: कुशवाह समाज की गौरवशाली परंपरा: लव-कुश शोभायात्रा 24 अगस्त को
Mon, Jul 28, 2025
आगरा। जय लव-कुश के उद्घोष के साथ कुशवाह समाज ने अपने सांस्कृतिक गौरव और एकता का परिचय देते हुए भगवान लव-कुश की भव्य शोभायात्रा के आमंत्रण पत्र का लोकार्पण समारोह उत्साहपूर्वक सम्पन्न किया।
कुशवाह समाज नगला पदी द्वारा आयोजित होने वाली भगवान लव-कुश की भव्य शोभायात्रा के आमंत्रण पत्र का विमोचन रविवार को ज्योतिबा फुले स्मारक, कुशवाह धर्मशाला, नगला पदी में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
समिति के सदस्यों द्वारा मंचासीन पदाधिकारियों एवं आगंतुक अतिथियों का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। समिति अध्यक्ष राजपाल सिंह कुशवाह ने जानकारी देते हुए बताया कि शोभायात्रा 24 अगस्त 2025 (रविवार) को न्यू आगरा स्थित कम्युनिटी हॉल से बैंड-बाजों के साथ प्रारंभ होगी, जिसमें समाज के हजारों लोग भाग लेंगे।
इस आयोजन में मुख्य रूप से हेमलता दिवाकर कुशवाह, महापौर, भगवान सिंह कुशवाहा, विधायक (खेरागढ़), गिरिराज सिंह कुशवाहा, पूर्व जिला अध्यक्ष, भाजपा और सुरेश कुशवाहा, पार्षद, वार्ड 72 उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह शोभायात्रा सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना एवं गौरवपूर्ण परंपराओं के उत्सव का प्रतीक बनेगी।
इस अवसर पर अजय सिंह कुशवाहा,राजेंद्र सिंह कुशवाह, अभिरेखराज कुशवाह देवेंद्र कुशवाहा, गौरव कुशवाहा, अमित कुशवाहा, निरंजन कुशवाहा, सुरेंद्र कुशवाहा, बबलू कुशवाहा, अनिल कुशवाहा, रिंकू कुशवाहा एवं मंत्री विमल कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।
: युवा शक्ति का संकल्प, श्री खाटू श्याम जी ग्लोबल सोसाइटी ने 100 पौधे रोपे
Mon, Jul 28, 2025
आगरा। समाजसेवा और धर्म के समर्पण भाव से प्रेरित श्रीखाटू श्याम जी ग्लोबल सोसाइटी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए सेक्टर 9, आवास विकास कॉलोनी में 100 पौधे रोपित किए। इस वृक्षारोपण अभियान में संस्था के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पौधों की देखरेख का संकल्प लिया। वर्ष 2022 में स्थापित इस संस्था की शुरुआत मात्र 12 युवाओं के साथ हुई थी, जो अब बढ़कर 40 समर्पित सदस्यों का परिवार बन चुकी है। संस्था प्रतिमाह विभिन्न सामाजिक और धार्मिक सेवा गतिविधियाँ जैसे गौ सेवा, भंडारा वितरण, वृद्धाश्रम सेवा, वृक्षारोपण अभियान, धार्मिक आयोजनों में सेवा आदि करती है।
अध्यक्ष कार्तिक अग्रवाल ने बताया कि खाटू श्याम जी ग्लोबल सोसाइटी का मूल उद्देश्य युवाओं को धर्म, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। हम चाहते हैं कि युवा केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी सोचें और कार्य करें। इस संगठन के माध्यम से हम हर महीने एक ऐसा कार्य करना चाहते हैं, जो किसी न किसी रूप में समाज और मानवता के लिए उपयोगी हो। उन्होंने आगे कहा कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। हम गौसेवा से लेकर वृक्षारोपण और वृद्धजनों की सेवा तक, हर कार्य में श्रद्धा और संवेदना से जुड़े हैं। पौधारोपण कार्यक्रम में फलदार और छायादार पौधे लगाए गए।
इस अवसर पर अभिषेक गर्ग, अनिरुद्ध अग्रवाल, अनमोल अग्रवाल, अर्जुन अग्रवाल, अर्जुन गोयल, दिव्यांशु गोयल, हार्दिक अग्रवाल, हर्ष मित्तल, ऋतिक बंसल, कनिष्क मित्तल, कार्तिक अग्रवाल, माधव मित्तल, मोहक अग्रवाल, मोहन दर्यानी, ओम गुप्ता, प्रद्युम्न गर्ग, प्रांजल मित्तल, प्रतीक मित्तल, प्रियांशु मित्तल, रचित अग्रवाल, ऋतिक गोयल, ऋषभ बंसल, रोहित अग्रवाल, सार्थक अग्रवाल, सत्यम अग्रवाल, शानू तिवारी, श्रेयांश बंसल, सिद्धांत जाड़िया, सनी सिंघल, उमंग अग्रवाल, विनि मित्तल, यश अग्रवाल, यश एच. अग्रवाल, यश नवीन, यश सिंघल आदि उपस्थित रहे।
: "भावनात्मक शिक्षा" पर अनोखी पहल, फील सील ओरिएंटेशन बना संवेदना की पाठशाला
Mon, Jul 28, 2025
फीलिंग माइंड्स संस्था द्वारा आयोजित “फील सील” ओरिएंटेशन का दूसरा दिन
भावनाओं की शिक्षा के लिए देश का इकलौता कार्यक्रम बना परिवर्तन का माध्यम
