: गायत्री परिवार कानपुर नगर के जिला समन्वयक का हुआ चयन
Mon, Feb 12, 2024
कानपुर नगर। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों द्वारा जनपद कानपुर नगर की जिला संयुक्त समन्वय समिति के पुनर्गठन हेतु शुक्लागंज उन्नाव में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता शांतिकुंज प्रतिनिधि अयोध्या जोन समन्वयक देशबंधु तिवारी एवं उप जोन समन्वयक शिवाकांत त्रिपाठी ने की। गोष्ठी में जनपद कानपुर नगर के सभी वरिष्ठ सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे। परम वन्दनीया माताजी की जन्म शताब्दी एवम अखण्डदीप की शताब्दी 2026 में मनाई जा रही है । इस अवसर पर सन 2025 तक कानपुर नगर के प्रत्येक गाँव-गाँव, घर-घर तक मिशन को पहुँचाने के संबंध में विस्तार से विचार विमर्श गोष्ठी में किया गया।
स्थानीय उपजोंन प्रभारी श्री रामचंद्र गुप्ता जी के मार्गदर्शन में सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने मिशन की गतिविधियों में तीव्रता लाने और सक्रियता बढ़ाने का संकल्प किया। सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श के पश्चात सर्वसम्मति से जिला संयुक्त समन्वय समिति, कानपुर नगर का पुनर्गठन हुआ तथा नए जिला समन्वयक का उत्तरदायित्व आर0 पी0 लाल श्रीवास्तव जी व सह जिला समन्वयक का उत्तरदायित्व लालचंद विश्वकर्मा को दिया गया। पूर्व जिला समन्वयक लक्ष्मी नारायण कुशवाहा, आर बी एस परमार, सुरेश चंद्र तिवारी, आनंद रावत, डॉ0 अमरनाथ सारस्वत जी, गोविंद बिहारी, राकेश खरे, श्रीमती रीतू खरे एवं कानपुर देहात के जिला समन्वयक विशन सिंह ने नए जिला समन्वयक आर0 पी0 लाल जी को इस दैवीय उत्तरदायित्व हेतु हार्दिक शुभकामनाएं दी। जिला समन्वयक आर0पी0 लाल ने सभी भाई-बहनों के प्रति आभार प्रकट किया।
: महामाई कामाख्या के जयकारों से गूंजा यज्ञ स्थल, महायज्ञ का हुआ शुभारम्भ
Mon, Feb 12, 2024
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मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ का शुभारम्भ
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यज्ञकुण्डों में आज दी गई प्रथम आहूति, देवी देवताओं की 56 मूर्तियां का हुआ पूजन
आगरा। महामाई कामाख्या देवी के जयकारों और 108 यज्ञ कुण्डों में प्रज्ज्वलित पावन अग्नि ने समस्त वातावरण को पवित्र बना दिया। हर तरफ दैवीय प्रभाव के साथ महामाई कामाख्या व भैरव बाबा की ध्वजाएं लहरा रही थीं। आसाम व मिथिलानगरी से आए आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारम के साथ सर्वप्रथम गौ पूजन के उपरान्त 108 यज्ञ कुण्डों में अग्नि प्रज्ज्वलित कर मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ का शुभारम्भ किया गया।
यज्ञ से पूर्व परिसर में 56 देवी देवताओं की मूर्तियों का विधि विधान के साथ पूजन किया गया। संत स्वामी श्री कीर्तिनाथ जी महाराज जी के नेतृत्व में प्रातः यज्ञ के बाद दोपहर दो बजे पुनः यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारम के साथ महामाई के नाम की आहूतियां दी गईं। एक साथ 108 कुण्डों में यज्ञ की पवित्र अग्नि के साथ वैदिक मंत्रों के उच्चारण ने मानों भक्ति के ऐसे सरोवर का निर्माण कर दिया जहां परमानन्द की अनुभूति के अलावा और कुछ नहीं था। भक्ति के इस आनन्द का अनुभव हर श्रद्धालु ने महसूस किया। दोपहर को कथा वाचक संजय शात्री द्वारा श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भक्तिमय व संगीतमय वर्णन किया गया। माखनचोरी, कालिया नाग का मंथन जैसी सचित्र कथा सुनकर हर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठा। कथा के साथ कीर्तन का भी आयोजन हुआ। संध्या काल में रासलीला के मंचन के लिए श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ी।
इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के मुरारीप्रसाद अग्रवाल, वंदना मेड़तवाल, अजय गोयल, राहुल अग्रवाल, उमेश अग्रवाल, अवि गोयल, पवन भदौरिया, सुनील पाराशर, डॉ. सुभाष भारती, प्रीतम सिंह लोधी, जयशिव छोकर, वीरेन्द्र मेड़तवाल, सीमा गोयल, रीया आदि उपस्थित थे।
18 को होगा संतों का विराट सम्मेलन
आगरा। आयोजन समिति के अध्यक्ष कान्ता प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि यज्ञ स्थल पर 18 फरवरी को साधू संतों के विराट सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उज्जैन, काशी, अयोध्या मिथिला, आसाम, वृन्दावन सहित देश के विभिन्न तीर्थस्थलों के 300 से अधिक साधू संत भाग लेंगे।
: प्रधान कुण्ड के पूजन के साथ हुआ मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ का शुभारम्भ
Sat, Feb 10, 2024
रविवार को होगी प्रथम आहूति, देवी देवताओं की 56 मूर्तियां की हुई प्राण प्रतिष्ठा
महामायी की ध्वजाओं से लहराया यज्ञस्थल, आसाम व मितिलानगरी से आए 21 आचार्यों ने कराया पूजन
आगरा। वैदिक मंत्रोच्चारण से प्रधान कुण्ड के पूजन के साथ मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ का शुभारम्भ हुआ। गुवाहटी (आसाम) व मिथिनगरी से आए 21 आचार्यों ने विधि विधान के साथ यज्ञ कुण्डों का पूजन कराया। यज्ञ स्थल पर तैयार की गई देवी देवताओं की 56 मूर्तियों का प्राण प्रतिष्ठा कर पूजन किया गया। रविवार से 108 कुण्डीय यज्ञ गौ पूजन के साथ 20 फरवरी तक प्रतिदिन सुबह नौ बजे से आयोजित किया जाएगा।
महामाई के यज्ञ स्थल पर मानों समस्त देवलोक पधार आया हो। शिव परिवार, राम दरबार, राधा-कृष्ण, विघ्न विनाशक गणपति, बजरंग बली, मां दुर्गा के नौ स्वरूपों सहित पंचमुखी मां कामाख्या देवी की आकर्षक मूर्तियां यज्ञ स्थल पर देव लोक का आभास करा रहीं हैं। सभी मूर्तियों को एक प्रांगण में सजाया गया है। हर तरफ महामाई कामाख्या देवी की ध्वजाएं लहरा रही हैं। आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा आज विधि विधान से पूजन कर यज्ञशाला की आरती की गई। रविवार को प्रातः गौ पूजन के उपरान्त महायज्ञ का आयोजन होगा। महायज्ञ में भाग लेने के लिए 300 से अधिक साधू संत विभिन्न धार्मिक स्थानों से पधारे हैं। प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से श्रीराम कथा व शाम 7 बजे से रामलीला का मंचन किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के मुरारीप्रसाद अग्रवाल, यशपाल सिंह चैधरी, वंदना मेड़तवाल, अजय गोयल, राहुल अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, उमेश अग्रवाल, अवि गोयल, पवन भदौरिया, सुनील पाराशर, डॉ. सुभाष भारती, प्रीतम सिंह लोधी, जयशिव छोकर, विरेन्द्र मेड़तवाल आदि उपस्थित थे।
मेले का आनन्द भी उठाएंगे श्रद्धालू
महायज्ञ में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यज्ञ स्थल पर ही मेले का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बच्चों के लिए झूले, धार्मिक सामग्री व खान-पान की स्टॉलें होंगी। यज्ञ स्थल पर साधू संतों के ठहरने के लिए रैन बसेरा व भंडारे की भी व्यवस्था की गई है।