: धनतेरस - जानें क्या कहते हैं ज्योतिषी ?
Fri, Nov 10, 2023
इस वर्ष धनतेरस का त्यौहार 10 नवंबर को मनाया जाएगा । धनतेरस एवं श्री धन्वंतरि जयंती कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाई जाती है । 10 नवंबर को 12:35 तक द्वादशी रहेगी । तत्पश्चात् त्रयोदशी रहेगी । इस दिन हस्त नक्षत्र , शुक्रवार का दिन इसको विशेष बना रहा है । धन त्रयोदशी प्रदोष व्यापिनी कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाई जाती है । जिसमें सायं काल घर के मुख्य द्वार पर यमराज के लिए दक्षिण मुख कड़वे तेल का दीपक जलाया जाता है । इसके पीछे मान्यता है कि मनुष्य अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाता है । इसे प्रदोष में किया जाता है । धर्म सिंधु ग्रंथ के अनुसार प्रदोष में व्यापिनी त्रयोदशी को ग्राहा माना गया है। इस दिन श्री गणेश , लक्ष्मी जी, झाड़ू ,मिट्टी के दीपक आदि खरीदने का विशेष रूप से महत्व है । झाड़ू इस दिन अवश्य खरीदनी चाहिए। झाड़ू माता लक्ष्मी का रूप मानी गई है । जिस घर में साफ सफाई रहती है उस घर में माता लक्ष्मी का वास होता है । झाड़ू द्वारा ही घर में साफ सफाई की जाती है और साफ सफाई करने से एवं स्वच्छता रहने से हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है । इसीलिए झाड़ू धन प्रदायक और स्वास्थ्य प्रदायक भी है । इसी कारण इसे इसको पूजनीय माना गया है।
घर मकान, वाहन, सोना ,चांदी आदि स्थिर एवं चलायमान रहने वाली वस्तुओं को प्रातः 9:28 से 10:42 तक खरीदने का अति शुभ समय ।
भूमि ,भवन आदि वस्तुओं को खरीदने हेतु 12:03 से 1:16 तक शुभ समय है ।
स्थायित्व वाली वस्तुओं को 1:16 मिनट से 2:46 मिनट तक से भूमि ,भवन, वाहन, सोना, चांदी , श्री गणेश ,लक्ष्मी आदि खरीदने के लिए शुभ समय है।
चल और अचल सम्पत्ति एवं वस्तुओं को खरीदने हेतु दोपहर 2:46 से 4:13 तक शुभ मुहूर्त है।
तेज गति से अनवरत चलने वाली मशीनें , टैक्सी में चलने वाले वाहन , यातायात में चलने वाले वाहन , तीव्र गति से चलने वाली वस्तुएं आदि 4:17 से 5:49 तक खरीदना लाभदायक रहेगा ।
सायं 5:49 से 7:44 तक ।
भवन ,भूमि ,सोना , चांदी श्री गणेश लक्ष्मी स्थायित्व वाली वस्तुओं को खरीदने के लिए शुभ समय है ।
7:44 से 9:51 तक
सोना चांदी चल और अचल दोनों प्रकार की वस्तुओं को खरीदने के लिए शुभ समय है ।
9:51से रात्रि 12:24 मिनट तक । टैक्सी में चलने वाले वाहन,तीव्र गति से चलने वाली मशीनें आदि के लिए शुभ समय है ।
खरीदारी करते समय आप विशेष रूप से अपनी जन्म राशि के चंद्रमा का ध्यान अवश्य रखें । यदि आपकी राशि के चन्द्रमा से दिन का चंद्रमा चौथा, आठवां, बारहवां है तो यह नेष्ठ है।
ऐसी स्थिति में खरीदी गई वस्तु चोरी हो सकती है या नष्ट हो सकती है , आग लग सकती है , दुर्घटनाग्रस्त हो सकती है।
10 नवम्बर को चन्द्रमा कन्या राशि में रहेगा। ऐसी स्थिति में मिथुन राशि वालों के लिए इनका चौथ चंद्रमा है ,कुंभ राशि वालों के इनका अष्टम चंद्रमा है , तुला राशि वालों के लिए बारहवां चंद्रमा है।
अतः उपरोक्त राशि वालों को इस दिन कीमती वस्तु खरीदने से बचना होगा। आप अन्य किसी परिजन की जिनकी राशि मिथुन, कुम्भ, तुला न हो उनके नाम से खरीद सकते है।
