: श्याम नाम की मेहंदी रचाकर, निशान यात्रा की तैयारियां शुरू
Mon, Dec 18, 2023
श्री खाटू श्याम मंदिर, रींगस में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करेंगे आगरा के भक्त
20 − 21 दिसंबर को रींगस, राजस्थान में भव्य आयोजन करेगा श्री श्याम सेवक परिवार
निशान यात्रा संग मार्ग में लाइव भजन एवं रंगोली सज्जा होगी आकर्षण
आगरा। श्रीकृष्ण भक्ति की अनूठी मिसाल हैं खाटू श्याम बाबा और उतने ही निराले हैं उनके भक्त। आगरा से रींगस, राजस्थान तक श्याम बाबा के जयकारे लगाते हुए भव्य निशान यात्रा निकालने की तैयारियां आरंभ कर श्री श्याम सेवक परिवार समिति (रजि.) ने श्याम नाम की मेंहदी लगवाई।
जीवनी मंडी स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर पर श्याम नाम की मेहंदी लगवाते श्री श्याम सेवक परिवार समिति (रजि) के सदस्य
जीवनी मंडी स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर में सोमवार को आयोजित मेहंदी समारोह में निशान यात्रा ले जाने के उत्साह की चमक सदस्यों के चेहरों पर दिख रही थी। भक्ति की उमंग हृदय में धारण कर सभी भक्तों ने श्याम बाबा के नाम की मेंहदी अपनी हथेलियों पर लगवाई।
अनूप गोयल ने बताया कि श्री श्याम सेवक परिवार समिति (रजि.) द्वारा हर वर्ष निशान यात्रा आगरा से रींगस, राजस्थान तक ले जाई जाती है। इस बार ये भव्य आयोजन 20 और 21 दिसंबर को होगा। आगरा सहित अन्य मंडलों से हजारों भक्त 20 दिसंबर को रींगस, राजस्थान स्थित प्राचीन श्री खाटू श्याम जी मंदिर तक निशान लेकर रवाना होंगे।
पंकज अग्रवाल ने बताया कि निशान यात्रा में रथ पर सवार होकर भजन गायिका रजनी राजस्थानी अपनी मधुर वाणी से श्याम बाबा के भजनों का प्रवाह करेंगी। यात्रा की अगवानी उंट करेंगे वहीं साथ− साथ ढोल, चंग आदि वाद्ययंत्र चलेंगे। यात्रा में मुख्य आकर्षण रींगस से खाटू श्याम मंदिर तक लाइव रंगोली जबलपुर के कलाकारों द्वारा बनाई जाएगी। सायं 5 बजे तोरणद्वार पर पीलीभीत के कलाकारों द्वारा भव्य आतिशबाजी होगी। रात 8 बजे कला भवन पर रजनी राजस्थानी द्वारा भजन संध्या होगी।
आकाश गुप्ता ने बताया कि 21 दिसंबर को बैंड बाजे के साथ लाल चुनरी में महिलाएं एवं लहरियां साफा बांधे पुरुष श्याम बाबा को छत्र अर्पित करेंगे। विशाल छप्पन भोग के दर्शन होंगे और हेलीकॉप्टर के माध्यम से मंदिर पर पुष्पवर्षा की जाएगी।
मेहंदी समारोह में सीमा अग्रवाल, पूजा गोयल, महक गोयल, प्रीति बंसल, रुक्मन अग्रवाल, रिंकी गुप्ता, नेहा गोयल, दीप्ति अग्रवाल, प्राची गोयल, पल्लवी गोयल, अरुणा गोयल, साधना अग्रवाल, छाया, विपिन बंसल, प्रबल गोयल, अमित गोयल, गौरव अग्रवाल, संजय अग्रवाल, पंकज लोहिया, मनोज अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
आगरा मंदिर में 21 को सजेंगे छप्पन भाेग
निशान यात्रा के उपलक्ष्य में 21 दिसंबर को जीवनी मंडी, आगरा में स्थित श्री खाटू श्याम जी मंदिर में पोशाक अर्पित की जाएगी। साथ ही मेवा का श्रंगार, फूल बंगला एवं छप्पन भाेग के दर्शन होंगे।
: भागवत कथा श्रवण का वो ही अधिकारी, जिसने धारण किया जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का हारः आचार्य श्रीकृष्ण प्रकाश
Mon, Dec 18, 2023
मुस्कान पार्क, सेक्टर आठ में आरंभ हुई श्रीमद् भागवत की अमृत वर्षा
पहले दिन पीत परिधानों में श्रद्धालुओं ने निकाली बैंड बाजे के साथ कलश यात्रा
आगरा। पवित्र माह मार्गशीर्ष के अवसर पर सेक्टर आठ, आवास विकास कॉलोनी स्थित मुस्कान पार्क में श्रीमद् भागवत कथा आरंभ की गई। सोमवार को कथा से पूर्व बैंड बाजों के साथ कलश यात्रा निकाली गई।
