: हाथियों की सेवा कर रहे भारत के पहले हाथी अस्पताल के पांच साल पूरे
Thu, Nov 16, 2023
मथुरा. 16 नवंबर 2023। भारत का पहला हाथी अस्पताल, जो मथुरा में स्थित है, बचाए गए हाथियों के लिए उन्नत चिकित्सा देखभाल प्रदान कर रहा है। नवंबर 2018 में स्थापित, यह अस्पताल हाथियों की देखभाल और संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर काम कर रहा है।
पिछले आधे दशक में, मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस के हाथी अस्पताल परिसर ने अपनी चिकित्सा सुविधाओं को लगातार उन्नत किया है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि केंद्र में रह रहे हाथियों को विश्व स्तरीय देखभाल प्रदान की जा सके।
अस्पताल में अत्याधुनिक उपकरण मौजूद हैं, जिनमें डिजिटल एक्स-रे मशीन, डेंटल एक्स-रे मशीन, फोटोबायोमॉड्यूलेशन थेरेपी यूनिट, अल्ट्रासोनोग्राफी उपकरण शामिल है। दर्द से राहत प्रदान करने के लिए एक हाइड्रोथेरेपी पूल और हाथियों की गितिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए सीसीटीवी के साथ एक ऑब्जरवेशन डेक भी शामिल है। इन वर्षों में, हाथी अस्पताल ने वृद्ध हाथियों की देखभाल और उनसे जुड़े उपचार में विशेषज्ञता हासिल की है। अस्पताल में परीक्षण के लिए हेमेटोलॉजी और पैथोलॉजी लैब भी शामिल है।
पांच वर्षों में, हाथी अस्पताल ने 20 से अधिक हाथियों को देखभाल प्रदान की है। उनमें से, सबसे हाल में रामा, एक मखना हाथी है, जिसका उपयोग उसके मालिकों द्वारा भीख मांगने और शादी के जुलूसों में किया जाता था। वन विभाग के आदेश पर उपचार के लिए लाए गए, रामा की एक्स-रे में रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर का पता चला, जिसका वर्तमान में अस्पताल में इलाज चल रहा है। रामा के अलावा, हाथी अस्पताल ने अन्य जरूरतमंद हाथियों की भी सहायता की है, जिनमें भारत की सबसे दुर्बल हथिनी लक्ष्मी जैसे गंभीर रूप से कुपोषित हाथी भी शामिल है। हाथियों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए, अस्पताल में दुनिया भर के पशु चिकित्सकों, देखभाल करने वालों और जीवविज्ञानियों के लिए एक ऑब्जरवेशन डेक भी है, जहां वे हाथियों की पशु चिकित्सा देखभाल का अवलोकन कर सकते हैं।
वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी ने कहा, “अस्पताल को घायल, बीमार या वृद्ध हाथियों के इलाज के लिए डिज़ाइन किया गया है जहां गंभीर देखभाल की आवश्यकता वाले हाथियों को उठाने और उनके इलाज के लिए एक मेडिकल होइस्ट भी है। इस सुविधा में डिजिटल वजन मापने की मशीन के साथ-साथ लंबी चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए एक समर्पित डॉक्टरों की टीम शामिल है।
डॉ. एस. इलियाराजा, उप-निदेशक-पशु चिकित्सा सेवाएं, वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस ने कहा, “हाथी अस्पताल ने रामा के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रामा का वर्तमान में शरीर पर कई सेप्टिक घावों का इलाज चल रहा हैं, और हमें उम्मीद है की हाइड्रोथेरेपी का उपयोग उसके दर्द को कम करने में सहायक रहेगा।
वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस के सह-संस्थापक और सी.ई.ओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “कैप्टिव हाथियों को अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, और पुनर्वास के बाद भी, वे अपने दीर्घकालिक कल्याण के लिए मानव देखभाल पर निर्भर रहते हैं। एलीफेंट हॉस्पिटल इस महत्वपूर्ण देखभाल को सुविधाजनक बनाने और इन हाथियों के उज्जवल भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
: आगरा जिले की 20 प्रतिशत आबादी में तलाशे जाएंगे टीबी के रोगी
Thu, Nov 16, 2023
घनी आबादी में टीबी के रोगियों की तलाश करेंगे स्वास्थ्य कर्मी
23 नवंबर से पांच दिसंबर तक चलाया जाएगा अभियान
