: उदयनिधि और स्वामी प्रसाद मौर्य को इन महाराज ने कह दिया 'मूर्ख'
Fri, Sep 29, 2023
आगरा। हाथों में दीपक और आंखों में अश्रुधारा। 14 वर्ष बाद वनवास से लौटे सियाराम के चरणों में हर भक्त नतमस्तक था। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वशिष्ठ मुनि के रूप में मौजूद ददरौआ धाम के महामण्डलेश्वर स्वामी रामदास महाराज ने श्रीराम के स्वरूप के राज तिलक किया तो पुष्पों की वर्षा से कथा स्थल भक्ति की सुगन्ध से महक उठा। जय सीयाराम के साथ बजरंग बली के उद्घोष से पण्डाल गूंज उठा। कथा वाचक स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने सभी भक्तों को श्रीराम के राजतिलक की बधाईयां देते हुए घर-घर में राम राज्य लाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि ईर्ष्या और द्वेष को त्यागों प्रेम से रहना सीखो तो घर-घर में राम राज्य जाएगा।
उदयनिधि और स्वामी प्रसाद मौर्य को कहा मूर्ख
स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने मंच से स्पष्ट शब्दों में मूर्ख स्वामी प्रसाद मौर्य व उदयनिधि उच्चारण के साथ कहा कि जिसने सनातन को छेड़ा उसका अस्तित्व खत्म हो गया। श्रीराम चरित मानस ही वह ग्रंथ है जो जीवन में संतुलन और रिश्तों को निभाने की सीख देता है। ग्रंथ को पढ़े बिना सिर्फ विरोध करने के लिए कुछ भी अनाप शनाप बोलना मूर्खता की निशानी है। कहा काम, क्रोध, मोह, लोभ, मद, मत्स यह छह ऐसे राक्षस हैं, जिन्हें मारने के लिए किसी शस्त्र की नहीं बल्कि शास्त्र की जरूरत पड़ती है।
श्री कामतानाथ सेवा समिति द्वारा चित्रकूट धाम (कोठी मीना बाजार) में आयोजित श्रीराम कथा में कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने श्रीराम के राजतिलक के साथ कथा को विश्राम दिया। श्रीराम के राजतिलक के बाद उर्मिला, माण्डवी व सुकीर्ति को श्रीराम द्वारा अख्म्ड सौभाग्यवती का आर्शीवाद देने का प्रसंग सुनाते हुए रामस्वरूपाचार्य महाराज की भी आंखें भर आयी। कहा कि भरत और माता कैकयी के आने के उपरान्त ही श्रीराम ने राजतिलक की औपचारिकताओं को स्वीकार किया।
संवैधानिक रुप से राम राज्य कब आएगा यह तो भविष्य बताएगा लेकिन घर-घर में राम राज्य के लिये सरकार ने किसी को नहीं रोका है। आज हर घर में भाईयों में सम्पत्ति का विवाद है। भक्ति से जीवन में भगवान और सम्पत्ति से व्यवधान मिलते हैं। भरत श्रीराम के वन जाने पर अयोध्या से 14 किमी दूर नंदीग्राम में रहे। कभी श्रंगार नहीं किया। अयोध्या के पकवान और सम्पत्ति सब का त्याग कर दिया। श्रीराम और भरत जैसे युवा, सीता, उर्मिला, माण्डवी जैसी बहुएं और माताएं कौशल्या बन जाए तो अवश्य घर-घर में राम राज्य होगा।
जीवन में भय नहीं भाव पैदा करिए…
स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने अरण्य काण्ड में जटायू और सुग्रीव का उदाहरम देते हुए कहा कि मन में भाव को पैदा करें, भय को नहीं। सुग्रीव भय के कारण जो काम नहीं कर पाया वह भाव से परिपूर्ण होने के कारण जटायू ने कर दिया। सीता हरण के दौरान उसने अपनी चोंच के प्रहार से रावण को मूर्छित कर दिया था। मन से भय को भगाना है तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा को पाठ करें। प्रतिदिन पांच मिनट की कीमत में भय को दूर करने का इससे बेहतर उपाय नहीं मिलेगा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से साध्वी अमृतानंदमयी मानस समीक्षा प्रयागराज जयप्रकाश त्यागी, हकीम सिंह त्यागी, अध्यक्ष जय भोले, लवकेश चौधरी, पिंकी त्यागी, श्रीकांत त्यागी, प्रीति उपाध्याय, अलौकिक उपाध्याय, शैलेंद्र उपाध्याय, वात्सल उपाध्याय, सौरव शर्मा, अमित, सागर राणा, राकेश मंगल, दीनदयाल मित्तल, रामवीर चाहर, विमल आदि उपस्थित रहे।
: गणपति विसर्जन को जा रहे श्रद्धालुओं को पुलिस ने रोका तो काटा हंगामा
Fri, Sep 29, 2023