प्रथम दिन के यजमान हरिओम शुक्ला और अर्चना शुक्ला सहित संरक्षक डॉ पार्थ सारथी शर्मा, अशोक चौबे, राजेश चतुर्वेदी, सर्व व्यवस्था प्रमुख श्रीकांत शर्मा, मोहिनी शर्मा, आनंद राय, पार्षद भरत शर्मा द्वारा श्रीमद् भागवत जी का विधिवत पूजन किया गया । बैंड बाजों के साथ यात्रा आरंभ हुई। पीत परिधानों में 231 महिलाओं ने कलश यात्रा में शीश पर धारण किये और पुण्य कमाया। कलश यात्रा ने सेक्टर आठ और चार का भ्रमण किया। मार्ग में जगह-जगह यात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
सेक्टर आठ, मुस्कान पार्क से निकाली गयी कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु
कथा के प्रथम दिन कथा व्यास आचार्य श्रीकृष्ण प्रकाश पाठक (वृंदावन) ने कथा का आरंभ करते हुए भागवत महात्म्य, भक्ति-नारद संवाद और गोकर्ण उपाख्यान का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा आयोजन मनोरंजन का साधन नहीं अपितु कई जन्मों का पुण्य फल होता है। भागवत कथा कैसे और क्यों सुने, ये महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कथा श्रवण से पूर्व हृदय में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को धारण करना अति आवश्यक है। साथ ही जीवन में जब तक सात्विकता का वास नहीं होता तब तक भागवत कथा के ज्ञान का समावेश आत्मा में नहीं हो सकता।
डॉ पार्थ सारथी शर्मा ने बताया कि कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4ः30 बजे तक होगा। आयोजन में मंगलवार को परिक्षित जन्म कथा, कुंति स्तुति, भीष्म स्तुति और शुकदेव आगमन प्रसंग होंगे। कार्यक्रम की व्यवस्था विवेक उपाध्याय, सुधीर चौबे, प्रदीप कौशिक, आनंद मिश्रा, पुलकित शर्मा, विष्णु पाराशर, प्रदीप शर्मा, विनोद पांडे, अभिषेक शुक्ला, रोहित शर्मा, गुंजन पाराशर, विवेक पाराशर, नरेश तिवारी, अनीता गौतम, लता शर्मा, विजय कौशिक, दीपमाला, मंजू, कुसुम, संगीता, ममता, संध्या, रेनू, भावना, बेबी, ममता आदि ने संभाली।
: पेठे की खेती करेगी यमुना मैया के प्रदूषण को मुक्त
Sun, Dec 17, 2023
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कौशाम्बी फाउंडेशन व डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री एंड कल्चर के संयुक्त संयोजन से संस्कृति विभाग में तीन दिवसीय कार्यशाला में आज रिसर्च पेपर प्रिजेन्ट किए गए
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इंटरनेशनल कांफ्रेंस इन मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड प्रैक्टिस फार सस्टेनेबल डलवपमेंट एंड इनोवेशन कार्यशाला में इटली, यूएस, कनाडा, श्रीलंका सहित 500 से अधिक प्रतिनिधि ले रहे भाग
आगरा। ताजनगरी में यमुना के प्रदूषण को पेठे की खेती दूर करेगी। खरबूज व तरबूज की तरह यमुना किनारे पेठे की खेती की जाए तो यमुना के पानी में हैवी मैटेल (जिंक, कैड्मियम, लेड, निकिल, क्रोमियम) जैसे प्रदूषण को दूर किया जा सकता है, जो कैंसर सहित कई घातक रोग के लिए जिम्मेदार हैं। सेंट जॉन्स कालेज में वनस्पति विभाग की शोधार्थी तलद खान ने आज विवि के संस्कृति विभाग में कौशाम्बी फाउंडेशन, नीलम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन व डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री ड कल्चर से संयुक्त संयोजन में इंटरनेशनल कांफ्रेंस इन मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड प्रैक्टिस फार सस्टेनेबल डलवपमेंट एंड इनोवेशन में अपने शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि फाइटोरेमीडेशन ऑफ हैवी मैटेल कन्टेमिनेशन वॉटर एंड सोइल ऑफ यमुना रिवर विषय पर तीन वर्ष के शोध के दौरान यह नतीजे प्राप्त किए। कहा कि कैलाश मंदिर, दयालबाग इंडस्ट्रीयल क्षेत्र, धांधुपुरा क्षेत्र में माह में तीन बार अलग-अलग समय पर यमुना के पानी की जांच की गई। जहां ट्रीटमेंट किए बगैर व्यवसायिक व सीवर का पानी सीधे यमुना में डाला जाता है। यहां यमुना की मिट्टी में हैवी मैटेल की मात्रा बहुत अधिक थी, जो न के बराबर होनी चाहिए। हैवी मैटेल, लिवर, किडनी सहित कैंसर जैसे रोगों के लिए भी जिम्मेदार हैं। हमने अपने शोध में पाया कि कुकरविटेसी फैमिली का पौधा बेनिनकेसा हिस्पेडा (पेठा) की पौध हैवी मैटेल के प्रदूषण को सबसे अधिक मात्रा में शोषित कर लेता है, जिससे यमुना के पानी व मिट्टी में मौजूद हैवी मैटेल का प्रदूषम तेजी से कम हुआ। यानि कुकरबिटेसी फैमिली के तरबूज और खरबूज की खेती साथ पेठे की खेती यमुना किनारे की जाए तो यमुना के प्रदूषण तो तेजी से काफी कम किया जा सकता है।
