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संत रविदास जयंती : 1500 बच्चों ने जानी संत रविदास की वाणी, समरसता महोत्सव में दिखी नई पीढ़ी की भागीदारी

Pragya News 24

Sat, Oct 3, 2026
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आगरा। मोबाइल और डिजिटल तकनीक की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रही जेन-जी और अल्फा पीढ़ी को संत परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने की पहल की गई है। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महासभा की ओर से संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय समरसता महोत्सव के दूसरे दिन करीब 1500 स्कूली बच्चे केंद्र में रहे।

आगरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों स्कूलों से पहुंचे विद्यार्थियों ने संत रविदास जी के जीवन, विचार और सामाजिक समरसता के संदेश को जाना। सत्संग और कवि सम्मेलन के माध्यम से बच्चों को भक्ति, समानता, मानवता, करुणा और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों से परिचित कराया गया।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना आयोजन का उद्देश्य
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आगरा चर्म उद्योग की नगरी भी है और करीब साढ़े तीन लाख परिवार इस उद्योग से जुड़े हैं। ऐसे में संत रविदास जी के जीवन और विचारों से नई पीढ़ी का परिचय कराना विशेष महत्व रखता है। उनके विचार जीवन को सही दिशा देने की प्रेरणा देते हैं।

महासभा के अध्यक्ष रमेश कर्दम ने बताया कि आगरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों स्कूलों के करीब 1500 बच्चों ने आयोजन में सहभागिता की। जेन-जी और अल्फा पीढ़ी को संत रविदास जी के आदर्शों से जोड़ने के लिए महोत्सव में विशेष कार्यक्रम तैयार किए गए हैं।

सच्ची संगत वही, जहां नाम और विचार की चर्चा हो
सुखमनी सेवा सभा के संस्थापक सरदार महेंद्र पाल सिंह ने सत्संग के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब में समाहित संत रविदास जी के 40 शबद और एक श्लोक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी के पास न धन था और न कोई बड़ा वैभव, लेकिन उनके पास प्रभु का सच्चा नाम और भक्ति की अनमोल संपदा थी। इसी के सहारे उन्होंने प्रभु को पाया और उनकी वाणी आज भी समाज को मार्गदर्शन देती है। सत्संग वही है, जहां प्रभु के नाम और उनके विचारों की चर्चा हो। संगत केवल किसी स्थान पर बैठने का नाम नहीं है, बल्कि व्यक्ति अपने जीवन में कैसी संगत कर रहा है, इसका भी उतना ही महत्व है। उन्होंने संत रविदास जी की वाणी “हरि सो हीरा छाड़ि कै करे आन की आस” का उल्लेख करते हुए युवाओं से अच्छे विचार, अच्छी संगत और प्रभु के नाम से जुड़ने का आह्वान किया।

सरदार महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि संत रविदास जी ने विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक भेदभाव को अपने भीतर कटुता नहीं बनने दिया। उनकी वाणी में भक्ति के साथ मानवता, समानता और करुणा का संदेश मिलता है। उनकी रचनाएं आज भी मनुष्य को आत्मचिंतन और प्रभु के नाम से जुड़ने की प्रेरणा देती हैं।

सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने “वाहेगुरु सतनाम” का सिमरन किया और संत रविदास जी की वाणी का सामूहिक गायन किया।

सांस्कृतिक विरासत को आगे ले जाएगी नई पीढ़ी
महासभा के सचिव अभिनव मौर्य ने कहा कि जेन-जी और अल्फा पीढ़ी देश का भविष्य होने के साथ संस्कृति और विरासत को आगे ले जाने वाली पीढ़ी भी है। संत रविदास जी के विचारों को केवल पुस्तकों और आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय बच्चों और युवाओं के जीवन से जोड़ना उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ महोत्सव में स्कूली बच्चों को सहभागी बनाया गया है, ताकि वे संत रविदास जी की भक्ति, समानता, मानवता और सामाजिक समरसता के संदेश को समझें और उसे अपने जीवन में उतारें। आधुनिक तकनीक के दौर में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना महत्वपूर्ण है।

कविताओं में गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश
महोत्सव के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। सत्र के मुख्य अतिथि अभिनेता श्रीकांत वर्मा रहे। संयोजक एडवोकेट अशोक चौबे ने बताया कि कवियों ने सामाजिक सरोकार, प्रेम, संस्कार और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने वाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।

पद्म गौतम ने नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण का संदेश देते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, देवरिया ने गीत “दुनिया एक वीराना, जंगल और भटकता मन बंजारा” प्रस्तुत किया।

डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने संत रविदास जी को समर्पित रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—

“जाति धर्म बंधन परे, हृदय हरि का वास। स्वयं सत्य का नाम हैं, गुरुवर संत रविदास।”

इसी क्रम में प्रो. ओमपाल सिंह निडर, लोकेश चौधरी लॉरेंस और डॉ. अंगद धारिया ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

समापन पर होगी संत रविदास कथा
प्रचार प्रमुख विजय सामा ने बताया कि महोत्सव के समापन अवसर पर दिल्ली से आए कथा व्यास भाई जी अजय द्वारा संत रविदास कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और रामदासिया समाज के लोगों का सम्मान भी किया जाएगा।

ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर डॉ. निष्ठा शर्मा, अंजली, हर्ष दिवाकर, राजेंद्र पाल एडवोकेट, सीए संजीव माहेश्वरी, विभाग कार्यवाह सुनील दीक्षित, अशोक पिप्पल, प्रमोद महाजन, राकेश जाटव, मनोज राजौरा खटीक, अभिषेक कोटिया आदि उपस्थित रहे।

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