: बच्चों में कुपोषण के साथ एनीमिया से भी मुक्ति दिला रहा एनआरसी
Thu, Jan 11, 2024
आगरा, 09 जनवरी 2024। 15 माह की शिशु आरबी को अचानक बुखार आने लगा और शरीर में सूजन आने लगी। चिकित्सक की सलाह पर जब उसे उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) लाया गया तो पता चला कि आरबी को कुपोषण के साथ-साथ सीवियर एनीमिया (खून की अत्यधिक कमी) की भी दिक्कत है। एनआरसी में भर्ती कर सही समय पर उपचार मिलने से आरबी अब पहले की अपेक्षा स्वस्थ्य हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबी जैसे कई अति कुपोषित बच्चों में कुपोषण के साथ-साथ एनीमिया की भी समस्या सामने आ रही है। ऐसे में एनआरसी न केवल कुपोषण से मुक्ति दिला रहा है बल्कि बच्चों में एनीमिया का भी इलाज कर रहा है।
बीते एक साल में एनआरसी में उपचार कराने के लिए भर्ती हुए 21 बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य समस्या के साथ खून की कमी (एनीमिया) भी मिली। एनआरसी की आहार परामर्शदाता ललितेश शर्मा का कहना है एनआरसी में अति कुपोषित बच्चों को 14 दिन के लिए भर्ती किया जाता है। इस दौरान बच्चे को उसकी जांच के बाद इलाज के साथ साथ पौष्टिक खानपान भी दिया जाता है। बच्चे को यदि कुपोषण के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं जैसे डायरिया निमोनिया, त्वचा संक्रमण, खून की कमी और पैरों में सूजन आदि है तो एनआरसी में उसका भी उपचार किया जाता है।
ललितेश ने बताया कि एनआरसी में भर्ती बच्चे के साथ में उसकी मां को भी रखा जाता है। यदि बच्चे की मां नहीं है तो घर की अन्य महिला सदस्य भी रह सकती हैं। साथ रहने वाले सदस्य को 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बच्चे के डिस्चार्ज होने पर उसके खाते में दिये जाते हैं। एनआरसी में भर्ती बच्चो के अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जाती है। काउंसिलिंग के दौरान कुपोषण के कारणों और पोषण के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया जाता है। एनआरसी से डिस्चार्ज होने के बाद अधिकतम चार फॉलो अप किए जाते हैं, ताकि पता चल सके कि परामर्श के अनुसार घर पर भी बच्चों की सही देखभाल की जा रही है या नहीं। प्रत्येक फॉलो अप के लिए भी 140 रुपए अभिभावक के बैंक के खाते में दिये जाते हैं ।
कुपोषण होने के कारण
एनआरसी की मेडिकल ऑफिसर डॉ. नीता चिवटे ने बताया कि किशोरावस्था में किशोरी का कुपोषित होना, कम उम्र में शादी, बार-बार प्रसव, बच्चों में अंतराल ना रखना, मां का कुपोषित होना, संतुलित आहार ना मिलना, सूखा रोग होना और खून की कमी होना जैसे कारक बाल कुपोषण के लिए जिम्मेदार हैं ।
ऐसे सुपोषित हो गयी आरबी
सैंया ब्लॉक के रहलई गांव की निवासी आरबी की मां नीलम ने बताया कि उनकी शादी को दस साल हो गए हैं। उनका पहला बच्चा बेटा शिवम छह साल का है। शिवम के जन्म के चार वर्ष बाद आरबी का जन्म हुआ। वह अब 15 माह की है। जन्म के बाद वह ठीक थी, लेकिन पांच माह पहले अचानक उसे बुखार हुआ और शरीर में सूजन भी दिखने लगा। क्षेत्रीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सकों की टीम ने आरबी की जांच कराई। इसके बाद टीम ने उसे जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में भर्ती करा दिया गया। एनआरसी में डॉ. नीता चिवटे द्वारा आरबी की विभिन्न प्रकार की जांचें हुईं जिनमें खून की कमी भी सामने आई। उसे हाईग्रेड बुखार के साथ दस्त भी हो रहे थे। उसका हीमोग्लोबिन 5.6 था। इसके बाद आरबी को सही पोषण आहार दिया गया और उसे तीन बार में एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। आरबी के पिता रूपेश ने खून दिया। 