: एसएन में टीबी मरीजों के लिए शुरू हुआ यूपी का पहला डेडिकेटेड आईसीयू
Sat, Feb 15, 2025
गंभीर टीबी मरीजों की डेडिकेटेड आईसीयू में बचाई जा सकेगी जान
चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की महानिदेशक किंजल सिंह (आईएएस) ने किया उद्धाटन
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में शुक्रवार को महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश किंजल सिंह (आईएएस) ने यूपी की पहली समर्पित ड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकुलोसिस रेस्पिरेटरी इंटेंसिव केयर यूनिट(आईसीयू) का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए, 7 दिसंबर 2024 को टीबी उन्मूलन पर 100-दिवसीय गहन अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान के तीन महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। पहला- सामुदायिक जागरूकता और स्क्रीनिंग और परीक्षण पर गहन आईईसी अभियान के माध्यम से सक्रिय क्षय रोगियों का पता लगाना, दूसरा- पोषण के साथ साथ डिफ़्रेंसिएटिव टीबी केयर को लागू करके टीबी से पीड़ित लोगों में मृत्यु को कम करना और तीसरा- घरेलू संपर्कों, पीएलएचआईवी और कमजोर आबादी को टीबी निवारक उपचार प्रदान करके समुदाय में नए टीबी मामलों की घटना को रोकना। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम टीबी इन्सिडेन्स, टीबी से संबंधित मौतों और सोसाइटी में नए टीबी के रोगियों के बनने की घटना को कम करने के लिए अपनी रणनीतियों में तेजी लाकर इस अभियान को एक बड़ी सफलता बनाने के लिए महत्वपूर्ण रूप से भाग लें। यह डेडिकेटेड आईसीयू टीबी के रोगियों में मृत्युदर कम करने में अत्यंत सहायक होगा।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डा प्रशांत गुप्ता ने बताया कि ड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकुलोसिस के गंभीर रोगियों के लिए प्रदेश में किसी भी मेडिकल कॉलेज में अभी तक कोई भी आईसीयू नहीं था। एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा में स्थापित डीआर टीबी वार्ड अब तक आठ हज़ार से ज़्यादा ड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकुलोसिस रोगियों का उपचार कर चुका है। इस आईसीयू के माध्यम से ऐसे रोगियों के उपचार में नई दिशा मिलेगी।
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष तथा स्टेट टास्क फ़ोर्स फॉर टीबी एलीमिनेशन, उत्तर प्रदेश के चेयरमैन प्रोफेसर गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि आज टीबी का उपचार उपलब्ध होने के बावजूद भी लगभग 12. 5 लाख मौत विश्व में टीबी के कारण होती है जिनमे से भारत में ही लगभग 26ः मृत्यु टीबी से होती है।इन मौतों के विश्लेषण से पता चलता है कि अधिकांश मौत ड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकुलोसिस ( एमडीआर, प्रीएक्सडीआर और एक्सडीआर) में होती है। यद्यपि केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रयासों से आज बहुत प्रभावी उपचार इन रोगियों को निःशुल्क उपलब्ध है फिर भी इन ड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकुलोसिस ( एमडीआर, प्रीएक्सडीआर और एक्सडीआर) रोगियों में उपचार से केवल 65-7वः तक ही सफलता मिलती है। अनेक रोगियो को समर्पित ड्रग रेजिस्टेंस ट्यूबरकुलोसिस रेस्पिरेटरी इंटेंसिव केयर यूनिट की आवश्यकता होती है जिससे जीवन बचाया जा सके। डा सिंह ने बताया कि एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा का पुनर्निर्मित रेस्पिरेटरी मेडिसिन वार्ड संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण (आईपीसी) उपायों के हिस्से के रूप में हेपा(एच.ई.पी.ए.) फिल्टर को शामिल करने वाला राज्य का पहला रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग है।
: पुष्टाहार वितरण में पारदर्शिता लाने को आयोजित हुई फेस ऑथेंटिकेशन कार्यशाला
Thu, Feb 13, 2025
लाभार्थियों को पुष्टाहार फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से प्राप्त कराने की तैयारी
मंडल के जिला कार्यकम अधिकारियों, बाल विकास परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं जिला समन्वयकों ने प्राप्त किया प्रशिक्षण
जल्द ही मास्टर ट्रेनर के माध्यम से जनपद की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण
आगरा। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के जय प्रकाश सभागार में मण्डलीय कार्याशाला का आयोजन किया गया कार्यशाला में आगरा मण्डल के समस्त जनपदों आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद एवं मथुरा के जिला कार्यकम अधिकारियों, बाल विकास परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं जिला समन्वयकों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश कुमार मौर्य द्वारा बताया गया कि पोषण ट्रेकर पर फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्र के पंजीकृत वास्तविक लाभार्थियों में पुष्टाहार की पहुंच सुगम होगी। उन्होंने कहा कि मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) प्रतिभा सिंह के निर्देशन में पोषण ट्रेकर एप पर फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से कार्य करने का एक दिवसीय प्रशिक्षण निदेशालय बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार उत्तर प्रदेश लखनऊ से नामित प्रशिक्षक विवेक कुमार पाण्डेय द्वारा दिया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश मौर्य ने बताया कि शीघ्र ही इन मास्टर ट्रेनर के माध्यम से पूरे जनपद की आगनवाड़ी कार्यकत्री को इस नए ऐप का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा जिससे लाभार्थियों का सत्यापन आसानी से होगा एवं पोषाहार वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी।
फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से पुष्टाहार का वितरण कराये जाने का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों के लाभार्थियों गर्भवती, धात्री 07 माह से 03 वर्ष एवं 03 वर्ष से 06 वर्ष के बच्चों में पुष्टाहार वितरण को और पारदर्शी बताया जायेगा। कार्यशाला में आगरा मण्डल के समस्त जनपदों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों, बाल विकास परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं जिला समन्वयकों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया गया।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु
पुष्टाहार वितरण में पारदर्शिता: फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से पुष्टाहार वितरण को और पारदर्शी बनाया जाएगा।
लाभार्थियों की पहचान: पोषण ट्रेकर एप पर फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्र के पंजीकृत वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जाएगी।
प्रशिक्षण: कार्यशाला में आगरा मण्डल के समस्त जनपदों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों, बाल विकास परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं जिला समन्वयकों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया गया।
: आज मनाया जाएगा कृमि मुक्त दिवस, खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल की दवा
Sun, Feb 9, 2025
एक से 19 वर्ष तक के 23.18 लाख बच्चों व किशोरों को खिलाई जाएगी पेट के कीड़े निकालने की दवा
14 फरवरी को चलेगा मॉप अप राउंड, जिसमें दवा खाने से छूटे हुए बच्चों को किया जाएगा आच्छादित
आगरा I जनपद में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अर्न्तगत एक से 19 वर्ष तक बच्चों व किशोर-किशोरियों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए कृमि मुक्त अभियान का आयोजन वर्ष में दो बार किया जाता है। इस वर्ष भी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 10 फरवरी को जनपद के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया जाएगा। इसके तहत जिले के निजी एवं सरकारी विद्यालयों और आंगनवाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को अल्बेंडाज़ोल की गोली खिलाई जाएगी। जो बच्चे बीमारी या अन्य कारणों से छूट जाएंगे उन्हें 14 फरवरी को मॉप-अप राउंड के दौरान दवा खिलाए जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरूण श्रीवास्तव ने बताया कि एक से 19 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों और किशोरों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए प्रदेश में वर्ष में दो बार अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष भी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (10 फरवरी ) के अवसर पर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान चलाकर कृमि मुक्ति के लिए 23.18 लाख बच्चों व किशोरों को अल्बेंडाज़ोल की गोली खिलाई जाएगी। दवा खाली पेट नहीं खानी है। दवा खाने के बाद उल्टी दस्त या मिचलाने की समस्या हो तो घबराने की बात नहीं है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि कृमि संक्रमण कुपोषण का एक बहुत बड़ा कारण है। पेट के कीड़े संक्रमित व्यक्ति के शरीर से पोषण लेते है , इसके कारण अच्छा पौष्टिक भोजन देने के बाद भी बच्चा कुपोषित रहता है। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी के अधिकारियों से अभियान में सहयोग करने व जनपदवासियों से बच्चों को अभियान के दौरान दवा खिलाने की अपील की है, कृमि मुक्ति अभियान बच्चों को स्वस्थ रखने की दिशा में एक कदम हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए सभी का सहयोग महत्वपूर्ण है।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया समन्वयक डॉ. विजय सिंह ने बताया कि इस अभियान को आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्कूलों के सहयोग से चलाया जायेगा। 01 से 05 वर्ष तक के सभी पंजीकृत बच्चों को, 6 से 19 वर्ष तक के स्कूल न जाने वाले बच्चों, ईट भट्टों पर कार्य करने वाले और घुमन्तू लाभार्थियों को आंगनवाड़ी केन्द्रों पर आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता के माध्यम से दवा खिलाई जाएगी। इसके अलावा सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों, मदरसों में शिक्षकों के माध्यम से और किशोर जुबेनाइल होम में प्रभारी अधीक्षक के माध्यम से 06 से 19 वर्ष तक के बच्चों को दवा खिलाई जाएगी।
डीसीपीएम ने बताया कि अभियान के बाद 14 फरवरी को जनपद में मॉप अप राउंड चलाया जाएगा। इसमें स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर कृमि मुक्ति दिवस के दिन जो लाभार्थी अनुपस्थित रहने या किन्हीं अन्य कारणों से दवा खाने से वंचित रह जायेंगे। उनकी सूची तैयार कर मॉप अप राउंड में दवा खिलाई जाएगी।
यह हैं कृमि मुक्ति के फायदे :
रोग प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि
स्वास्थ्य और पोषण में सुधार
एनीमिया नियंत्रण
समुदाय में कृमि व्यापकता में कमी
सीखने की क्षमता और कक्षा में उपस्थिति में सुधा