: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ से संपन्न हुआ श्री कृष्ण लीला महोत्सव
Tue, Nov 28, 2023
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बल्केश्वर स्थित गौशाला में 11 दिन संत समागम के साथ बही श्री कृष्णा भक्ति रसधार
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शताब्दी वर्ष में कृष्ण महोत्सव, शोभा यात्रा और गौचरण ने महोत्सव को बनाया आकर्षक
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हवन यज्ञ के साथ श्री कृष्ण लीला महोत्सव समिति ने वर्ष भर आयोजन का लिया संकल्प
आगरा। कलिकाल में भागवत कथा प्रभु नाम स्मरण मात्र से मानव कल्याण संभव है। श्री कृष्ण लीला महोत्सव समिति द्वारा बल्केश्वर गौशाला में पिछले 100 वर्षों से आयोजित श्री कृष्ण लीला महोत्सव का मंचन कुछ इसी सोच और मानव कल्याण की परिकल्पना को लेकर आयोजित किया जा रहा है। 17 नवंबर से शुरू हुआ श्री कृष्ण लीला महोत्सव का समापन वैदिक ऋचाओं पर हवन पूजन के साथ आरती वंदना कर संपन्न हुआ। विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए श्री कृष्ण भक्तों ने यज्ञ भगवान का स्मरण करते हुए हवन में आहुतियां दी।
विगत 11 दिनों में बल्केश्वर स्थित श्री कृष्ण लीला महोत्सव स्थल द्वारका धाम बना हुआ था। जहां पर भक्ति भाव से भक्तों ने श्री कृष्ण लीला महोत्सव का मंचन देखकर महोत्सव में आए संत महात्माओं के उपदेश प्रवचनों को अपने जीवन का सूत्र बनाया। महोत्सव के आखिरी दिन संस्कृत मनीषियों ने हवन यज्ञ कराकर विश्व कल्याण की कामना की। हवन पूजन के उपरांत आरती में घंटे घड़ियाल की मधुर ध्वनि के साथ सभी भक्तों ने एक स्वर में शताब्दी वर्ष में वर्ष भर आयोजन करने का संकल्प लिया। महोत्सव समापन के दिन विगत 11 दिनों से सेवा कर रहे समिति पदाधिकारियों के साथ क्षेत्रीय भक्त लीला कलाकारों के साथ भाव विभोर हो गए।
बल्केश्वर गौशाला में चल रहे श्री कृष्ण लीला शताब्दी समारोह में हवन पूजन कर विश्व शांति की कामना करते समिति के पदाधिकारी और भक्तजन।
ठाकुर जी की रही कृपा, लेकिन नहीं मिला प्रशासन का सहयोग
श्री कृष्ण लीला महोत्सव के शताब्दी वर्ष के आयोजन को भव्य बनाने के लिए महोत्सव समिति से जुड़े हुए पदाधिकारियों ने जी जान लगा दी। लीला मंचन के दौरान समिति पदाधिकारियों के साथ भक्त जनों का विशेष सहयोग रहा। समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा इस भव्य आयोजन में ठाकुर जी की विशेष कृपा रही जिससे यह कार्यक्रम संपन्न हुआ लेकिन शताब्दी वर्ष में समिति को नगर निगम और जिम्मेदार विभागों की ओर से विशेष सहयोग नहीं मिल सका। इतने बड़े महोत्सव के दौरान ना तो फायर ब्रिगेड की ओर से कोई व्यवस्था की गई और ना ही श्री कृष्ण लीला स्थल पर नगर निगम की ओर से विशेष सफाई और पुलिस प्रशासन का भी जो सहयोग अपेक्षित था नहीं मिला यही पीड़ा है।
बाल बाल बचे केंद्रीय राज्यमंत्री बघेल
बल्केश्वर गौशाला में आयोजित श्री कृष्ण लीला महोत्सव में गौशाला कर्मचारियों की लापरवाही और अनदेखी की वजह से दो बार हादसा होते-होते टल गया। प्रभु श्री कृष्ण राधा रानी की कृपा से श्री कृष्ण लीला महोत्सव बिना किसी विघ्न बाधा के संपन्न हुआ लेकिन 26 नवंबर को उस समय एक हादसा होने से बच गया जब शोभायात्रा के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल गौशाला के बारे में जानकारी ले रहे थे उसी वक्त गौशाला परिसर से एक हिंसक सांड बड़ी तेजी से शोभा यात्रा की ओर भागा जिससे केंद्रीय राज्य मंत्री बाल बाल बच गए लेकिन पास में ही खड़ा उनका फोटोग्राफर चोटिल हो गया। हिंसक गोवंश ने उस वक्त कई गाड़ियों के शीशों को भी तोड़कर उत्पात मचाया। श्री कृष्ण लीला महोत्सव संयोजक शेखर गोयल ने बताया कि हवन पूजन के दौरान भी गोवंश का उत्पात भक्त जनों को भयभीत करता रहा। हवन यज्ञ के समय गौशाला की तरफ से आई एक गाय ने स्कूटर को गिरा दिया, डर की वजह से लोग मंदिर की ओर भाग गए। उन्होंने कहा लीला मंचन के दौरान भी गौशाला के कर्मचारियों ने कार्यक्रम में सहभागिता न दिखाते हुए जो लापरवाही की वह चिंतनीय है।