14 दिन के बाद आरबी को एनआरसी से डिस्चार्ज कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि आरबी को रोजाना हर दो घंटे पर फार्मूला फूड (आहार परामर्शदाता द्वारा दिए गए निर्देश पर तैयार किया गया खिचड़ी, दलिया सहित स्पेशल खाना) खिलाया जाता था। उन्होंने बताया कि आरबी को डिस्चार्ज करने से पहले भी चिकित्सीय जांचें की गई थीं। इसमें सामने आया कि आरबी के वजन और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार हुआ है। भर्ती होने के समय उसका वजन 6.4 किलोग्राम था और डिस्चार्ज के समय यह बढ़ कर 6.7 किलोग्राम हो गया था। उपचार के बाद में आरबी का हीमोग्लोबिन 8.6 हो गया। वह अब पहले से स्वस्थ है। आरबी का फॉलोअप भी चुका है। नीलम ने बताया कि आरबी को आहार परामर्शदाता ललितेश ने भुने हुए चने, चुकंदर, हरी सब्जियों को लोहे की कढ़ाई में पकाकर खिलाने के लिए कहा है। इसके साथ ही उन्होंने आरबी को विटामिन-सी युक्त नींबू का रस, आंवले का मुरब्बा जैसी चीजें और घर पर पकाए गए खाने की सलाह दी है। घर के बाहर पका हुआ कोई भी खाना न खाने की सलाह दी गयी है।
तीन प्रकार का होता है कुपोषण
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में जिला कार्यक्रम अधिकारी आदीश मिश्रा ने बताया कि कुपोषण तब होता है जब किसी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों की सही मात्रा नहीं होती है। कुपोषण को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। कुपोषित, अति कुपोषित और अति गंभीर कुपोषित। अति गंभीर कुपोषित बच्चों एनआरसी में भर्ती किया जाता है। जनपद में लाल श्रेणी में 2691 बच्चे हैं, इसमें 400 बच्चे अति गंभीर कुपोषित श्रेणी में हैं, इन्हें तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा सैम बच्चों वाले परिवार को प्रेरित करके छाया ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (छाया वीएचएसएनडी) के सत्र पर लाकर बच्चों की लंबाई और वजन किया जाता है। लंबाई और वजन के अनुसार जो बच्चे सैम श्रेणी में आते हैं, उन बच्चों की सत्र स्थल पर ही एएनएम द्वारा स्क्रीनिंग की जाती है साथ ही सैम बच्चों को उपचारित भी किया जाता है। सैम बच्चों के उपचार के दौरान एएनएम के द्वारा 6 दवाएं दी जाती हैं। एएनएम द्वारा ऐसे बच्चों का ब्यौरा ई-कवच पोर्टल पर दर्ज किया जाता हैं । एएनएम के द्वारा उन्ही बच्चों को उपचारित किया जाता है जो बच्चे सैम श्रेणी में तो है लेकिन उन्हें कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है । जो बच्चे सैम श्रेणी में है और साथ ही उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या जैसे बुखार, दस्त, डायरिया, त्वचा रोग आदि है तो ऐसे अति गंभीर कुपोषित बच्चों को तुरंत चिकित्सीय प्रबंधन की आवश्यकता होती है। लाल श्रेणी में आने वाले सभी बच्चों को सर्वप्रथम नजदीकी स्वास्थ्य इकाई पर रेफर किया जाता है। अति गंभीर कुपोषित बच्चों पर ध्यान ना दिया जाए तो जटिलताएं बढ़ सकती हैं। अति गंभीर कुपोषित बच्चों को तुरंत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम, क्षेत्रीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा जटिलताएं दिखने पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) रेफर किया जाता है । एनआरसी में ऐसे बच्चों को भर्ती कराने पर प्रत्येक आशा को 100 रुपए प्रति केस भुगतान करने का प्रावधान है।