आगरा,16 नवम्बर 2023। वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक बार फिर “एक्टिव केस फाइंडिंग” अभियान (सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान) चलाया जाएगा, जिसमें टीबी के रोगियों की तलाश की जाएगी। जिले की 20 प्रतिशत आबादी में टीबी के मरीज तलाश करने के लिए 23 नवंबर से पांच दिसंबर के बीच अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने उसके लिए टीम गठित कर दीं हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में टीबी के करीब दस हजार रोगी निक्षय पोर्टल पर दर्ज हैं, जो उपचाराधीन हैं। फिर भी काफी मरीज अब भी जागरूकता के अभाव में स्वास्थ्य विभाग से संपर्क नहीं करते हैं और अपनी बीमारी को छिपाने का प्रयास करते हैं। ऐसे रोगियों को तलाश करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाने का खाका तैयार किया। अनाथालय, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसा, नवोदय विद्यालय, कारागार, चिन्हित समूहों, ईंट भट्ठे, साप्ताहिक बाजारों आदि में संभावित क्षय रोगियों की तलाश स्वास्थ्य कर्मी करेंगे। अभियान में जिले की जनसंख्या की 20 प्रतिशत हाई रिस्क वाली आबादी में मरीजों को तलाश कर उनका उपचार किया जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि क्षय उन्मूलन के लिए काफी लंबे समय से काम किया जा रहा। शिक्षण संस्थाओं, सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक किया जाता है। धर्म गुरुओं से लोगों को टीबी होने पर दवा खाने के लिए अपील कराई जाती है। सबसे बड़ी समस्या भ्रांतियां के चलते जागरूकता का अभाव है। अब भी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं जो टीबी के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं और दूसरों को भी संक्रमित कर देते हैं। हालांकि धीरे-धीरे लोगों के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा है, अब वह जांच और उपचार के लिए आगे आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एसीएफ अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद में 372 टीम गठित की गईं हैं। इनका सहयोगात्मक पर्यवेक्षण 73 सुपरवाइजर करेंगे। टीम घर-घर जाकर लक्षणों के आधार पर टीबी मरीजों की पहचान करेंगी। इसके बाद मरीजों की जांच की जाएगी। जांच में टीबी की पुष्टि होने के बाद मरीज का उपचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि लगातार दो हफ्तों से ज्यादा खांसी, खांसी के साथ खून का आना, छाती में दर्द और सांस का फूलना, वजन का कम होना और ज्यादा थकान महसूस करना, शाम को बुखार आना और ठंड लगना जैसे लक्षण हैं तो टीम को जानकारी दें और अपनी जांच अवश्य करवाएं।
ब्लाक जैतपुर कला के पूराचतुर्भुज गांव के निवासी 15 वर्षीय अशोक (बदला हुआ नाम) बताते हैं “जब मैं दिल्ली में रहता था उस समय मुझे रोज रात को बुखार आता था। धीरे-धीरे बुखार तेज होने लगा और मुझे कमजोरी महसूस होने लगी, वजन भी काम हुआ, लगभग 20 दिन तक यह स्थिति रहने के बाद मैंने अपने माता-पिता को यह बात बताई तो उन्होंने मुझे तुरंत घर वापस आने के लिए कहा क्योंकि पहले मेरी मां को टीबी हुई थी और इसी तरह के लक्षण नजर आए थे।
अशोक बताते हैं कि यह बात मार्च 2022 की है। जब मैं अपने घर वापस आया उस दौरान टीबी की टीम लक्षणों के आधार पर मरीजों की खोज कर रही थी। टीम के सदस्य मेरे घर आए और मेरी जांच करने के लिए बलगम का सैंपल लिया, उसके बाद सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर सौरभ भदौरिया मेरे घर आए और उन्होंने मेरे परिवार को यह जानकारी दी कि मुझे फेफड़ों से संबंधित टीबी हो गई है, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। छह महीने के उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे, लेकिन दवा का सेवन नियमित करना होगा, एक भी दिन दवा नहीं छोड़नी है, साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन करना है। अशोक बताते हैं “मैंने उपचार के दौरान नियमित रूप से दवा का सेवन किया और डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। मुंह पर मास्क लगा लगा कर रहा, जिससे किसी अन्य को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। छह महीने के उपरांत सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर द्वारा मेरी दोबारा जांच कराएगी, जांच के बाद पता चला मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और उपचार के दौरान पौष्टिक आहार के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत मेरे खाते में हर महीने 500 रुपए की धनराशि भी प्रदान की गई l अब मैं नियमित अपने पिता के साथ खेती-बाड़ी के काम में सहयोग करता हूं मुझे किसी भी प्रकार की कोई भी दिक्कत नहीं है l”