इस दिन राहु काल प्रातः 10:41 से दोपहर 12:03 तक रहेगा। राहुकाल में कोई वस्तु खरीदने एवं शुभ कार्य करने से बचें।
विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ अरविन्द मिश्र
वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ
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: जिला कारागार आगरा में हुई पं. श्रीराम शर्मा आचार्य पुस्तकालय की स्थापना
Thu, Nov 9, 2023
आगरा। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा भारतवर्ष की प्रमुख जेलों में ‘हम बदलेंगे-युग बदलेगा’ और ‘हम सुधरेंगे-युग सुधरेगा’ की भावना के साथ बंदी साधना अभियान कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिससे बंदी आत्म समीक्षा और आत्म कल्याण की भावना लेकर अपना जीवन सन्मार्ग और सत्कर्म में लगा सकें।
बंदी साधना अभियान के अन्तर्गत आज जिला कारागार, आगरा में परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीरामशर्मा आचार्य जी द्वारा सम्पूर्ण जीवन पर आधारित लिखित 3200 पुस्तकों के ज्ञान ग्रन्थ में से 2100 पुस्तकों के साथ सद्ग्रन्थ साहित्य की स्थापना की गयी। जिसका उद्घाटन सिटी मजिस्ट्रेट प्रथम संजीव कुमार शाक्य एवं जेलर बी.के. गौतम ने दीप प्रज्वलित कर किया। गायत्री परिवार आगरा के वरिष्ठ परिजन विजयपाल बघेल, जयंती प्रसाद कुशवाह एवं बैजनाथ परिव्राजक के द्वारा संगीतमय भजन प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की गयी।
जिला कारागार आगरा में सद्ग्रन्थ साहित्य की स्थापना करते सिटी मजिस्ट्रेट संजीव कुमार एवं जेलर वी.के. गौतम
सिटी मजिस्ट्रेट संजीव कुमार ने बंदियों को गायत्री उपासना का महत्व समझाते हुए कहा कि ज्ञानवर्धक साहित्य स्वाध्याय से निश्चित ही आपके जीवन में परिवर्तन आएगा एवं गायत्री मंत्र की साधना से दुर्विचारों का शमन होने लगता है और व्यक्ति का जीवन श्रेष्ठ मार्ग की ओर उन्मुख होने लगता है।
जेलर वी.के. गौतम ने बंदियों को संबोधित कर युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा शुरु किये गये विचार क्रांति अभियान के विषय में विस्तृत जानकारी दी।
मध्य प्रदेश से आए प्रेम लाल कुशवाह ने बताया कि यह कार्यक्रम बंदी साधना अभियान के अन्तर्गत 91वाँ कार्यक्रम है एवं सभी बंदी भाईयों को एक बुराई छोड़ने एवं एक अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प कराया।
आगामी कार्यक्रम इच्छुक, शिक्षित, चयनित बन्दियों को युग पुरोहित प्रशिक्षण की प्रक्रिया शीघ्र आरम्भ की जायेगी।
कार्यक्रम संयोजक शिवांक उपाध्याय ने आगरा जिला की ओर से 1200 मंत्रलेखन पुस्तिकाऐं बंदियों को प्रदान की गयीं। मुख्य रूप से टी.एस.चाहर, रेख अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
: श्रीकृष्ण लीला महोत्सव में होगा संतों का समागम, आएंगे गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी भी
Tue, Nov 7, 2023
बल्केश्वर स्थित गौशाला प्रांगण में 17 से 28 नवंबर तक होगा भव्य आयोजन
महोत्सव को हो रहे हैं 100 वर्ष पूर्ण, शताब्दी वर्ष में मिलेगा ब्रज के संतों का सानिध्य