Agra. गणपति विसर्जन के दौरान जा रहे श्रद्धालुओं को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस द्वारा रोके जाने से लोगों ने जमकर हंगामा काटा और वहीं धरने पर बैठ गए। मौके पर पहुंचे पुलिस के आला अधिकारियों ने उन्हें समझाया तब जाकर भक्तगण माने और फिर विघ्नहर्ता को विसर्जन के लिए ले गए।
पूरा मामला ताजमहल के पूर्वी गेट से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि एक गाड़ी पर रखकर विघ्नहर्ता को भक्तगण विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। ताजमहल के पूर्वी गेट पर लगे बैरियर में हर किसी गाड़ी को प्रवेश नहीं दिया जाता जिसके चलते जिस गाड़ी पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखी हुई थी उसे रोक दिया गया। विसर्जन के लिए ले जा रहे भगवान गणेश की प्रतिमा वाली गाड़ी को रोकर जाने से लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने जमकर हंगामा काटना शुरु कर दिया। महिला श्रद्धालु तो बैरियर पर ही धरने पर बैठ गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को समझाया बुझाया। नियमों का हवाला दिया तब जाकर महिलाएं और श्रद्धालु माने।
भगवान गणेश की प्रतिमा को गाड़ी से उतार कर ठेल पर रखा गया और फिर भक्तगण उन्हें दशहरा घट विसर्जन के लिए ले गए। ताजमहल की पूर्वी गेट के बैरियर पर यह हंगामा लगभग आधे घंटे तक चलता रहा। इस दौरान पर्यटकों को भी खास मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
: नारद देखा बिकल जयन्ता, लगि दया कोमल चित संता…हरि रूठे तो ठोर है, संत रूठे नहीं ठोर…
Wed, Sep 27, 2023
आगरा। जीवन में संत और गुरु को की नाराज मत करो। जीवन में सफलता और सही मार्ग के लिए गुरु का मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। भगवन प्राप्ति के लिए भक्ति के साथ संत का आर्शीवाद भी बहुत जरूरी है। ईश्वर के पास जाकर बोलने का धार संत ही देते हैं। श्रीराम के परम भक्त विभीषण को श्रीहरि के दर्शन संत हनुमान से मिलने के बाद ही हुए। 14 माह तक मैया सीता लंका में रही, परन्तु बजरंग बली से मिले बिना लंका में रहते हुए भी नके दर्शन नहीं कर पाए। अरण्य काण्ड में जयन्त द्वारा कौवा बनकर मैया सीता के पैर में चोंच मारने के प्रसंग के साथ आज कोठी मीना बाजार में आयोजित श्रीराम कथा में स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने संत और गुरु कृपा का वर्णन किया।
श्री कामतानाथ सेवा समिति द्वारा चित्रकूट धाम (कोठी मीना बाजार) में आयोजित श्रीराम कथा में आज श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने ब्रह्मदाम सिवपुर सब लोका, फिरा श्रमित व्याकुल भय सोका… दोहे के माध्यम से बताया कि इंद्र का पुत्र जयन्त श्रीराम के वाण से बचने के लिए ब्रह्मलोक और शिवपुरी सब लोक घूमा। परन्तु समाधान संत नारद ने किया। नारद देखा बिकल जयन्ता, लगि दया कोमल चित संता… का वर्णन करते हे कहा कि नारद जी ने जयन्त को चित्रकूट में श्रीराम की शरण में भेजा जान बचाने के लिए। तभी जयन्ती के प्राण बचे। एक बार को भगवान रूठ जाएं तो ठोर है, परन्तु संत और गुरु के रूठने पर कहीं ठोर नहीं। कथा से पूर्व यज्ञाचार्य राहुल रावत के मार्गदर्शन में बनारस से आए 21 ब्राह्मणों द्वारा वैदिक विधि से यज्ञ सम्पन्न कराया।
श्रद्धालुओं को 1500 तुलसी के पौधे वितरित किए
आज कथा में देवेंद्र कुमार त्यागी बास बाला व रामबाग निवासी डॉ. रविकांत त्यागी द्वारा श्रद्धालुओं को 1551 तुलसी के पौधे वितरित किए गए। जिससे महाराज का घर-घर तुलसी दल और घर-घर रामायण का संकल्प में मदद हो सके। क्रीड़ा भारती संस्था द्वारा प्रसाद वितरण में सहयोग किया जा रहा है।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष जय भोले जी, धर्मेंद्र त्यागी, संतोष शर्मा जी, श्रीकांत त्यागी, अतुल भादोतिया, आचार्य अनुराग शास्त्री, आचार्य अनूप शास्त्री, शिवकुमार मुदगल, अमरकांत त्यागी, प्रमेंद्र कुमार शर्मा, मोहित वर्मा, महावीर त्यागी, राहुल परासर, दौलतराम चौधरी, शिवसेवक शर्मा, कृष्णसेवक, हरिसेवक आदि उपस्थित थे।