: कृमि संक्रमण से बचाव के लिए साल भर में दो बार खाएं एल्बेंडाजोल की दवा
Fri, Feb 2, 2024
आगरा। पेट में कृमि संक्रमण को रोकने के लिए बच्चों व किशोर किशोरियों को साल भर में छह-छह माह के अंतराल पर दो बार पेट से कीड़े निकालने की दवा खिलाना आवश्यक है। यह बातें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोहामंडी द्वितीय के कार्य क्षेत्र में आने वाले गढ़ी भदोरिया स्थित श्रीमती वैजयंती देवी इंटर कॉलेज में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान का शुभारम्भ करते हुए कहीं। सीएमओ की मौजूदगी में विद्यालय के 786 विद्यार्थियों को दवा खिलाई गई। जिले के सभी ब्लॉक के 5070 स्कूलों और 3007 आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के लाभार्थियों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बच्चों में स्वस्थ आदतों का विकास करके उन्हें कृमि से बचाया जा सकता है। शरीर में कृमि संक्रमण के कारण खून की कमी, कुपोषण, थकावट व बीमारी एवं कमजोरी की दिक्कत हो जाती है। इससे बचाव के लिए प्रत्येक छह माह में खिलाई जाने वाली दवा पूरी तरह से सुरक्षित है। इसी क्रम में एक फरवरी को दवा खिलाई गई है। इसका सेवन शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सामने ही किया जाना चाहिए। अभियान में किसी कारण दवा न खाने वाले लाभार्थियों के अभिभावक, उनसे जुड़े शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उन्हें पांच फरवरी को मॉप अप राउंड के दौरान इस दवा का सेवन अवश्य करवा दें।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. संजीव बर्मन ने बताया कि इस अभियान में एवीडेंस एक्शन संस्था के जिला समन्वयक शाहिद खान सहयोग कर रहे हैं। अभियान के दौरान करीब 20 लाख लाभार्थियों को दवा खिलाने का लक्ष्य है। पिछले साल चले अभियान में 96 फीसदी लाभार्थियों को दवा खिलाई गयी थी ।
इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक डॉ. विजय सिंह, लोहामंडी द्वितीय शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन श्रीवास्तव, आरबीएसके के डीईआइसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा, एविडेंस एक्शन इंडिया संस्था के जिला समन्वयक शाहिद खान, प्रधानाचार्य नितेश शर्मा सहित कॉलेज का समस्त स्टाफ मौजूद रहा ।
कृमि संक्रमण से बचाव के छह उपाय
• नाखून साफ और छोटे रखें
• खाना ढक कर रखें
• खाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद साबुन पानी से हाथ धोएं
• जब भी बाहर निकलें जूते पहनें
• पीने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें
• हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें, खुले में शौच न करें
• आसपास साफ सफाई रखें
कृमि संक्रमण के लक्षण
नोडल अधिकारी ने बताया कि गंभीर कृमि संक्रमण से दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख न लगने जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। हल्के संक्रमण में यह लक्षण नहीं दिखते हैं, इसलिए बचाव की दवा सभी को खानी चाहिए। दवा का सेवन करने से कुछ बच्चों में जी मिचलाने, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण आ सकते हैं जो स्वतः ठीक हो जाते हैं। दवा का सेवन हमेशा खाना खाने के बाद ही करना है। गर्भवती को दूसरे या तीसरे तिमाही के दौरान एक बार इस दवा का सेवन अवश्य करना चाहिए।
: 15 साल से दर्द से कराह रहे मरीज का एसएन मेडिकल कॉलेज में हुआ सफ़ल ऑपरेशन