इनकी रही मौजूदगी
श्री कृष्ण लीला महोत्सव बलकेश्वर द्वारा आयोजित श्री कृष्ण महोत्सव में समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, विजय रोहतगी, शेखर गोयल, अशोक गोयल, केके अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, विनीत सिंघल, कैलाश खन्ना, पीके मोदी, अनूप अग्रवाल, प्रभात रोहतगी, आशु रोहतगी, राजेंद्र अग्रवाल, ब्रज भोग, कोयल शर्मा, बीजी अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, सुजाता अग्रवाल, नीरू, पारुल अग्रवाल कीर्ति अग्रवाल, सचिन शर्मा, कृष्णा, मीडिया प्रभारी तनु गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारी और भक्तजन मौजूद रहे।
: रुक्मिणी के समर्पण को श्रीकृष्ण ने दिया वैदिक विवाह का वरदान, वरमाला के साथ गूंजे मंगलगान
Mon, Nov 27, 2023
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श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह में हुआ द्वारिकापुरी रुक्मिणी मंगल विवाह लीला का मंचन
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जय श्रीकृष्ण हरे के गूंजे जयघोष, लीला स्थल पर ही निकाली गयी वरयात्रा, भक्तों ने बरसाए पुष्प
आगरा। गोविंद हरे, गोपाल हरे के जयघोष थे और मंगलगान गूंज रहे थे श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी के मंगल विवाह के।
श्रीकृष्ण लीला समिति के तत्वावधान में चल रहे श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के 11वें दिन शिशुपाल वध और द्वारिकापुरी में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह लीला का मंचन किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने जमकर मंगलगान गाए और जयघोष किए।
लीला में दिखाया गया कि विदर्भ देश में भीष्मक नाम के राजा राज्य करते थे। कुण्डिनपुर उनकी राजधानी थी। उनकी पुत्री रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध थी और उसने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। भगवान श्रीकृष्ण तो परमज्ञानी हैं। उन्हें ज्ञात था कि रुक्मिणी परम रूपवती और सुलक्षणा भी है और उन्हें वर रूप में प्राप्त करना चाहती है।
भीष्मक का बड़ा पुत्र रुक्मी भगवान श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था। वह बहन रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था, क्योंकि शिशुपाल भी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था। भीष्मक ने रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ ही करने का निश्चय किया और तिथि तय कर दी।
रुक्मिणी ने यह सूचना श्रीकृष्ण के पास भेज दी। उन्हें बता दिया कि उसके पिता उसकी इच्छा के विरुद्ध शिशुपाल के साथ उसका विवाह करना चाहते हैं। विवाह के दिन मैं गिरिजा माता के दर्शन करने को जाऊंगी। मंदिर में पहुंचकर मुझे पत्नी रूप में स्वीकार करें। यदि आप नहीं पहुंचेंगे तो मैं आप अपने प्राणों का परित्याग कर दूंगी। रुक्मिणी का संदेश पाकर भगवान श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर शीघ्र ही कुण्डिनपुर की ओर चल दिए। बलराम भी यादवों की सेना के साथ कुण्डिनपर के लिए रवाना हो गए।
बल्केश्वर गौशाला में चल रहे श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह में कृष्ण रुक्मणि विवाह लीला का मंचन करते कलाकार