एक नजर पिछले एक्टिव केस
फाइंडिंग अभियानों के आंकड़ों पर
वर्ष 2021 में 3246 संभावित क्षय रोगियों की जांच की गई, जिसमें 222 नए टीबी मरीज मिले ।
वर्ष 2022 में 2946 संभावित क्षय रोगियों की जांच की गई, जिसमें 238 नए टीबी मरीज मिले ।
वर्ष 2023 में 3598 संभावित क्षय रोगियों की जांच की गई, जिसमें 325 नए टीबी मरीज मिले ।
अभियान के दौरान मिले सभी टीबी मरीजों का उपचार पूर्ण हो गया है और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
: 19 नवम्बर को वॉकॉथन में डायबिटीज जागरूकता के लिए दौड़ेंगे शहरवासी
Thu, Nov 16, 2023
आईएमए द्वारा 14 से 19 नवम्बर तक डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किये जा रहे विभिन्न कार्यक्रम
19 नवम्बर को शहीद स्मारक से एसएन अस्पताल की इमरजेंसी तक होगा वॉकाथन का आयोजन, विद्यार्थियों, डॉक्टर्स सहित शहरवासी भी लेंगे भाग
आगरा। 19 नवम्बर को आगरा मैं शहरवासी डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए दौड़ लगाएंगे। आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) द्वारा विश्व मधुमेह दिवस (14 नवम्बर) से 19 नवम्बर तक डायबिटीज जागरूकता अभियान का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत 19 नवम्बर को संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक से एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी तक वॉकॉथन का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें डॉक्टरों, विद्यार्थियों सहित शहर के हजारों लोग लोगों में डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भाग लेंगे।
तोता का ताल स्थित आईएमए भवन पर अभियान के पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में आईएमए अध्यक्ष मुकेश गोयल, सचिव डॉ. पंकज नगायच ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 नवम्बर से प्रारम्भ हुए जागरूकता अभियान में क्लीनिक, हॉस्पीटलों में निशुल्क ब्लड शुगर चेकिंग व परामर्श दिया जा रहा है। भारत में लगभग ११.५ प्रतिशत जनता डायबिटीज से पीड़ित है। पैर मैं इन्फेक्शन की वजह से पैर काटने के मामले लगभग दूसरे स्थान पर डायबिटीज की वजह से हैं। किडनी फेल सबसे ज्यादा इस कारण से हैं। अंधापन मोतियाबिंद के बाद सबसे ज्यादा इसी बीमारी की वजह से है। लोगों को डायबिटीज के लक्षण, कारण व बचाव के बारे में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जा रही है। आईएमए के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा शहर के विभिन्न स्कूलों में भी व्याख्यान देकर जागरूकता प्रदान की जा रही है। यह अभियान आईएमए द्वारा देश भर में चलाया जा रहा है। सभी कैम्पों का डाटा एकत्र कर भारत में डायबिटीज की स्थिति पर मंथन व रोकथाम के उपायों पर विचार विमर्श किया जाएगा। 19 नवम्बर को शहीद स्मारक पर प्रातः 7 बजे जागरूकता गोष्ठी में आमजन को डायबिटीज के बारे में वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा जानकारी प्रदान की जाएगी। इसके उपरान्त वॉकॉथन का आयोजन होगा, जिसका समापन एसएन मेडिकल कालेज की ईमरजेंसी पर होगा।
आईएमए के पदाधिकारियों ने वॉकॉथन में भाग लेने के लिए सभी शहरवासियों को आमंत्रित किया, जिससे लोगों में डायबिटीज के प्रति जानकारी बढ़े और भारत में बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाया जा सके। इस अवसर पर मुख्य रूप से डा. अनूप दीक्षित अध्यक्ष निर्वाचित, डा. योगेश सिंघल कोषाध्यक्ष, डा. अरुण जैन, डा अनुपम गुप्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ, डा मनोज अग्रवाल, डा अनुपम गुप्ता (अस्थि रोग विशेषज्ञ) आदि उपस्थित थे।
ग्रीन टाइम और स्क्रीन टाइम में संतुलन बनाए रखें
आगरा। विशेषज्ञों ने कहा कि डायबिटीज से दूर रहना है तो अपनी दिनचर्या में ग्रीन टाइम (अभिभावक, बच्चों, घर परिवार व दोस्तों के साथ बिताने वाला टाइम) और स्क्रीन टाइम (सोशल मीडिया पर बिताने वाला टाइम) में संतुलन बनाएं रखें। ग्रीन टाइम को कम करके चुराए नहीं। नींद पूरी लें, तनाव और फास्टफूड से दूर रहें।