Fri, Feb 2, 2024
गेस्टरोंसर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने की सफल सर्जरी
पैनक्रियाज में स्टोन के कारण 15 साल से मरीज के पेट में दर्द था।
आगरा. एस. एन. मेडिकल कॉलेज के गेस्टरोंसर्जरी विभाग में क्रोनिक पैनक्रिएटाइसिस का ऑपरेशन कर 60 वर्षीय एवं 65 वर्षीय मरीज को पेट के दर्द में राहत दी गई। ऑपरेशन डा. विजय कुमार सैनी व डा. चंदन चटर्जी द्वारा लेजर ऑपरेशन कक्ष में किया गया।
डॉ. विजय कुमार सैनी, सहायक आचार्य गस्टरोंसर्जरी ने बताया कि पहला मरीज गोरखपुर निवासी 15 साल से और दूसरा मरीज आगरा निवासी 13 साल से पेट दर्द की शिकायत लेकर ओ. पी. डी. में आए। मरीज की सी. टी. स्कैन रिपोर्ट में पैनक्रियाज मे स्टोन होने का पता चला, साथ ही पैनक्रियाज की डक्ट डाईलेटिड थी। मरीज के पैनक्रियाज में स्टेंट भी कराया गया था लेकिन कोई आराम नहीं मिला। मरीज का ऑपरेशन करना तय किया गया। मरीज को शुगर भी थी, इसलिए पहले शुगर कंट्रोल की गई। इसके बाद ऑपरेशन किया गया। अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है और दर्द ठीक हो गया है।
डॉ प्रशांत लवानिया, विभागाध्यक्ष सर्जरी एवं यूरोलॉजिस्ट ने बताया किे ऐसे ऑपरेशन प्राइवेट मे सामान्यतः लाखों मे होता है, लेकिन एस. एन. मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क किया गया। डॉ. विजय कुमार सैनी ने बताया की पैनक्रियाज में ग्रन्थि के पास कई खून के नलिया होने से रक्तचाप के आशंका थी। सूक्ष्म विच्छेदन कर पैनक्रियाज में नली खोलकर अंदर की पथरी निकाली गई। आंत को काट कर रु-एन-वाए लूप बनाया गया। इसमे एक आंत का टुकड़ा पैनक्रियाज की नली में जोड़ा गया।
ऑपरेशन में डॉ नितिका, डॉ लवप्रिया, डॉ दीपक, एनएसथेसिया विभाग एवं डॉ निलांसा, डॉ रेनू ने सहयोग किया। डॉ हरिसिंह रेडियोडाइगनोस्टिक विभागाध्यक्ष का भी मरीज की जाँचों में सहयोग रहा।
क्या है क्रोनिक पैनक्रिएटाइसिस
डॉ. विजय कुमार सैनी ने बताया बताया कि इस रोग में मरीजों में इन्सुलिन व खाना पचाने का एनजाइम बनाने वाली अग्न्याशय (पैनक्रियाज) ग्रन्थि की नली में रुकावट से ग्रन्थि स्वत: नष्ट होने लगती है। रक्त में इन्सुलिन की कमी से शुगर हो जाता है। खाना न पचने के कारण वज़न कम होने लगता है, साथ ही साथ अत्यधिक दर्द की शिकायत रहती है। लंबे समय तक रुकावट रहने से पैनक्रियाज में पथरी बनने लगती है। तब इसे क्रोनिक केलसिफिक पैनक्रिएटाइसिस कहते है।
क्या है इलाज
शुरुआती अवस्था में दवाई से इलाज करते है, अगर आराम नहीं मिलता तब पैनक्रियाज की सर्जरी कर मरीज को ठीक किया जाता है। एस. एन. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर की टीम द्वारा कॉलेज में सफल सर्जरी की जा रही हैं। आगरा एवं आसपास के मरीज एस. एन. मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराकर लाभ ले रहे हैं।
: एडीए द्वारा विकसित ईआरपी सॉफ्टवेयर का मंडलायुक्त ने किया शुभारंभ
Thu, Feb 1, 2024
आवंटियों, किरायेदारों एवं प्लॉट के ले आउट के डिजिटलीकरण प्रबंधन में मिलेगी सहायता
पारदर्शिता की तरफ, एडीए ने की बड़ी पहल, आगरा विकास प्राधिकरण के प्रबन्धन में नए युग का आरम्भ
