: भात दे कर भक्त की कान्हा ने रखी लाज, श्रीकृष्ण लीला में नरसी लीला का हुआ मनोहारी मंचन
Sun, Nov 10, 2024
आगरा। श्रीकृष्ण लीला समिति द्वारा गौशाला में आयोजित श्रीकृष्ण लीला महोत्सव में जम कर भक्ति का रस बरस रहा है। रविवार को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरसी का भात देने की लीला का मनमोहक मंचन किया गया।
लीला में दिखाया गया कि नरसी मेहता भगवान कृष्ण के भक्त हैं। उनकी भाभी ध्रुत गौरी नास्तिक हैं। एक बार ध्रुत गौरी, पति बंशीधर से झगड़ा कर लेती हैं। उसी समय घर पहुंचे नरसी, भाभी से पानी मांगते हैं। क्रोधित भाभी नरसी को घर से भगा देती हैं। जंगल में घूमते समय नरसी को भगवान शंकर के दर्शन होते हैं और वे वरदान मांगने को कहते हैं। उनके कोई वर न मांगने पर भगवान शंकर नरसी व स्वयं को गोपी बनाकर वृंदावन के निधिवन में महारास दर्शन को ले जाते हैं। महारास देख नरसी इतना ध्यानमग्न हो जाते हैं कि अपने हाथ में थामे मशाल को भूल जाते हैं और स्वयं भी नृत्य करने लगते हैं और जलती हुई मशाल से जल जाते हैं। यह देख भगवान कृष्ण स्वयं नरसी से मशाल लेकर फेंक देते हैं। शंकर जी के बताने पर कृष्ण प्रसन्न होकर नरसी को वीणा और घुंघरू देकर कहते हैं कि जब भी तुम पैर में घुंघरू बांधकर वीणा से केदार राग गाओगे तब मैं प्रकट हो जाऊंगा। नरसी की पुत्री रामाबाई को भी पुत्री का जन्म होता है। बड़ी होने पर रामाबाई की पुत्री का विवाह होता है तो वह पिता को पत्र लिख कर भात मांगती है। रामाबाई का पत्र मिलने पर नरसी बहुत दुःखी होते है कि गरीबी के कारण नातिन को भात कैसे पहनाऊंगा। यही सोचकर नरसी वह पत्र भगवान कृष्ण की मंदिर में चरणों में रख देते हैं। नरसी, पुत्री के विवाह में जाते हैं। रास्ते में उनकी गाड़ी टूट जाती है, जिसे श्री कृष्ण भगवान बढ़ई का रूप बनाकर ठीक करते हैं। नरसी की पुत्री नरसी को खाली हाथ देखकर वापस जाने को कहती हैं और निराश होकर नदी में डूबने जाने लगती है। इस पर भगवान कृष्ण सांवलशाह बनकर रामाबाई को बचाते हैं और कहते हैं कि मैं भात की सारी सामग्री लाया हूं। रामाबाई वापस घर आती है। धूमधाम से भात पहनाया जाता है।
इस लीला के अंत में आरती उतारने वालों में ओम शिव धाम आश्रम, खंदौली के देवेश पचैरी, दिनकर बंसल, राजकुमार खेतान, कन्हैया लाल, अनिल अग्रवाल, राजीव बिंदी, प्रदीप अग्रवाल, अंशुल बंसल, श्रीकृष्णलीला कमेटी के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, विजय रोहतगी, शेखर गोयल, अशोक गोयल, ब्रजेश अग्रवाल, पूर्व पार्षद गिर्राज बंसल, पीके मोदी, आशु रोहतगी, आलोक गोयल, केसी अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, अजय गुप्ता आदि मौजूद रहे।
: शी विल इंस्पायर के प्लेटोपिया किड्स कार्निवल में बच्चों की मस्ती संग नारी सशक्तिकरण का संदेश
Sun, Nov 10, 2024
महिला उद्यमिता और स्टार्ट अप को समर्पित है शी विल इंस्पायर संस्था
विजय नगर स्थित स्पोर्टस बज में लगाया गया चिल्ड्रन्स डे पर कार्निवल
हो पोनोपोनो हवाइन तकनीक से दिया गया तनाव मुक्त जीवन जीने का मंत्र
