया कि संगीत के माध्यम से जनजीवन में ‘हैप्पीनेस ‘ बढ़ाने वाले आयोजनों के इस क्रम को आगे भी जारी रखने का प्रयास होगा।
आज के प्रोग्राम में असलम सलीमी, राम मोहन कपूर, कॉल शिव कुंजरू, राजीव खंडेलवाल, सीमा खंडेलवाल, कांति, बीके शर्मा, अशोक अगरवाल, विवेक जैन, रोज मेरी शुक्ला, संदीप देवरानी, विशाल रियाज, पूजा देवरानी, मनोज तेंगुरिया, नवबुड्डीन, डॉ एस के चंद्रा, सुमिता रॉय, मेघा दूबे, मधुकर चतुर्वेदी, जसपाल, कल्पना शुक्ल, रफीक अहमद, स्पर्श मितल, रोशनी, प्रदीप, लता दौलतानी, वेद त्रिपाठी, ज्योति खंडेलवाल, विशाल झ, डॉ रश्मि त्रिपाठी, योगेश शर्मा, अमित रॉय आदि उपस्थित रहे।