शिशुपाल निश्चित तिथि पर बारात लेकर कुण्डिनपुर जा पहुंचा। वहीं दूसरी ओर रुक्मिणी सज-धजकर गिरिजा देवी के मंदिर की ओर चल पड़ी। पूजन करने के बाद रुक्मिणी जब मंदिर से बाहर निकल कर अपने रथ पर बैठना ही चाहती थी कि श्रीकृष्ण ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खींचकर अपने रथ पर बैठा लिया। तीव्र गति से द्वारका की ओर चल पड़े।
शिशुपाल ने श्रीकृष्ण का पीछा किया। बलराम और यदुवंशियों ने शिशुपाल को रोक लिया। भयंकर युद्ध में बलराम और यदुवंशियों ने शिशुपाल की सेना को नष्ट कर दिया। फलतः शिशुपाल निराश होकर कुण्डिनपुर से चले गए।
रुक्मी ने श्रीकृष्ण का पीछा किया। रुक्मी और श्रीकृष्ण का घनघोर युद्ध हुआ। श्रीकृष्ण ने उसे युद्ध में हराकर अपने रथ से बांध दिया, किंतु बलराम ने उसे छुड़ा लिया। रुक्मी अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार पुनः लौटकर कुण्डिनपुर नहीं गया। वह एक नया नगर बसाकर वहीं रहने लगा। कहते हैं, रुक्मी के वंशज आज भी उस नगर में रहते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी को द्वारका ले जाकर उनके साथ विधिवत विवाह किया। श्री कृष्ण की वरयात्रा लीला स्थल पर ही निकाली गई। इस अवसर पर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, विजय रोहतगी, अशोक गोयल, संजय गर्ग, बीजी अग्रवाल, मनीष शर्मा, शेखर गोयल, विनीत सिंघल, केसी अग्रवाल, कैलाश खन्ना, संजय चेली, मनीष बंसल, गिर्राज बंसल, बृजेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, मनीष बंसल, मीडिया प्रभारी तनु गुप्ता, डीके चौधरी आदि उपस्थित रहे।
हवन के साथ होगा लीला का समापन
अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि 11 दिन के लीला मंचन आयोजन को मंगलवार सुबह 9 बजे हवन के साथ विराम दिया जाएगा।
: देव दीपावली पर 21 हजार दीपों से जगमगाया श्रीजगन्नाथ मंदिर
Mon, Nov 27, 2023
बैकुण्ड चतुर्दशी पर श्रीजगन्नाथ जी का हुआ लक्ष्मी-नरसिंह रूप में श्रंगार, दीपदान कर श्रीहरि के कीर्तन में झूमें श्रद्धालू
आगरा। श्रीजगन्नाथ मंदिर में आज हर तरफ श्रृद्धा और भक्ति की रोशनी बिखरी थी। श्रीहरि के जयकारे और हर तरफ प्रज्ज्वलित 21 हजार दीपों की झिलमिलाती रोशनी और सतरंगी फूलों से सजा था श्रीहरि का मंदिर। लक्ष्मी-नरसिंह स्वरूप में भक्तों को आशीर्वाद देने और शांत मुद्रा में श्रृंगारित श्रीजगन्नाथ जी के अलौकिक दर्शन। कुछ ऐसा ही भक्तिमय दृष्य था कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ जी मंदिर में। जहां आज बैकुण्ठ चतुर्दशी (देव चतुर्दशी) महोत्सव का आयोजन उत्साह और उमंग के साथ किया गया। सिर्फ मंदिर ही नहीं मंदिर के आस-पास के घर भी दीपों से जगमाते नजर आए।
इस्कॉन मंदिर, आगरा के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप ने बताया कि आज के दिन ही गज-ग्राह लीला (हाथी और मगर की लीला) में श्रीहरि के परम भक्त गज (हाथी) का बैकुण्ड गमन हुआ था। इसलिए आज दीपदान का विशेष महत्व है। बताया कि श्रीजगन्नाथ जी वर्ष में एक बार ही आज के दिन लक्ष्मी नरसिंह रूप में दर्शन देते हैं। श्रीहरि का यह रूप भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करने वाला है। संध्या आरती के बाद हरे राम, हरे कृष्णा… का मृदंग और मंजीरों पर कीर्तन किया, जिसमें सैकड़ों भक्त श्रीहरि की भक्ति में झूमते रहे। इसके उपरान्त भक्तों द्वारा 21 हजार दीपदान किए गए।
इस अवसर पर मुख्य रूप से शैलेन्द्र अग्रवाल, राहुल बंसल, अशु मित्तल, सुशील अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, त्रिलोक चंद ग्रवाल, अखिल बंसल, विकास बंसल, संजय कुकरेजा, राजीव मल्होत्रा, हर्ष खटाना, अनिल गुप्ता आदि उपस्थित रहे।