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों को दिया गया भावनात्मक शिक्षा का प्रशिक्षण
आगरा। देश की शिक्षा प्रणाली में एक नई सोच और संवेदनशील दिशा की शुरुआत करते हुए, फीलिंग माइंड्स संस्था द्वारा आयोजित फील सील ओरिएंटेशन कार्यक्रम का दूसरा दिन भावनात्मक शिक्षा की गहराई में उतरने का सशक्त प्रयास साबित हुआ। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों को न केवल प्रशिक्षित किया गया, बल्कि यह संदेश भी दिया गया कि आज के युग में बच्चों को गणित, विज्ञान और भाषा के साथ-साथ अपनी भावनाओं को पहचानना और व्यक्त करना भी सिखाना उतना ही जरूरी है। रविवार को सिकंदरा बोदला रोड स्थित विमल विहार में चल रहे फीलिंग माइंड्स संस्था के दो दिवसीय “फील सील” ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दूसरे दिन का आयोजन भी अत्यंत प्रेरक और प्रभावशाली रहा।
कार्यशाला के दूसरे दिन को संबोधित करते हुए फीलिंग माइंड्स संस्था की संस्थापक एवं अंतर्राष्ट्रीय मनोचिकित्सक डॉ. चीनू अग्रवाल ने कहा कि हमारे स्कूलों में हर विषय पढ़ाया जाता है, लेकिन बच्चों को यह नहीं सिखाया जाता कि भावनाएं क्या हैं, उन्हें कैसे और कब व्यक्त करना चाहिए। इसी के अभाव में आज बच्चे मानसिक रूप से अधिक असुरक्षित और अकेले होते जा रहे हैं। उन्होंने एनसीईआरटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर साल करीब 1.25 लाख आत्महत्याएं होती हैं, जिनमें लगभग 13,000 बच्चे शामिल होते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि बच्चों में खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।
जब बच्चे परेशानी में होते हैं, तो उन्हें भावनात्मक सहारा देने के बजाय, उन्हें मानसिक रोगी समझकर अस्पताल ले जाया जाता है। यह विडंबना है कि 140 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में मात्र 10,000 पंजीकृत मनोचिकित्सक हैं।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों को व्यावहारिक रूप से अपनी भावनाएं व्यक्त करने की शिक्षा देना बेहद आवश्यक हो गया है। बच्चों से संवाद का समय न दे पाना और संयुक्त परिवारों में दादा-दादी की कमी भी बच्चों में अकेलेपन को बढ़ावा दे रही है। इसी के समाधानस्वरूप कार्यक्रम में “ग्रैंड पेरेंटिंग” पर आधारित विशेष सेशन की भी योजना बनाई गई है। अगले 6 माह तक प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक पूरे देश में ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। दूसरे दिन की कार्यशाला में भावनाएं कैसे व्यक्त करें, इस पर आधारित कई इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रमुख रूप से एक्टिविटी आधारित लर्निंग, फिल्म एवं वार्तालाप विश्लेषण (मूवी वार्ता), जिज्ञासा आधारित खुली चर्चा सत्र शामिल रहे।
डॉ रविंद्र अग्रवाल ने बताया कि यह कार्यक्रम देश का इकलौता संगठित भावनात्मक शिक्षा पर केंद्रित प्रयास है, जो न केवल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करता है, बल्कि उनके संपूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहा है।
कार्यक्रम में शैलेश जिंदल ने “फील सील (FEEL-SEAL)” का शाब्दिक और व्यावहारिक अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया कि यह केवल एक शैक्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सोशल, इमोशनल और एकेडमिक लर्निंग का एक समन्वित मॉडल है, जो भावनाओं को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाता है।
इस अवसर पर हेमा फाउंडेशन द्वारा संचालित हेम सीड्स (सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास) कार्यक्रम की भी विस्तृत जानकारी दी गई, जो देशभर के स्कूलों में लागू किया जा रहा है।
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने इस अनूठे प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि यह पहल शिक्षा की पारंपरिक सोच को बदलने की दिशा में एक क्रांति है, जो बच्चों को सिर्फ ज्ञानी नहीं, बल्कि संवेदनशील, संतुलित और खुशहाल नागरिक बनाने की ओर बढ़ रही है।