आगरा। आज मंडलायुक्त आगरा रितु माहेश्वरी द्वारा एडीए द्वारा विकसित ईआरपी सॉफ्टवेयर का आगरा विकास प्राधिकरण सभा कक्ष में शुभारंभ किया। ईआरपी सॉफ्टवेयर के द्वारा एडीए की सम्पत्तियों का रिकार्ड पूर्ण तथा ऑनलाइन हो जायेगा, जिससे आवंटियों को अपना हिसाब देखने कोई किस्त या बकाया जमा करने हेतु एडीए कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। लीगल केस मैनेजमेंट सिस्टम के द्वारा विभिन्न न्यायालयों के प्रकरण में सम्पत्ति की अद्यतन जानकारी प्रदान की जा सकेगी। आवंटियों को अपनी सम्पत्ति से सम्बन्धित ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध होगी, वसूली हेतु बकायेदारों की सम्पूर्ण सूची, सम्बन्धित रजिस्ट्री के पेपर, आवंटन पत्र तथा रिक्त सम्पत्तियों की प्रमाणित सूची आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। सॉफ्टवेयर द्वारा विवादित, अवैध कब्जे, अनावंटित सम्पत्ति की जानकारी तथा अनउपलब्ध प्राकृतिक स्ट्रक्चर आदि से सम्बन्धित समस्याओं का निराकरण किया जा सकेगा।
इस सॉफ्टवेयर में ईआरपी (ERP) सॉफ्टवेयर में इंटीग्रेटेड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS), रेंटेड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सिस्टम (RMS), इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल एकाउंटिंग मैनेजमेंट सिस्टम (IFAMS), इनकम चालान मैनेजमेंट सिस्टम (ICMS), लीगल केस मैनेजमेंट सिस्टम व ई-ऑक्शन को शामिल किया गया है। ईआरपी सॉफ्टवेयर को जिसमें आवंटी घर बैठे ही अपने मोबाईल लैपटॉप तथा कम्प्यूटर सिस्टम पर अपनी बकाया व किस्त जमा कर सकेंगे, एडीए की सभी रिक्त सम्पत्तियों की जानकारी व ई-आक्शन के माध्यम से सम्पत्ति क्रय कर सकते हैं। उक्त सॉफ्टवेयर के माध्यम से एडीए की योजनाओं के अन्तर्गत सम्पत्ति का विवरण व आवंटन पत्र, रजिस्ट्री प्रपत्र विभाग को एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
सॉफ्टवेयर में एडीए के बकायेदारों की सूची को भी देखा जा सकेगा। सॉफ्टवेयर के विकास की द्वितीय चरण में प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं के डिजिटलीकरण का कार्य भी प्रारम्भ हो चुका है तथा प्राधिकरण अब योजनाओं के लेआउट का विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने के लिए भू-स्थानिक समाधान के रूप में जीआईएस (जीआईएस) का उपयोग करेगा तथा बहुत उच्च रिजॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी (सेटेलाइट इमेजरी) की खरीद, जीसीपी का संग्रह, उपग्रह डेटा का प्रसंस्करण, प्लॉट का डिजिटलीकरण, प्लॉट डेटा के विजुअलाइजेशन और विश्लेषण के लिए वेब जीआईएस आधारित एप्लिकेशन का विकास शामिल है।
प्रथम चरण में 19340 संपत्तियों का डिजिटलीकरण किया गया है। मंडलायुक्त ने सॉफ्टवेयर शुभारंभ के बाद पत्रकार वार्ता करते हुए बताया कि एडीए की तरफ से ये एक बड़ा कदम है। इंटीग्रेटेड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सिस्टम के शुभारंभ से अब अपनी किश्त व बकाया जमा करने, या अन्य सेवाओं हेतु एडीए के ऑफिस आकर पता करना पड़ता था। अब इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पूरा लेजर ऑनलाइन किया गया है, अब सभी ट्रांजेक्शन ऑनलाइन हैं, इससे एडीए की फाइनेंस मैनेजमेंट,रिकॉर्ड को अपडेट करने में मदद मिलेगी, उन्होंने बताया कि इसे मोबाइल एप में भी इंटीग्रेटेड किया जाएगा, प्रॉपर्टी के फिजिकल मैपिंग,स्टेटस एक मैप के माध्यम से मिलेगा, इसे गूगल इमेजरी से भी जोड़ा जाएगा जिससे एडीए की छिपी प्रॉपर्टी निकल के आयेगी, रिकवरी भी ठीक प्रकार से सुनिश्चित होगी। पारदर्शिता की तरफ, एडीए की ये बड़ी पहल है।