एनआरसी में स्वस्थ हुए बच्चे
वित्तीय वर्ष भर्ती होकर स्वस्थ हुए बच्चे
2015-16 - 157
2016-17 - 202
2017-18 - 260
2018-19 - 274
2019-20 - 274
2020-21 - 115
2021-22 - 313
2022-23 - 406
अप्रैल 2023 से अक्टूबर 2023 तक - 233
: हॉफ मैराथन का फर्स्ट प्रोमो 14 जनवरी को, दौड़ेंगे सैकड़ों धावक
Thu, Jan 11, 2024
3 मार्च को एकलव्य स्टेडियम से होगा हॉफ मैराथन का शुभारम्भ
आगरा। ताजनगरी में पहली बार आगरा स्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा 3 मार्च को आयोजित होने जा रही 21 किमी की हॉफ मैराथन के फर्स्ट प्रोमो रन में 14 जनवरी को 300 से अधिक धावक दौड़ेंगे। खेलगांव से सुबह 7 बजे प्रारम्भ होने वाली फर्स्ट प्रोमो रन 5 किमी की होगी। जिसका शुभारम्भ सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव व एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता करेंगे। यह जानकारी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. विकास मित्तल ने तोता का ताल स्थित आईएमए भवन पर आयोजित पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में दी।
डॉ. विकास मित्तल, सचिव डॉ. एनएस लोधी, अजय दीप सिंह व कोषाध्यक्ष आवेग मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि मैराथन से पूर्व उत्साहित प्रतिभागियों के अभ्यास व जागरूकता के उद्देश्य से तीन प्रोमो आयोजित किए जाएंगे। 14 जनवरी को फर्स्ट प्रोमो रन का शुभारम्भ खेलगांव से किया जाएगा। 5 किमी की इस दौड़ में धावक पोइया घाट होते हुए पुनः खेलगांव पहुंचेंगे। जिसका कटऑफ टाइम एक घंटा रहेगा। हॉफ मैराथन से पहले तीन प्रोमो का आयोजन किया जाएगा। दूसरा प्रोमो 10 किमी की होगा जो एकलव्य स्टेडियम से प्रारम्भ होकर लाल किला, ताजमहल, सर्किट हाउस मार्ग से होते हुए एकलव्य स्टेडियम पर ही समाप्त होगा। वहीं तीसरा प्रोमो वेलेन्टाइन थीम पर आयोजित किया जाएगा।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल ने शहरवासियों को स्वास्थ्य की दृष्टि से हॉफ मैराथन में अधिक से अधिक लोगों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया। मैराथन में तीन कैटगरी 5 किमी, 10 किमी एवं 21 किमी हैं। 12 वर्ष की उम्र से अधिक हर व्यक्ति हॉफ मैराथन में हिस्सा ले सकता है। हॉफ मैराथन में भाग लेने के इच्छुक लोग agrasportsfoundation.org पर रजिस्ट्रेशन व 8126640855 पर फोन कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हमारी संस्था सभी प्रतिभागीयों कों अभूतपूर्व मैराथन अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. संजय गुप्ता, महेश सारस्वत, दीपक नेगी, संदीप ढल, चारू कपूर, डॉ. रचना. डॉ. माला, सपना, कमल, बारत, तुषार आदि उपस्थित थे।
: यूपी को वन ट्रिलियन इकोनॉमी का प्रदेश बनाएंगे निर्यातक, सरकार देगी साथ: अमित मोहन
Tue, Jan 9, 2024
एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 (निर्यात सम्मेलन) में उत्तर प्रदेश सरकार के निर्यात कमिश्नर एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने किया उद्यमियों की समस्या का समाधान
बोले, उत्तर प्रदेश एक्सपोर्ट काउंसिल से जुड़ें और पाएं सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ, सरकार देती है सुविधाएं बस लाभ उठाने के लिए करना होगा सही जगह सही आवेदन
डीजीएफटी के जॉइंट डायरेक्टर अमित कुमार ने भी दिखाई राह, कहा दस वर्षों में 50 फीसदी बढ़ा उत्तर प्रदेश का निर्यात उद्योग, आगरा है छठवें स्थान पर, होते हैं 197 उत्पाद निर्यात
