: आगरा की धर्मनगरी में हुआ 21वां मुनि दीक्षा जयंती समारोह
Fri, May 24, 2024
आगरा। श्री 1008 हसायन पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, सेक्टर 4 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा आगरा में विराजमान आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के परम् प्रिय शिष्य मेडिटेशन गुरु उपाध्यय श्री विहसंत सागर जी महाराज जी, संसघ के सानिध्य में 21वां दीक्षा जयंती समारोह बड़े धूमधाम से मनाया गया। आज उपकारी के उपकार - दिवस कर दीक्षार्थी आना मुनि बने आज 21 वर्ष पूर्ण हुए। मेडिटेशन गुरु मुनिराज विहसन्त सागर का जन्म 12 अगस्त 1983 को जगदलपुर छत्तीसगढ़ में हुआ। मेडिटेशन गुरु मुनिराज विहसन्त सागर का ग्रहस्थ अवस्था का टीकमगढ़ से खास नाता है। मबई ग्राम इनका ननिहाल था और माडुमड(पपौरा जी) इनका पैतृक गाँव था। 24 मई को श्रुतपंचमी थी इसी दिन 2004 नागपुर महाराष्ट्र में गणाचार्य श्री विराग सागर जी मुनिराज से मेडिटेशन गुरु मुनिराज विहसन्त सागर ने क्षुल्लक दीक्षा ली थी। 27 फरवरी 2012 सोनागिर क्षेत्र में मुनि दीक्षा, 13 फरवरी 2023 को उपाध्याय पद मिला।
आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के चित्र के सम्मुख चित्र अनावरण आगरा दिगम्बर जैन परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, मंत्री सुनील जैन ठेकेदार, राकेश जैन पर्दे वाले, मनोज बाकलीवाल, अनिल जैन रहिश, राजकुमार जैन, राजू गोधा,सुबोध पाटनी ने किया। दीपप्रज्जवलन विजय जैन-अभय जैन निमोरब ने किया। पंडित आशुतोष शास्त्री के सानिध्य मे ध्वजारोहण अशोक जैन-नीलिमा जैन, अशय जैन-शैफाली जैन बगदा ने किया और मंच उद्धघाटन महावीर प्रसाद जैन ने किया। दीपेश जैन ने भजन पर श्रृद्धालुओं के नृत्य ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। आगरा के सभी मन्दिर कमेटी के लोगों ने चातुर्मास के लिए मुनि श्री श्रीफल चढ़ाया गया।
मेडिटेशन गुरु उपाध्यय श्री विहसंत सागर जी महाराज ने बताया
आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज जी ने नागपुर मे मुनि दीक्षा मेडिटेशन गुरु उपाध्यय श्री विहसंत सागर जी महाराज जी को दी ती स दीक्षा के दिन धोती-दुप्पटा पहनकर सुबह-सुबह प्राचीन मन्दिर नागपुर में भगवान आदिनाथ का मस्तकाअभिषेक किया और आचार्य श्री ने 400 साधुओ के सानिध्य में मुनि श्री का नाम विहसंत सागर जी महाराज रखा। महानुभावो की बड़ी अनुकम्पा बहुत पड़ती हैं पुरे 400 साधुओं के संघ मे सबसे लाडला, सबसे प्यारा उन्होंने मुझे समझा इसलिए अपनी जन्म नगरी का जन्मकल्याण पंचकल्याणक में साधु सम्मेलन सबसे छोटे संघ को दे दिया, जाओ तुम्हें करवाना हैं और एक दिन में मीटिंग नहीं की, नहीं कोई व्यवस्था नहीं और बागडोर सौप दी। आज उनकी दीक्षा जयंती के रूप में कार्यक्रम बना रहे हैं और आचार्य श्री ने पिछि और कमंडल सौप दी।
मुनि श्री का पाद प्रक्षालन सुमेर चंद जैन परिवार ने किया, शास्त्र भेंट और बालिका मण्डल ने मंगलाचरण किया। मुनिश्री के दीक्षा दिवस पर देश के विभिन्न प्रांतों से आए हजारों भक्तों ने भाग लिया। इस मौके पर धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। प्रांगण में आयोजित दीक्षा समारोह में ग्वालियर, घिरोर, दिल्ली से आदि प्रांतों से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। दोपहर में जैसे ही मुनिश्री के संघ का मंच पर आगमन हुआ समूचा परिसर उनके जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मंच संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया।
इस मौके पर मंदिर कमेटी अध्यक्ष उमेश जैन, मंत्री सुशील जैन, कोषाध्यक्ष जिनेश जैन, मुकेश जैन, डॉ आलोक जैन, प्रवीन जैन, सुनील जैन ठेकेदार, विजय जैन निमोरब, अनिल आदर्श जैन, हेमा जैन, सुमेर चंद जैन, संतोष जैन, राकेश जैन, शुभम जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन और नवयुवक मण्डल, सकल जैन समाज मौजूद था।