आगरा। बाल दिवस के अवसर शी विल इंस्पायर संस्था ने बच्चों की मस्ती संग नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया। विजय नगर स्थित स्पोर्टस बज में रविवार को प्लेटोपिया किड्स कार्निवल का आयोजन संस्था द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि शिक्षाविद् नीलम मेहरोत्रा, रुनु दत्ता और संस्थापक राशि गर्ग ने कार्निवल का शुभारंभ किया। आयोजन परिसर में बच्चों से संबंधित विभिन्न स्टॉल्स लगायी गयीं थीं, जिन पर बच्चे अपनी मम्मियों के साथ जमकर मस्ती कर रहे थे। संस्थापक राशि गर्ग ने बताया कि संस्था का उद्देश्य नारी सशक्तिकरण को नये आयाम देना है। जो महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में स्टार्ट अप कर रही हैं, अपने कौशल का विकास करने की ललक लिये आगे आ रही हैं, उन्हें संस्था अपने विभिन्न आयोजनों में मंच प्रदान करती है। विशेष उद्यम के लिए विशेष आयोजन साल भर आयोजित किये जाते हैं। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भरता के साथ आर्थिक आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है। हमारी संस्था का ध्येय वाक्य सबके साथ आगे बढ़ना है, इसलिए एक दूसरे के सहयोग से हम कड़ी दर कड़ी जोड़ते हैं और आर्थिक आजादी के सपने को साकार करते हैं। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में किड्स कार्निवल में बच्चों से संबंधित उद्योग करने वालीं महिलाओं को मंच प्रदान किया गया है, जिसमें कंगारू किड्स, डीआइवाइ और वीनस प्ले स्कूल सहित दिव्या गुप्ता, चांदनी अग्रवाल, अनुष्का वर्मा, कृषिका जैन ने बच्चों के लिए विविध खेलों, खिलौने एवं स्टेशनरी की स्टॉल लगायीं। नेहा अग्रवाल ने जैविक खेती के बारे स्टॉल के माध्यम से बताया।
कार्निवल में विशेषज्ञ दीक्षा असवानी ने आगरा में पहली बार हो पोनोपोनो हवाइन तकनीक के बारे में जानकारी दी एवं इस तकनीक में प्रयोग की जाने वाली प्रार्थना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में पूर्वाग्रह या पूर्व के अनुभवों या भविष्य की चिंताओं के कारण अक्सर अवसाद या नकारात्मका घेरे रहती है। आंतरिक और मानसिक अवरोध होने से व्यक्तित्व विकास में बाधा आती है। इन सबसे उभरने के लिए हो पोनोपोनो तकनीक की प्रार्थना मुझे माफ करें, धन्यवाद और आइ लव यू…दबी हुयी क्षमताओं को अवसाद के अंधेरे से बाहर निकालती हैं। मन को भयग्रस्त नहीं होने देतीं। पूजा लूथरा ने बच्चों को फाइनेंशियल मैनेजमेंट के टिप्स दिए ताकि बच्चे कम उम्र से ही मितव्ययिता की महत्ता समझ सकें।
कार्निवल में दिशा जैन, अंशिका सरकार, कार्निवल संयोजिका शगुन अग्रवाल, श्रुति अग्रवाल, कीर्ति खंडेलवाल, कर्तिका खन्ना, आकृति जैन, अमिता मित्तल, आशिता अग्रवाल, अंकिता माथुर, डिंपल राज, निधि अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, अमिता मित्तल आदि उपस्थित रहीं।
: जुकाम रोकने से गल सकती हैं कान की हड्डी
Sun, Nov 10, 2024
तीन दिवसीय 32वीं इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी की वार्षिक राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए 300 शोध पत्र
1200 प्रतिनिधियों ने कान की बीमारियों पर किया नई तकनीक व इलाज पर मंथन