दो दिवसीय सम्मेलन में निर्यात उद्योग से जुड़े दिग्गजों ने रखी अपनी बात, नवांकुर उद्यमी भी बोले, मार्गदर्शन से मिला प्रोत्साहन और उद्यमी के लिए दिशा, उठाएंगे टैक्निकल लाभ
एक्सपोर्ट सिम्पोजियम में निर्यातकों ने लिया संकल्प, एक मत से प्रस्ताव हुआ पास राष्ट्र, समाज, प्रकृति को रख ध्यान, करेंगे निर्यात
नवांकुर निर्यातकों को अनुभव का मिला बल, एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 के बाद विश्व बाजार में पर्दापण की करेंगे तैयारी
आगरा। सरकार औद्योगिक क्रांति के लिए योजनाएं और नीतियां बनाने में कोताही नहीं बरत रही। आवेदन करें और हर योजना का सही लाभ सही समय पर उठाएं। आगरा के प्रतिष्ठित और नवांकुर उद्यमियों को प्रदेश के पहले निर्यात सम्मेलन एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 में ये सलाह दी निर्यात कमिश्नर एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने। फतेहाबाद रोड स्थित होटल डबल ट्री बाय हिल्टन में आयोजित दो दिवसीय निर्यात सम्मेलन के समापन पर उद्यमियों की समस्या और समाधान का प्रयास पूरी तरह से किया गया।
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजन समिति के प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल (लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव) ने निर्यात सम्मेलन के उद्देश्य को रखा। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का सपना लोकल को ग्लोबल बनाना है। इसी स्वप्न को आकार देने के लिए निर्यात सम्मेलन में सकारात्मक पहल की गयी है। आयोजन समिति के कार्डिनेशन चेयरमैन राजेश गोयल (अध्यक्ष नेशनल चैंबर) ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी।
निर्यात कमिश्नर एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए निर्यात सम्मेलन जैसे आयोजन प्रोत्साहन का कार्य करते हैं। सरकार पूरी तरह से सजग और सकरात्मकता के साथ विश्व पटल पर भारतीय उत्पादों को पहुंचाने और पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आगरा अभी तक दुनिया में ताजमहल के लिए जाना जाता था किंतु अब आगरा अपने उत्पादों के लिए भी धाक जमा रहा है। उन्होंने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाने पर भी सरकार उद्यमियों को सब्सिडी प्रदान करती है। उन्होंने ये कहते हुए उद्यमियों का उत्साह वर्धन किया कि प्रदेश में औद्योगिक क्रांति के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। 2017 में बैंक लोन एमएसएमई के लिए 28 हजार 117 करोड़ था। वहीं अब 2023-24 में ये आंकड़ा 2 लाख 25 करोड़ तक पहुंच चुका है। नौ से दस माह में प्रदेश में दस प्लेज पार्कों को स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और चार बन चुके हैं। प्लेज पार्क के लिए एमएसएमई के तहत एक प्रतिशत साधारण ब्याज पर लोन दिया जा रहा है।
जो युवा उद्यमी टेक्सटाइल में कार्य करना चाहते हैं उन्हें 60 से 75 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उद्यमियों को जमीन उपलब्धता में क्लस्टर बेस माडल का प्रस्ताव वे संबंधित विभाग को रखेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक्सपोर्ट काउंसिल के सदस्य बनें और योजनाओं का लाभ लें। कॉमन फैसिलिटी सेंटर सरकार की अन्य योजनाओं के अन्तर्गत भी बन सकता है। सिर्फ एक ओडीओपी योजना ही नहीं है, सरकार विभिन्न योजनाएं उद्यम विकास के लिए बना चुकी है। रजत अस्थाना और किशोर खन्ना ने निर्यात सम्मेलन को प्रदेश के आर्थिक विकास में मील का पत्थर कहा।