चार दिन विभिन्न शाेभायात्रा करेंगी नगर भ्रमण, नंद सखा मिलाप और गौचरण होगा आकर्षण
आगरा। ब्रज के कण− कण में वास है श्रीकृष्ण का। ब्रज के 12 वनों में से प्रमुख अग्रवन यानि आगरा में श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। निरतंर 100 वर्षाें से होते आ रहे भव्य आयोजन के शताब्दी वर्ष में ब्रज के संतों का समागम विशेष रहने वाला है। इसके लिए सर्वप्रथम स्वीकृति विश्व के सबसे प्रसिद्ध गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने दे दी है। ब्रज के अन्य संतों को भी आयोजन में आने के लिए निमंत्रण दिया गया है।
श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल और राजीव अग्रवाल ने वृंदावन जाकर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज को महोत्सव का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर श्रीकृष्ण लीला महोत्सव की स्मारिका लीलांजली का विमोचन भी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के कर कमलों द्वारा हुआ। अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग को भी आयोजन का निमंत्रण दिया। श्रीकृष्ण लीला महोत्सव 17 से 28 नवंबर तक गौशाला प्रांगण, बल्केश्वर, वाटरवर्क्स पर प्रतिदिन सायं 6ः30 बजे से आरंभ होगा।
100 वर्ष की परंपरा को आज भी किया जा रहा जीवंत
श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि शहर में श्रीकृष्ण लीला का आरंभ 1924 में बेलनगंग में आरंभ किया था। इसके बाद 9 नवंबर 1939 में गाैशाला, बल्केश्वर में पूरनचंद्र एंड कंपनी के स्वामी रामबाबू अग्रवाल ने लीला का मंचन आरंभ कराया और लीला स्थल को दान में श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति को दे दिया। तभी से निरंतर लीला का मंचन यहां होता है।
जीवंत हो उठता है द्वापर युग
दस दिवसीय श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के दौरान जैसे गौशाला के प्रांगण में द्वापर युग जीवंत हो उठता है। परिसर में बना कंस कारागार हो या युद्ध का मैदान लीला मंचन का हर वृतांत सजीव झांकी की भांति श्रद्धालुओं के मानस पटल पर अविस्मरणीय छाप छोड़ता है। आयोजन का आरंभ 17 नवंबर को श्रीमुकुट पूजन एवं गणेश जी सवारी से होगा। इसके बाद कंस की दुहाई, देवकी वसुदेव विवाह एवं श्रीकृष्ण जन्मलीला, गोपाष्टमी, नंदोत्सव, डांडिया नृत्य, कालीदह लीला, गौमय श्रंगार एवं गोवर्धन पूजा− अन्नकूट प्रसाद, शंकरलीला− माखन चोरी, फूलों की होली, श्रीकृष्ण लीला− सुदामा मिलन लीला, अक्रूर गमन− कंस वध एवं आतिशबाजी, श्रीकृष्ण बलराम की दिव्य शाेभायात्रा, द्वारिकापुरी रुक्मणि मंगल विवाह लीला एवं हवन लीला होगी।
चार दिन निकलेंगी शाेभायात्रा
श्रीकृष्ण लीला महोत्सव में 17 नवंबर को पहली शाेभायात्रा श्री मुकुट पूजन एवं गणेश जी की सवारी नगर भ्रमण करेगी। इसके बाद 18 नवंबर को कंस की दुहाई की सवारी, 20 नवंबर को गोपाष्टमी विशेष शाेभायात्रा एवं 26 नवंबर को श्रीकृष्ण बलराम की दिव्य शाेभायात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा 20 नवंबर को नंद सखा मिलाप विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।