: बजाओ ढोल स्वागत में, मेरे घर राम आए हैं… राम मंदिर अक्षत वितरण में दिखा उत्साह-उल्लास
Tue, Jan 2, 2024
संघ के प्रचारक और भाजपा के सह संगठन महामंत्री भवानी सिंह की स्मृति में हुई भजन संध्या
भवानी सिंह जी के साथी रामसिया विकास गुप्ता ने स्थानीय लोगों और श्रमिकों में किये अक्षत वितरित
आगरा। जनम-जनम की प्यास बताए, राम से चलकर राम पर आए, मेरी चौखट पर चलकर आज चारों धाम आए हैं… जैसे रामभक्ति के भजनों के साथ राममय हुआ नेशनल हाईवे स्थित महाजन परिसर।
मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक और भाजपा के प्रदेश सह संगठन महामंत्री भवानी सिंह की स्मृति में भजन संध्या का आयोजन रामसिया विकास गुप्ता द्वारा किया गया। एमएलसी विजय शिवहरे ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम आरंभ किया। पंडित शुक्र देव और रिंकू सिंह ने अपनी मुधर वाणी से श्रीराम की भक्ति से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति जब दी तो जय श्री राम के जयघोष गूंजने लगे। एमएलसी विजय शिवहरे ने कहा कि भवानी सिंह कर्मठता और देशभक्ति की मिसाल थे। भाजपा को मजबूत करने में उनका बहुमूल्य योगदान रहा। रामसिया विकास गुप्ता ने कहा कि भवानी सिंह जी का पूरा जीवन जन सेवा को समर्पित रहा। इसके बाद अयोध्या से चले श्रीराम मंदिर के पुण्य अक्षतों का वितरण स्थानीय लोगों और श्रमिकों को किया गया।
इस अवसर पर पंकज खंडेलवाल, अशोक कुलश्रेष्ठ, भवेंद्र, राजन चौधरी, सुनील दीक्षित, केशव, आनंद, मधुकर चतुर्वेदी, शशिकांत गुप्ता, ओएस गर्ग, डॉ राहुल शर्मा, श्याम तिवारी, ऋषभ गुप्ता, हिमांशु गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
: अग्रवाल युवा संगठन ने परिजनों संग मनाया नव वर्ष
Tue, Jan 2, 2024
तीन पीढियों संग उत्साह व उमंग के साथ मना नया वर्ष, मनोरंजक प्रतियोगिताओं संग खूब किया इंजॉय
आगरा। महिलाओं व बच्चों के लिए आकर्षक व मनोरंजक प्रतियोगिताएं के साथ मस्ती और उमंग की शाम में खूब धमाल हुआ। अग्रवाल युवा संगठन द्वारा महाराजा अग्रसेन भवन में नववर्ष के उपलक्ष्य में पारीवारिक मिलन समारोह का आयोजन उत्साह के साथ किया गया। परिवार की तीन पीढियों ने मिलकर नया साल मनाया। बड़ों के चरण स्पर्श कर तो मित्रों को गले लगाकर और बच्चों को आर्शीवाद देकर नए साल की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ संगठन के सदस्यों के परिवारीजनों ने महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। वहीं महिलाओं के लिए म्यूजिकल चेयर, अन्ताक्षरी में हिस्सा लेकर खूब इजाय किया। सभी परिवारीजनों का स्वागत अध्यक्ष गणेश कुमार बंसल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक प्रतीक गोयल, अंकित अग्रवाल ने दिया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से महामंत्री अम्बुज अग्रवाल, मयंक गर्ग, उज्ज्वल अग्रवाल, संजय अग्रवाल, विनय अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, अखिल बंसल आदि उपस्थित रहे।
: निर्यात सम्मेलन में रखी जाएगी आगरा में कालीन बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापना की मांग
Mon, Jan 1, 2024
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8 और 9 जनवरी को होने जा रहे एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 (निर्यात सम्मेलन) में रखेंगे आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन अपनी बात
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संगठन ने निर्यात सम्मेलन आयोजन समिति के समक्ष उठाई आगरा दरी की तरह आगरा कालीन को जीआई टैग मिलने की मांग
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आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन के पदाधिकारी बोले, कारपेट उद्योग के लिए प्रदूषण बोर्ड की अलग से बने नीति तभी मिलेगा बढ़ावा
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मुगलकाल में हुई थी आगरा में कालीन और बुनाई उद्योग की स्थापना, फारसी तकनीक से होता है कालीनों की बुनाई का काम, लाल पृष्ठभूमि होती है विशेषता
आगरा। मुगलिया काल में आगरा को एक विशेष उद्योग मिला था। मुगल बादशाह अकबर ने आगरा के लोगों को कालीन बुनाई के उद्योग से जोड़ा और इसके बाद यहां के कारीगरों ने अपनी पहचान विश्व पटल तक पर बना दी। आज वही उद्योग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। 8 और 9 जनवरी को होने जा रहे एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 (निर्यात सम्मेलन) में कालीन बुनाई उद्योग से जुड़ा आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन अपनी बात रखेगा और सरकार से प्रमुख मांग करेगा।