धन्यवाद ज्ञापन पर आयोजन समिति के चेयरमैन पूरन डावर (अध्यक्ष एफमेक) ने कहा कि कोई भी देश तभी उन्नति कर सकता है जब वो आर्थिक रूप से स्वतंत्र और विकसित हो। इसलिए ये आवश्यक है कि अपनी सोच सदैव नौकरी करने की नहीं बल्कि देने की बनाएं।
बड़े विजन के साथ बड़ा प्रयास करें निर्यातक-ज्वांइट डीजीएफटी
सम्मेलन में आए ज्वाइंट डीजीएफटी, अमित कुमार ने कहा कि निर्यातकों को ट्रेड मैप रजिस्ट्रेशन के माध्यम से विश्व व्यापार संगठन से जुड़ी हर प्रमाणिक जानकारी मिल सकती है। निर्यातक ग्रोथ रेट, बायर डिटेल के साथ ग्लोबल मार्केट में उत्पाद की मांग की जानकारी एक क्लिक पर प्राप्त कर सकते हैं। जिलेवार उत्पादनों के निर्यात के लिए योजनाएं बनाई जा रही है। सरकार की सकारात्मक नीतियों से पिछले दस वर्षों में उप्र का निर्यात बाजार 50 फीसदी बढ़ा है। जूते को जीआई टैग मिला है, जोकि आगरा के लिए बड़ी उपलब्धि है। विभिन्न समस्याओं से जूझते हुए भी आगरा ने प्रदेश के निर्यात में छठवां स्थान प्राप्त किया है। आज आगरा से 367 करोड़ का फुटवियर निर्यात हो रहा है।
फतेहाबाद रोड स्थित होटल डबल ट्री बाय हिल्टन में आयोजित निर्यात सम्मेलन एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 में सम्मानित उद्यमियों के साथ निर्यात कमिश्नर एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद, जाइंट कमिश्नर एक्सपोर्ट अनुज कुमार, पूरन डावर, राजेश गोयल, किशोर खन्ना, रजत अस्थाना, मनीष अग्रवाल।
निर्यातकों को नहीं करना होगा परेशानी का सामानाः मारुति शरण चौबे
सम्मेलन के तीसरे सत्र में जीएसटी के एचएसएम (वर्गीकरण) की विसंगतियों को लेकर निर्यातकों द्वारा अपने विषय रखे गए। आगरा मंडल ग्रेड वन मारुति शरण चौबे ने सभी निर्यातकों की समस्या का समाधान किया। कहा कि सरकार व्यापारियों के साथ कदम ताल मिलाकर चल रही है। जिस तरह समस्याएं आती हैं, उसी तरह समाधान के विकल्प भी तैयार होते हैं। यदि सचल दल किसी भी निर्यात उत्पाद को पकड़ता है तो अधिकारियों से संपर्क करें। निर्यातकों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने देंगे।
ज्वाइंट कमिश्नर बीडी शुक्ला, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू सर्वजीत, ज्वांइट कमिश्नर प्रमोद कुमार दुबे, सीए निखिल गुप्ता, नीतेश अग्रवाल (आगरा सर्राफा एसोएसिएशन के अध्यक्ष), अरुण जैन (सचिव ब्रश एसोसिएशन), संजीव अग्रवाल (अध्यक्ष आगरा रेडिमेड गारमेंट एसोसिएशन), लघु भारती के जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता, सीए निखिल कुमार ने भी सत्र को संबोधित किया। इसके बाद फॉरेन ट्रेड एंड रिस्क मैनेजमेंट में फियो के अस्सिटेंट डायरेक्टर आलोक कुमार और ईसीजीसी के ब्रांच मैनेजर आशीष वर्मा ने इंश्योरेंस, पेमेंट, सिक्योरिटी और निर्यातकों के रिस्क मैनेजमेंट पर जिज्ञासाओं का समाधान किया। साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल ट्रेड पर एमएसएमई के कन्सलटेंट अतुल पुरी ने निर्यातकों को इंटरनेट और आनलाइन बैकिंग में सावधानी बरतने की सलाह दी। अंतिम सत्र में नये निर्यातकों को प्रतिष्ठित निर्यातक किशोर खन्ना, रजत अस्थाना, और पूरन डावर ने निर्यात को प्रकृति और समाज, राष्ट्र के लिए समर्पित करने के लिए मार्गदर्शित किया।
एक्सपोर्ट फाइनेंनसिंग में साझा की गयी लोन सुविधाः−
निर्यात सम्मेलन के द्वितीय दिवस के दूसरे सत्र में पीएनबी, एसबीआई के अधिकारियों ने एक्सपोर्ट फाइनेंस के प्रमुख बिंदुओं को रखा। पीएनबी के डीजीएम एसएन गुप्ता, सर्कल हैड अनिल कुमार आहलूवालिया, किरलोस्कर ग्रुप के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संजय ग्रोवर, एसबीआई के डीजीएम राजीव कुमार मिश्र, आलोक (एफआईईओ), आकाश (एसआईडीइीआई) ने अपने विचार रखे।