: आगरा के कवियों ने दी मां की ममता को काव्य श्रद्धांजलि
Fri, May 24, 2024
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ममता देवी वर्मा की स्मृति में आयोजित हुआ काव्य श्रद्धांजलि एवं साहित्य सम्मान समारोह
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राष्ट्रीय हास्य कवि लटूरी लट्ठ को प्रदान किया गया साहित्य रत्न सम्मान
आगरा। मां की ममता का न कोई सार है, मां के आंचल में बसा खुशियों का संसार है। समाज सेवी श्रीमती ममता देवी वर्मा की स्मृति में इन्हीं भावों के साथ आयोजित किया गया पंचम काव्य श्रद्धांजलि एवं प्रथम साहित्य रत्न सम्मान समारोह।
संजय प्लेस स्थित अवध बैंकट हॉल में हुए आयोजन का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ विजय श्रीवास्तव(प्रधानाचार्य आरबीएस डिग्री कॉलेज), विशिष्ट अतिथि डॉ लवकुश मिश्रा(विभागाध्यक्ष पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन, विवि), संजय वर्मा(परियोजना निदेशक, एनएचएआई), राकेश शुक्ला(महासचिव महामना मालवीय मिशन संस्था), डॉ सुभाष सक्सेना(अध्यक्ष, श्रीचित्रगुप्त परिषद), डॉ रुचि चतुर्वेदी(अन्तरराष्ट्रीय कवि), विजेंद्र रायजादा(एडीओ, पंचायत विभाग) ने दीप प्रज्ज्वलित किया। कार्यक्रम संयोजक रामेंद्र प्रताप वर्मा और मोहित सक्सेना ने सभी का स्वागत किया। अतिथियों के कर कमलों द्वारा राष्ट्रीय हास्य कवि लटूरी लट्ठ का ममता देवी वर्मा प्रथम साहित्य रत्न सम्मान किया गया। इसके बाद मातृ दिवस के अवसर पर बही ममतामयी काव्य रसधारा। जिसमें जिन चरणों में आकर हमको स्वर्गधरा मिल जाती है… डॉ रुचि चतुर्वेदी, सुबह भाजपा में कटी शाम सपा के साथ, लेकिन जब पर्चा भरा चुनाव चिन्ह था हाथ… रमेश मुस्कान, जरा सा मुस्कुरा दो तुम तो मेरी शाम बन जाए, कदम रख दो तो मेरा आशियां भी धाम बन जाए…प्रीति त्रिपाठी, मां है जीती जागती स्वयं ममता की मूर्ति, मां से बड़ा कोई भगवान नहीं होता है…नीरज पाण्डेय (रायबरेली), जब हृदय में हुआ नेह का आगमन मिट गईं दूरियां, हट गया आवरण…मनोज मधुवन(सोरों), हम हदें पार करके देखेंगे, नींदें दुश्वार करके देखेंगे…हीरेंद्र 'हृदय',
बच्चों की खातिर बनते फौलाद हमारे बाबूजी,
अंत समय रह जाते बेऔलाद अभागे बाबूजी…
कवि मोहित सक्सेना, ताक में बैठे हैं बस्ती को जलाने वाले, लोग अब हैं ही कहां आग बुझाने वाले….
सतीश मधुप, सुध बुध भूल गए रिश्ते घर आंगन के ममता के द्वार को कपाट नहीं मिला है, इंच इंच टुकड़ों में खोज रही माई किन्तु, चूमने को लाल का ललाट नहीं मिला है…विष्णु उपाध्याय "विशु" (फिरोजाबाद), मेरे हाथ में सिर्फ इसलिए, कोई दुःख की रेखा नहीं है।
माता पिता के अलावा, मैने किसी भगवान को देखा नहीं है…लटूरी लट्ठ, श्रुति सिंह, संजय गुप्त, पदम् गौतम, राकेश निर्मल, चंद्रकांत त्रिपाठी, संजय वर्मा, सुरेंद्र बंसल, अभिषेक शर्मा, आरपी सक्सेना आदि ने काव्य पाठ कर उपस्थित सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन सतीश मधु ने किया।
: नौनिहालों ने लगाई मुद्रा ज्ञान की क्लास
Fri, May 24, 2024
आगरा। नन्हें− मुन्ने बच्चों की क्लास लगी, जिसमें शिक्षक भी बच्चे थे और छात्र भी नौनिहाल ही थे।
कमला नगर में राह आर्गेनाइजेशन द्वारा बच्चों की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में बच्चों ने मुद्रा ज्ञान की पाठशाला में रुपयों की पहचान करना सीखा। इसके साथ ही सृजनात्मकता करते हुए बच्चों ने ही एक दूसरे को बीड्स से ब्रेसलेट बनाना भी सिखाया। कार्यक्रम की संयोजिका संचिता और सिमरन थीं। कमिका, नेहा, सुगंध, तनु, निकिता, शुभम, श्वेता, गुंजन, हर्षिता, रीया, कशिश, नंदिनी, निताशा आदि उपस्थित रहीं।