सोमवार को बंसल नगर, फतेहाबाद रोड स्थित रमन एक्सपोर्ट पर एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 (निर्यात सम्मेलन) आयोजन समिति के पदाधिकारियों के साथ आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन ने बैठक की। संगठन के अध्यक्ष संतोष माहेश्वरी ने कहा कि ‘आगरा कालीन’ को ‘आगरा दरी’ की तरह सरकार द्वारा जीआई टैग (भौगोलिक संकेत) प्रदान किया जाना चाहिए। ताकि आगरा के कालीन का मूल्य और उससे जुड़े लोगों का महत्व बढ़ सके। इतना ही नहीं, जीआई टैग मिलने से फेक प्रॉडक्ट को रोकने में मदद भी मिलेगी और कालीन निर्यातकों को आर्थिक फायदा मिलेगा।
उपाध्यक्ष राजेश जैन कोटा ने कहा कि कालीन उद्योग श्रमिक प्रधान उद्योग है किंतु यहां के निर्यातक कुशल बुनकरों की कमी से जूझ रहे हैं। इस कमी को दूर करने के लिए आवश्यक है कि नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने हेतु आगरा शहर में सरकार द्वारा कालीन बुनाई प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की जाए। ताकि ये उद्योग बंद न हो और शहर में ही युवाओं को रोजगार मिल सके। तभी आगरा जिले से युवाओं का पलायन भी रुक सकेगा।
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल भारत सरकार के कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर के सदस्य राम दर्शन शर्मा ने ऊन आयात शुल्क समस्या पर अपनी बात रखी, कहा कि भारत में उत्पादित ऊन अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुकूल नहीं होता। इसकी भरपाई के लिए कालीन उत्पादकों को न्यूजीलैंड, टर्की एवं अन्य देशों से गुणवत्तापूर्ण ऊन का आयात करना होता है। सरकार द्वारा आयातित ऊन पर अत्याधिक आयत एवं सीमा शुल्क रोपण के कारण कालीन उत्पादकों की लागत एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है। ऐसे में केंद्र सरकार को आयातित ऊन पर अधिरोपित आयात एवं सीमा शुल्क में युक्तिकरण एवं घटौती करनी चाहिए।
कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध अग्रवाल ने कहा कि कालीन निर्यातकों द्वारा कालीन और दरी जैसे निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट आरओडीटीईपी योजना के तहत दरों में बढ़ोत्तरी और मूल्य सीमा को हटाने की प्रमुख मांग रही है। यह सभी बातें करों के लिए पर्याप्त रूप से मुआवजा नहीं देती हैं जिसका कालीन निर्यातकों द्वारा भुगतान किया गया। कालीनों के लिए आरओडीटीईपी दरें निर्यात के मूल्य के 1.2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत के बीच हैं। निर्यातकों का कहना है कि यह अत्यधिक अपर्याप्त है। विभिन्न श्रेणियों के कालीनों पर भी विभिन्न सीमाएं लगाई गई हैं, जिसका अर्थ है कि छूट निर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं हो सकती। आरओडीटीईपी योजना, परिवहन में उपयोग किए जाने वाले ईंधन पर वैट, मंडी कर और निर्यातित वस्तुओं के निर्माण के दौरान उपयोग की जाने वाली बिजली पर शुल्क जैसे एम्बेडेड कर्तव्यों और करों को वापस करती है, जिन्हें अन्य योजनाओं के तहत छूट नहीं मिलती है। इसने WTO-असंगत MEIS योजना का स्थान ले लिया है।
एक्सपोर्ट सिम्पोजियम के टैक्निकल कॉर्डिनेटर राहुल जैन ने कहा कि आगरा टीटीजेड क्षेत्र में आता है। यहां वही उद्योग लग सकते हैं जिनसे प्रदूषण न होता हो किंतु कालीन उद्योग को रंगाई के कारण प्रदूषणकारी उद्योग में रखा गया है। जिसके कारण उद्यमियों को रंगाई दूसरे शहरों में करवानी पड़ती है। जिसमें लागत अधिक लगती है। यदि नीरी और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गाइड लाइन बना दे और प्रदूषण रोकथाम के लिए लगने वाले उपकरणों पर सब्सिडी दे दे तो उद्यमियों की लागत कम हो जाएगी। इसके अलावा उद्योग में काम करने वाले कारीगरों को श्रमिक कानून में लाभ मिलना चाहिए। इन सभी प्रमुख बातों का बिंदुवार ड्राफ्ट बनाया गया है जो कि निर्यात सम्मेलन में सरकार के प्रतिनिधियों को सौंपा जाएगा।
प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल ने बताया कि निर्यात सम्मेलन आगर और अलीगढ़ जिलों के सभी उद्योगों की निर्यात के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगा और समस्याओं का समाधान खोजेगा। निश्चित रूप से सम्मलेन के माध्यम से आगरा और अलीगढ़ के सभी उद्योगों की पहचान विश्वपटल पर बन सकेगी। बैठक में रिपुदमन सिंह, सागर तोमर, अमित यादव आदि उपस्थित रहे।
ये है आगरा के कालीन उद्योग की विशेषता
आगरा में कालीन बुनाई उद्योग की स्थापना बादशाह अकबर ने 16 शताब्दी में की थी। तभी से फारसी तकनीक से उच्चतम गुढ़वत्ता के कालीनों की बुनाई का काम यहां होता आ रहा है। आगरा के कालीनों में पारंपरिक सफ़ाविद डिज़ाइन और बुनाई तकनीक के साथ एक लाल पृष्ठभूमि की विशेषता होती है। आगरा में कालीन बुनाई उद्योग से प्रत्यक्ष रूप से 20000 से अधिक लोग रोजगार पा रहे हैं। आगरा परिधि में 100 से अधिक गांव में 5000 लूम ( खढी, करघा) यंत्र मौजूद हैं। 6 स्क्वायर फीट से लेकर 300 स्क्वायर फीट तक के कालीन यहां बनते हैं। उच्च गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगरा के कालीन अपनी अलग पहचान रखते हैं।