मिलीग्राम/प्रति किग्रा
सामान्य स्थिति में पेठे के पौधे से ट्रीटमेंट के बाद केंचुए की खाद के साथ ट्रीटमेंट
जिंकः 383 200 64
निकिलः 120 28 22
लेडः 202 58 44
कैड्मियमः 52 24 26
क्रोमियमः 249 122 87
वहीं जवाहरलाल नेहरू एग्रीकल्चरल विवि के एक्सटेंन्सन एजूकेशन टीकमगढ़ कैम्पस के अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि किस तरह से उनके संस्थान में भारतीय अनुसंधान परिषद से प्राप्त परियोजना प्रोजेक्ट के तहत ग्लूटन फ्री गेंहूं के बीज तैयार किए जा रहे हैं। ग्लूटन फ्री गेंहूं से तैयार आटे में खिंचाव कम और स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक होता है। नैनों तकनीक के जरिए जीन्स में परिवर्तन कर फसल, फल और फूलों की ऐसी नस्लें तैयार की जा रही हैं जिन पर बीमारियां नहीं लगती। जिस कारण कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना पड़ता। बताया कि मप्र गेंहूं की पैदावार के लिए बहुक बड़ा क्षेत्र है। परन्तु कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी है। इसलिए ऐसे बीच बी तैयार किए गए हैं, जिन की सिंचाई में कम पानी का प्रयोग होता है।
खेतों में पराली जलाने से घट रहा फसलों का उत्पादन
आगरा। हरियाणा रोहतक, बाबा मस्तनाथ विवि की डॉ, चंचल मल्होत्रा अपने सिलिकॉन फर्टीलिजर का शोध टमाटर व चावल की फसल पर किया। जिससे टमाटर की फसल मेंलगभग 20 प्रतिशत और चावल की फसल में 120 प्रतिशत उत्पादन बढ़ गया। इतना ही नहीं टमाटर में पाए जाने वाले एंटीकैंसरस लाइकोपीन पिगमेंट की मात्रा भी बढ़ गई। डॉ. चंचल ने बताया कि खेतों में पराली जलाना मिट्टी में सिलिकॉन की कमी होने का सबसे बड़ा कारण है। दक्षिण भारत में सिलिकॉन खाद का प्रयोग काफी किया जा रहा है, परन्तु उत्तर भारत में जागरूकता की कमी है। सामान्यतौर पर सिलिकॉन मिट्टी में पाया जाता है। गेंहूं व धान की फसल सबसे अधिक सिलिकॉन मिट्टी में से शोषित कर लेती है। फसल कटने बाद बची पराली में बहुत अधिक मात्रा में सिलिकॉन पाया जाता है। जिसे किसी तरह नरम बनाकर मिट्टी में मिला दिया जाए तो मिट्टी में सिलिकॉन की कमी नहीं रहेगी। सिलिकॉन को मिट्टी में मिलाने के लिए सिलिकन साल्यूबलाइजेशन बैक्टीरिया का प्रयोग किया जाता है, जिससे पराली नरम होकर मिट्टी में आसानी से घुल जाती है। सिलिकॉन खाद के प्रयोग से मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा भी बढ़ जाती है। आर्गेनिक कार्बन की मात्रा खेतों में रसायनिक खाद व कीटनाशकों के प्रयोग से लगातार कम हो रही है। आर्गेनिक कार्बन के बना मिट्टी मृत यानि बालू के समान हो जाती है। सिलिकॉन खाद का प्रयोग तीन वर्ष में एक बार करके ही किसान अपनी फसल की उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं।
18 को होगी अवार्ड सेरेमनी
आगरा। कौशाम्बी फाउन्डेशन के चेयरमैन लक्ष्य चौधरी ने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर 150 रिसर्च पेपर व 50 पोस्टर प्रस्तुत किए जा रहे हैं। 18 दिसम्बर को सुबह 11 बजे से पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जाएगा। आज रिसर्च पेपर प्रिजेन्टेशन कार्यक्रम का संयोजन विमल मोसाहरी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. नितिन वाही, प्रियांसी राजपूत, नीतू सिंह, अंकित वर्मा, तुषार चौधरी, संजय कुमार आदि मौजूद रहे।