निर्यात सम्मेलन की रखी गयी ये मांगें−
निर्यात सम्मेलन में आगरा के विभिन्न उद्योगों की प्रमुख समस्याओं को बिंदुवार टैक्निकल कार्डिनेटर राहुल जैन ने प्रदेश सरकार के निर्यात कमिश्नर एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद के समक्ष रखा और सरकार के लिए एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें प्रमुख बिंदु ये रहे -
एक जिला एक उत्पाद की सूची में आगरा के दरी− कालीन उद्योग को भी शामिल किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ मिल सके।
आगरा में औद्योगिक जमीन की अत्याधिक कमी है। जिसकी वजह से योजनाएं बनकर क्रियांवन में नहीं आ पातीं।
एक जिला एक उत्पाद में आगरा के अन्य लघु उद्योगों को भी शामिल किया जाए।
इंडस्ट्री स्कीम को क्लस्टर के रूप में बनाया जाए।
व्यक्तिगत जमीन पर उद्योग लगाने की छूट मिले।
उद्योग स्थापना के लिए आवंटित जमीन पर आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा 2500 रुपये वर्ग मीटर शुल्क लिया जाता है। इसमें छूट देकर इसे एक हजार रुपये वर्ग मीटर किया जाए।
आगरा में प्लेज पार्क योजना आगरा विकास प्राधिकरण के तमाम नियमों के चलते फलिभूत नहीं हो पा रही है।
इनलैंड कंटेनर डिपो से जुड़ी परेशानी दूर कर ट्रेन सुचारू रूप से चलायी जाए। डबल डेकर फ्रेट ट्रेन चले।
जीआई टैग मिलने में आने वाली मुश्किलों का समाधान हो और कारपेट, मार्बल इनले, पेठा-दालमोंठ को जीआई टैग मिले तो निर्यात प्रोत्साहन में इजाफा होगा।
फिरोजाबाद के कलर ग्लास उद्योग को साइंटिस्ट और टैक्निशियन सहित टेस्टिंग लैब की कमी को दूर किया जाए।
इन उद्यमियों का हुआ सम्मान
निर्यात सम्मेलन में आगरा के प्रतिष्ठित निर्यातकों के साथ नवांकुर निर्यातकों का सम्मान भी किया गया। डॉ प्रशांत शर्मा, दीपांशी कटकरिया, रजत अस्थाना, किशोर खन्ना, नितिन गोयल, विशाल अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, हेमंत अग्रवाल, नीतेश अग्रवाल, अशोक माहेश्वरी, सिद्धार्थ गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता, राजीव गुप्ता को उनके उद्योग जगत में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। आयोजन समिति की ओर होटल प्रबंधन के श्याम कुमार और हर्ष महाजन का आभार व्यक्त किया गया। इसके अलावा मयंक अग्रवाल सहित एसबीआई, ओएनजीसी, लघु उद्योग भारती, नेशनल चैंबर, एफमेक, इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन, हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर एसोसिशन, रावी इवेंट, सिडबी, फिओ, ईसीजीसी, कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन, आगरा फ्लोर कवरिंग, आगरा सर्राफा एसोसिएशन, फैक्ट्री ओनर्स एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल, आगरा रेडिमेड गारमेंट एसोसिएशन का आभार व्यक्त किया।
ये रहे आयोजन में उपस्थित
वरिष्ठ पत्रकार और समिति के संरक्षक आनंद शर्मा, विजय गुप्ता (जिलाध्यक्ष लघु उद्योग भारती), किशोर खन्ना, रजत अस्थाना, प्रहलाद अग्रवाल, श्याम कुमार, दीपक अग्रवाल, सीए अनुज अशोक, राजेंद्र गुप्ता, राममोहन कपूर, केसी जैन, अनिल शर्मा, आशीष पचौरी, संजीव अरोड़ा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अमित सूरी और रिपुदमन सिंह ने किया। व्यवस्थाएं दिलीप कुमार, सागर तोमर, अमित यादव आदि ने संभालीं।