आगरा। जुकाम में बेवजह दवा लेना खतरनाक हो सकता है। सामान्यतः जुकाम को रोकने के बजाय उसे बहने दें। स्वास्थ के लिए यही लाभकारी है। जुकाम रोकने पर कफ कान के रास्ते बाहर आने से कान बहने, बदबू व कान की हड्डी गलने तक की गम्भीर समस्या हो सकती है। कान की नसें खराब होने पर चेहरे पर टेड़ापन और सुनने में समस्या होने लगती है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी में आयोजित तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में आज इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलाजी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजेन्द्र (बैंगलुरू) ने बताया की कान की हड्डी गलने पर यदि ऑपरेशन ठीक तरह से न किया जाए तो समस्या दोबारा भी पैदा सकती है।
भटिंडा की डॉ. ग्रेस बुद्धिराजा ने बताया कि कान के ऑपरेशन भी माइक्रोस्कोप के बजाय एंडोस्कोप विधि से अधिक किए जा रहे हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान आने वाली जटिलताओं में कमी आ रही है। डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता ने बताया कि जुकाम सामान्यतः वायरस से होता है, जिसमें दवा नहीं मरीज को आराम करना चाहिए। जब तक कफ में पीलापन न हो जुकाम में दवा लेने की आवश्यकता नहीं है। कफ में पीलापन का मतलब है कि सैकेन्ड्री इनफेक्शन यानि बैक्टीरियल इनफेक्शन है। तभी एंडीबायटिक दवाओं का प्रयोग करना उचित है, वह भी डॉक्टर की सलाह से। बेवजह दवा लेने से कान में समस्या हो सकती है।
बच्चों की आंखों पर चश्मे की तरह कान में नजर आएगी हेयरिंग मशीन
समय रहते अभिभावकों ने ध्यान नहीं दिया तो आजकल के बच्चों की आंखों पर जिस तरह चश्मे नगर आ रहे हैं, कानों में हेयरिंग मशीन नजर आएगी। घंटों तक ईयर फोन लगाकर तेज आवाज में म्यूजिक सुनना, डीजे और बढ़ता ध्वनि प्रदूषण कानों की सुनने की क्षमता पर असर डाल रहा है। कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. राजीव पचैरी ने जानकारी देते हुए बताया कि कम से कम 10-12 वर्ष की उम्र तक बच्चों को ईयर फोन, हेड फोन जैसे उपकरणों से दूर रखना चाहिए। भविष्य में बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से यह घातक हो सकता है।
ताजनगरी में पहली बार सम्पन्न हुई ऑटोलॉजी की सफल कार्यशाला
उप्र में पहली बार ऑटोलॉजी की कार्यशाला सम्पन्न हुई है। जिसका सौभाग्य ताजनगरी को मिला। तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ आटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला के सफलता पूर्वक सम्पन्न होने पर आयोजन सचिव डॉ. राजीव पचैरी ने सभी सहयोगियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर धन्यवाद देते हुए यह बात कही। आज कार्यशाला में आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सतीश जैन द्वारा शांतिवेद हॉस्पीटल से 8 लाइव ऑपरेशन भी किए गए। कार्यशाला में देश विदेश से 1200 से अधिक प्रतिनिधियों ने कान की बीमारी व एडवांस इलाज पर मंथन किया। 300 से अधिक शोधपत्र व पीजी विद्यार्थियों के लिए क्विज का आयोजन किया गया। सभी विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। संचालन डॉ. संजय खन्ना व डॉ. रितु गुप्ता ने किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. गौरव खंडेलवाल, डॉ. आलोक मित्तल, डॉ. राकेश अग्रवाल, डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. एलके गुप्ता, डॉ. दीपा पचैरी आदि उपस्थित थे।